लीक से हटकर : ग्वालियर से खींच लाई शांगढ़ की खूबसूरती, आईबीएम की जॉब क्विट कर हायर हिमालय मे टैवर्ज- टूरिज्जम में स्टार्टअप ‘हिमालयन मांउट राइडर्ज ऐसोशिएशन’ के फांउडर शरद त्यागी के पहाड़ से प्रेम की प्रेरककथा

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लीक से हटकर : ग्वालियर से खींच लाई शांगढ़ की खूबसूरती, आईबीएम की जॉब क्विट कर हायर हिमालय मे टैवर्ज- टूरिज्जम में स्टार्टअप
‘हिमालयन मांउट राइडर्ज ऐसोशिएशन’ के फांउडर शरद त्यागी के पहाड़ से प्रेम की प्रेरककथा
शांगढ़ से विनोद भावुक की रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के ग्वालियरके शरद त्यागी आईटी इंजीनियरिंग कर दिल्ली में आईबीएम जैसी कॉरपोरेट प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में आकर्षक पैकेज वाले टीम लीडर के पद पर तैनात थे। पांच साल पहले जून 2013 में उन्होंने अपनी जॉब को क्विट कर हायर हिमालय में टैवर्ज एंड टूरिज्जम की फील्ड में इनोवेटिव करने का स्टार्टअप किया। उन्होंने अपने स्टार्टअप के लिए ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में स्थित कुल्लू की सैंज घाटी के खूबसूरत पर्यटक स्थल शांगढ़ को चुना। हिमालयन मांउट राइडर्ज ऐसोशिएशन के फांउडर सीईओ और रोड़ कैप्टन के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके शरद त्यागी शांगढ़ में पर्यटन की एक नई प्रेरककथा लिख रहे हैं। उन्होंने इस घाटी के कई ट्रैक रूट्स को नई पहचान दी है, वहीं शांघढ़ में कैंपिंग और योग के लिए दुनिया भर के टूरिस्ट्स को आमंत्रित कर रहे हैं। स्थानीय युवाओं को ट्रेकिंग के कारोबार के लिए दक्ष किया है और यहां के दस युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए हैं।
चुनौती को स्वीकारा
पिछले पांच सालों से शांगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाए शरद त्यागी कहते हैं कि इस घाटी में पर्यटन की संभावनाएं तलाशना कतई आसान नहीं था। यहां तक सडक़ की सुविधा अच्छी नहीं थी, पर्यटकों को ठहराने के लिए प्रबंध नहीं था, लेकिन पिछले पांच सालों में स्थितियां काफी बदल गई हैं। अब यहां न केवल स्थानीय बल्कि देश- विदेश के पर्यटक पहुंचने लगे हैं। होम स्टे के लिए भी लोग आगे आने लगे हैं। स्थानीय युवा भी पर्यटन खासकर ट्रेकिंग के कारोबार के लिए तैयार होने लगे हैं।
कॉरपोरेट की जॉब को बॉय
नेशनल चिल्ड्रन स्कूल, मॉडल हाई स्कूल, मंगला इायर सकेंडरी स्कूल च्वालियर से पढऩे के बाद ऑरियलटल इंस्टीच्यूट ऑफ सांइस एंड टेक्रोलॉजी से आईटी इंजीनियरिंग कर शरद ने अपने करियर की शुरूआत की। अपने काम में माहिर शरद जल्द ही आइबीएम जैसे प्रतिष्ठित आईटी संस्थान में टीम लीडर की पोस्ट पर पहुंच गए। बेशक शरद अपने करियर के शीर्ष पर थे, लेकिन उन्हें लग रहा था कि इसके बदले में उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। एक मशीन की तरह बन कर रह गए हैं।
निकल पड़ा पहाड़ की ओर
शरद का कहना है कि ‘कॉर्पोरट में बेशक आकर्षक पैकेज था, लेकिन लाइफ ऐसी की कंपनी का सिक्युरिटी गार्ड तक नहीं पहचानता था। परफॉर्मेंस शानदार तो इंक्रीमेंट वर्ना कब जॉब पर लात पड़ जाए कोई नहीं जानता। अगर कुछ महीनों के लिए बीमार पड़ गए तो समझो कंपनी के लिए आप बेकार हो गए। ऊंची इमारतों वाली करियरस्टि मेट्रोसिटी में सुख- दुख बांटने की फुर्सत कहां। शौक के लिए टाइम एडजस्टमेंट मुश्किल होती थी। दिल्ली में आईबीएम कंपनी में आईटी प्रोफेशनल था, लेकिन एक दिन अपने करियर और मेट्रो की चकाचौंध से दिल भर गया और अपने शौक के लिए निकल पड़ा पहाड़ की तरफ।’
बचपन से पहाड़ बुलाया
मध्य प्रदेश के गवालियर के शरद त्यागी को बाइकिंग का शुरू से ही शौक रहा है। अपने स्कूल कॉलेज के दिनों से ही शरद को न केवल ट्रेकिंग करने का शौक था, बल्कि बाइक राइडिंग के लिए भी दीवानगी थी, कविता करने लगा था। उन्होंने अपने करियर को अपने शौक पर हावी नहीं होने दिया। लेखन को शौक अब भी अपने सोशल मीडिया पेज ‘शांर’ पर जारी है, बाइकिंग के शौक को प्रोफेशन में ढाल लिया है। पहाड़ छूने की हसरत ने कैंपिंग और ट्रेकिंग जैसे स्टार्टअप के लिए दरवाजे खोले हैं। योग से मन की शांति को अपने हायर हिमालय ट्रैवल एंड टूजिम इनिशिएटिव में शामिल किया है।
रोड़ ट्रिप्स, ट्रेकिंग एक्सपीडिसन
शरद त्यागी हायर हिमालय में रेाड ट्रिप का आयोजन करते हैं। ऐसे ट्रिपस स्पीति, लेह- लदाख जैसे ऊंचे और जोखिम भरी सडक़ों पर आयोजित किए जाते हैं। ऐसे ट्रिप्स में वे खुद रोड़ केप्टन की भूमिका में सबसे आगे बाइक राइडर के तौर पर चलते हैं। लदाख, लाहौल स्पीति और सैंज घाटी में वे समर और विंटर दोनों तरह के ट्रेकिंग एक्सिपीडिसन का आयोजन करते हैं। शांगढ़ को कैंपिंग और योगा कैंपस के लिए विकसित करते हैं।

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