रिस्पांसिबल टूरिज्जम : पर्यटन से सबको बराबर कमाई, महिलाओं के हाथ पाई पाई,इशिता खन्ना के प्रयासों ने स्पीति ईकोस्फेर ने पेश की  सामुदायिक प्रबंधन की अनूठी मिशाल

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रिस्पांसिबल टूरिज्जम : पर्यटन से सबको बराबर कमाई, महिलाओं के हाथ पाई पाई,इशिता खन्ना के प्रयासों ने स्पीति ईकोस्फेर ने पेश की  सामुदायिक प्रबंधन की अनूठी मिशाल
काजा से विनोद भावुक की रिपोर्ट
ऐसे समय में जहां व्यापार प्रतियोगिता और व्यक्तिगत लाभ का पर्याय बन गया है, आपको पर्यटन कारोबार के एक ऐसे मॉडल से परिचित करवाते हैं जो पिछले 12 सालों से प्रतियोतिा के बजाये सहयोग के मॉडल पर आधारित है। होम स्टे की अनूठी मिशाल कायम करने वाले स्पीति के दिमूल गांव की सबसे खास बात यह है कि यहां हर हर घर को पर्यटन कारोबार में बराबर पैसा मिलता है। यहां रोटेशन सिस्टम लागू है और यह सुनिश्चित किया गया है कि गांव के हर घर मालिक को पर्यटन से समान रूप की कमाई हो। यह भी अविश्वसनीय है कि यहां पर्यटन से कमाई का सभी पैसे महिलाओं के हाथ जाता है। स्पीति ईकोस्फेर को इस बार आडटलुक पत्रिका की ओर से सामुदायिक प्रबंधन से चलने वाले देश के सर्वक्षेष्ठ होम स्टे के लिए रिस्पांसिबल टूरिज्जम अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
सामाजिक – आर्थिक बदलाव
छह माह तक बर्फ के आगोश में रहने वाली लाहौल की स्पीति घाटी के सामाजिक और आर्थिक जीवन में बदलाव में पिछले डेढ़ दशक में ‘इकोस्फीयर’ संस्था अहम भूमिका निभा रही है। संस्था के लिए प्रयासों का परिणाम है कि जहां ओर इस घाटी की ओर पर्यटकों की आमद में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों की आर्थिकी में भी जबरदस्त बदलाव आया है। बर्फ से टकराकर जीवन को उष्मा से भर देने वाली इस सत्यकथा की नायिका है इशिता खन्ना। पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन विकास का इशिता का मॉडल उसके जुनून और सामुदायिक प्रबंधन की मुंह बोलती तस्वीर है।
सामाजिक उद्यमशीलता की अनूठी मिसाल
देहरादून में पैदा हई इतिशा का बचपन से ही पर्यावरण एवं पहाड़ों के प्रति इशिता का विशेष लगाव रहा। इशिता की पढ़ाई दिल्ली में हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातक की। इसके बाद इशिता खन्ना ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर किया। अपने प्रोजेक्ट के दौरान इशिता का साधुओं, पर्यटकों, मंदिरों के अधिकारियों से मिलना हुआ। इसी दौरान इशिता ने तय कर लिया था कि वह कैरियर और जॉब के बजाय समाजिक उद्यमशीलता के लिए
बनी है।
मिल कर बदल दी तस्वीर
एक दशक पहले जब पर्यावरण से संबंधित अपने मजबूत इरादों के साथ इशिता स्पीति घाटी में पहुंची तो उस समय पर्यटन के लिहाज से दुनिया की सबसे बेहतरीन जगहों में से एक स्पीति घाटी के बारे में अधिकतर पर्यटकों को कोई खास जानकारी नहीं थी। इशिता ने तय कर लिया कि उसके सपनों की मंजिल यही है और उसे इस इलाके में विकास कार्य और संरक्षण दोनों काम करने हैं। इशिता ने स्थानीय लोगों से बातचीत शुरू की और पूरे क्षेत्र के बारे में हर जरूरी जानकारी हासिल की। स्थानीय लोगों को विश्वास में लिया और अपने मिशन पर जुट गई।
स्पीति ‘इकोस्फीयर’ की स्थापना
इशिता को पता चला कि स्पीति में पैदा होने वाली छोटी-छोटी बेरियों से यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। स्पीति घाटी में छोटी-छोटी बेरियां उगती हैं। ये बेरियां विटामिन सी का सबसे प्रमुख स्त्रोत मानी जाती हैं, इसलिए बाजार में इनकी मांग भी काफी है, लेकिन समस्या यह है कि बेरियां इकट्ठी करना बहुत मेहनत का काम है। इशिता को बेरियों की मांग से स्टार्टअप का आइडिया आ गया। साल 2004 में इशिता ने अपनी आकर्षक नौकरी छोड़ दी और स्पीति ‘इकोस्फीयर’ की स्थापना की। उसने बेरी एकत्र करने के लिए स्थानीय महिलाओं का एक समूह बनाया और उन्हें प्रशिक्षित किया। योजना पूरी तरह से स्थानीय लोगों को फायदा पहुंचाने की थी, इसलिए ठेकेदारों को मॉडल से दूर रखा गया। लेह बेरी से गुदा खरीदने का अनुबंध किया गया। जर्मन एजेंसी जीटीजेड ने मदद की और मशीनें खरीदी गईं। वर्ष 2004 में इशिता ने खुद का ब्रांड बनाने का निश्चय किया।
काम को देश-विदेश में सम्मान
इकोस्पीयर अपनी वार्षिक आय का 50 प्रतिशत खुद सृजन कर लेती है, बाकी का पैसा सहायता देने वाली एजेंसियों से आता है। इशिता खन्ना को उनके बेहतरीन कार्यों के लिए वर्ष 2008 में वाइल्ड एशिया रिस्पोंसिबल टूरिज्म अवॉर्ड, 2009 में द सीरिया क्लब ग्रीन एनर्जी एंड ग्रीन लाइवलीहुड अवॉर्ड, 2010 में वर्जिन हॉलिडे रिस्पोंसिबल टूरिजम अवॉर्ड, 2010 में ही सीएनएन आईबीएन रियल हीरोज अवॉर्ड और 2014 टुरिज्म फॉर टुमारो अवॉर्ड, मिल चुके हैं। इस बार इशिता को उाउटलुक रिस्पोङ्क्षसबल टूरिज्ल्जम अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इशिता ने साबित कर दिया है कि आर्थिक और समाजिक जीवन में इरादे ही बड़ा परिवर्तन लाने में अहम भूमिका अदा करते हैं।
इंटरनेट से मेहमानों को बुलावा
स्पीति में पर्यटन को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए इशिता और उसकी टीम ने इंटरनेट का जमकर प्रयोग किया। सोशल साइट्स पर पर्यटकों को आकर्षक ऑफर दिए गए। पर्यटक यहां आते, लोगों के घरों में रहते, उनके साथ खाना बनाते व बातें करते। इशिता ने यहां के स्थानीय युवाओं को यात्रियों को इलाके में घुमाने का प्रशिक्षण दिया। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग यहां आने लगे। इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि किसी भी प्रकार से प्रकृति को नुकसान न पहुंचाया जाए और प्लास्टिक का प्रयोग न के बराबर किया जाता है। पर्यटन से यहां औसतन 35-40 लाख रुपए सलाना कमाई हो रही है।
लोगों के घर में ठहरने लगे पर्यटक
अपने प्रोजेक्ट को सफल ब्रांड बनाने के बाद इशिता ने स्पीति में पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों को यहां कुछ नया अनुभव करवाने के अपने आइडिया पर काम करना शुरू किया। इशिता ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पर्यटकों को स्थानीय लोगों के घरों में सस्ते दामों में ठहराने की योजना बनाई। यह योजना कारगर साबित हुई। इससे लोगों की आय तो बढ़ी ही, साथ ही पर्यटकों को पहाड़ी इलाकों को काफी करीब से जानने का अनुभव भी मिल रहा था।

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