राजमाह और अखरोट देश- विदेश तक बिकते हैं, पर हिमाचल प्रदेश का पहला ओरगेनिक विलेज कुगती अभी नहीं हुआ डिजिटल

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राजमाह और अखरोट देश- विदेश तक बिकते हैं, पर हिमाचल प्रदेश का पहला ओरगेनिक विलेज कुगती अभी नहीं हुआ डिजिटल
कुगती से विनोद भावुक की रिपोर्ट
चंबा के कुगती गांव का कुदरत ने फुर्सत में श्रृंगार किया है. देवदारों से लकदक कुगती में झर- झर बहते झरने खास तरह का संगीत पैदा करते हैं. लकड़ी से बने पुरातन घर कभी शिखर पर रही काष्ठकला की गवाही देते हैं. यहां तरह- तरह की जड़ी- बूटियों का विस्तृत भंडार है. यहां कई प्रजातियों के वन्य प्राणी पाए जाते हैं, लेकिन भूरे भालू की उपस्थिति कुगती को ख़ास बनाती है. कुगती को सरकार ने हिमाचल प्रदेश का पहला ओरगेनिक विलेज घोषित है. यहां की राजमाह और अखरोट देश ही नहीं विदेश तक बिकते हैं. यह दूसरी बात है कि इस गांव को अभी डिजिटल होने का इंतज़ार है. चंबा का कुगती कुल्लू के तोष गांव की तरह खूबसूरत है, लेकिन जहां तोष में सैलानियों के लिए दर्जनों होम स्टे, गेस्ट हाउस हैं, वहीँ कुगती में अभी एक भी होम स्टे, गेस्ट हाउस नहीं है.
केलंग बजीर और मुराली माता के मंदिर का आकर्षण
न्याय के देवता केलंग बजीर (कार्तिक स्वामी) और उनकी बहन मुराली का मंदिर आकर्षण का केंद्र हैं, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. कुगती से होकर मणिमहेश के लिए भी हजारों लोग हर साल जाते हैं. गांव के प्रवेश द्वार तक सड़क पहुंच चुकी है. यहां सरकारी हाई स्कूल है. उसके बाद की पढ़ाई के लिए 26 किलोमीटर दूर भरमौर जाना पड़ता है. यहां पहाड़ी चूरी गाय पाली जाती है, लेकिन चूरी गाय के गर्भधारण के लिए जरूरी याक पिछले लम्बे अरसे से यहां नहीं है. बता दें कि पहले पशुपालन विभाग की तरफ से यहां याक उपलब्ध करवाया जाता रहा है.
रोजगार की संभावनाएं अपार
यहां प्राकृतिक तौर पर उपलब्ध संसाधनों से सतत आजीविका और रोजगार की अपार संभावनाएं हैं. सेब बागवानी यहां की आर्थिकी को बदलने की ताकत रखती है, लेकिन अधिकतर बगीचे पुराने और बेतरतीब हाल में हैं. जडी- बूटियों के वैज्ञानिक दोहन की व्यवस्था नहीं दिखती. राजमाह और अखरोट का व्यापार भी असंगठित है.इस गांव से होकर हर साल हजारों सैलानी गुजरते हैं, लेकिन होम स्टे जैसी सरकारी योजना का अभी तक कोई लाभार्थी नहीं है. साहब लोगों के आराम के लिए वन विभाग और जल शक्ति विभाग के रेस्ट हाउस जरूर हैं.
बियर सेंचुरी बनाने की वकालत
भूरे भालू पर शोध करने वाले देश के इकलौते प्राणी विज्ञानिक चंबा के विपिन राठौर
कुगती के भूरे भालू पर एक दशक से रिसर्च कर रहे हैं और कुगती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को बियर सेंचुरी बनाने की वकालत करते आ रहे हैं. चंबा के उपायुक्त डी सी राणा कहते हैं कि पर्यटन की दृष्टि से चंबा को विकसित करना उनकी प्राथमिकता में शामिल है और चंबा के पर्यटन में कुगती का अहम् स्थान है. कुगती को पर्यटन के दृष्टिगत विकसित करने के लिए रोड़मैप तैयार है.

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