यू ट्यूब से लर्निंग, मिशन बन गई पेंटिंग- शिमला के अंशुल श्याम रच रहे रंगों का नया संसार

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यू ट्यूब से लर्निंग, मिशन बन गई पेंटिंग- शिमला के अंशुल श्याम रच रहे रंगों का नया संसार
शिमला से अरविंद शर्मा की रिपोर्ट
उसे बचपन से रंगों से खेलने का शौक था। कॉलेज में पहुंचा तो चित्रकला का शौक जुनून बन गया। यू ट्यूब पर दुनिया भर के मशहूर चित्रकारों के वीडियो देखे, विभिन्न चित्रकला शैलियों के चित्रों को देखा और रंग संयोजन को समझा। उनका बरीकी से अध्ययन किया और फिर चित्रकला की अपनी शैली विकसित की। यह प्रेरककथा है न्यू शिमला के 27 साल के अंशुल श्याम के हुनर की। यू ट्यूब से लर्निंग कर पेंटिंग को मिशन बना लेने वाला यह युवा रंगों का नया संसार रच रहा है। अंशुल श्याम इस साल अपनी एकल प्रदर्शनी लगाने की तैयारियों में जुटा है। चित्रकला की दुनिया में चमकने को बेताव इस युवा का यहां तक पहुंचने का सफर कई पड़ावों से होकर गुजरा है।
म्यूजिक बैंड के स्कैच, टी शर्ट पेंटिंग
मूल रूप से नारकंडा निवासी पिता बीसी श्याम और मां ममता श्याम के घर 10 अगस्त 1991 को पैदा आ अंशुल श्याम परिवार का बड़ा बेटा है । उसके पिता उच्च न्यायालय में वकालत करते हैं, जबकि मां गृहणी है। अंशुल श्याम की स्कूली शिक्षा शिमला के प्रतिष्ठित शिमला पब्लिक स्कूल और सेंट एडवर्ड में हुई। स्कूल के दिनों में अंशुल को म्यूजिक सुनने का जबरदस्त शौक था। इसी के चलते वह अपने फेवरिट म्यूजिक बैंड के सिंगर के स्कैच बनाकर अपने कमरे में सजा लेता था। प्रदेश विश्वविद्यालय में बीकॉम की पढ़ाई के दौरान अंशुल ने टीशर्ट पेंटिंग में खूब हाथ आजमाए और अपने दोस्त दीक्षित दत्त के जरिये ऑर्डर पर भी टी शर्ट की पेंटिंग की।
दिल्ली से सीखी टैटू गोदने की कला
वर्ष 2011 में बीकॉम करने के बाद अंशुल पूरी तरह से पेंटिंग में डूब गया। उनके बनाए चित्रों की तारीफ होने लगी तो पिता ने भी बेटे को प्रोत्साहित किया। अंशुल ने दिल्ली जाकर कुछ महीनों के प्रशिक्षण के बाद टैटू कला में भी महारत हासिल की। शिमला लौटने के बाद स्कैच और पोट्रेट बनाने के साथ लैंडस्केप बनाने भी शुरू कर दिए। पहाड़ की संस्कृति को समझने के लिए कई यात्राएं कीं।
रेन शैल्टर संवारे, जेल में रंग भरने की कोशिश
अंशुल श्याम हिमालय को साफ सुथरा रखने के मिशन में जुटी हीलिंग हिमालय संस्था से जुड़े हुए हैं। उन्होंने संस्था के कई आर्ट प्रोजेक्ट्स में अपनी पेंटिंग का हुनर दिखाया है। शिमला के पुराने रेन शैल्टरों में चित्रकारी कर खूबसूरत बनाने वाला यह युवा इन दिनों कैथू जेल में रंग भरने की तैयारियों में जुटा है । वह इस साल अपना पहला सोलो एज्जीवीशन लगाने की परियोजना पर काम कर रहा हैं।
अंशुल श्याम एक नवोदित और उभरता कलाकार हैं, जो चित्रकारी की अलग- – अलग विधाओं में पारंगत हैं। वह पिछले कई सालों से पेंटिंग कर रहा है। टैटू गोदने में माहिर यह युवा फोटोग्राफी में भी खासी रुचि रखता है। अपनी चित्रकारी में तैलीय रंगों व पेंसिल का बखूबी इस्तेमाल करता है। अंशुल श्याम के पोट्रेट और लैंडस्केप में पहाड़ की महिलाओं के कई रूप दिखाई देते हैं। वह अपने चित्रों में पहाड़ की लोक संस्कृति को अदब के साथ उकेरता है। स्टेट म्यूजियम शिमला में संयुक्त प्रदर्शिनों में उसके चित्र प्रदर्शित हो चुके हैं।
अंशुल श्याम से आप 94594 16842, 9716758280 संपर्क कर सकते हैं।

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