मॉडलिंग की दुनिया को करना नमस्कार तो श्रीकांत ने बंजर में सेब उगा कर कर दिया चमत्कार, पहले साल ही फल देने लगे सेब के पौधे, इटली से मिली शाबाशी

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मॉडलिंग की दुनिया को करना नमस्कार तो श्रीकांत ने बंजर में सेब उगा कर कर दिया चमत्कार, पहले साल ही फल देने लगे सेब के पौधे, इटली से मिली शाबाशी
आनी से सीआर शर्मा की रिपोर्ट
मॉडलिंग एवं रैंप की दुनिया में पहचान बना चुके श्रीकांत को कुछ परिस्थितियों के चलते घर लौटना पड़ा तो उन्होंने वर्ष 2016 में सेब की सघन बागवानी की तरफ रुख करने का फैसला किया। श्रीकांत सेब बागवानी में आज एक ऐसा नाम है जो शायद किसी परिचय कामोहताज नहीँ। कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र के गांव कोपटू के निवासी इस युवा बागवान ने सेब की सघन बागवानी के क्षेत्र में ऐसा काम कर दिखाया है,जिसकी चर्चा न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि उत्तराखंड एवं जम्मू कश्मीर तक हो रही है।
आधुनिक सघन बागबानी का कोहिनूर श्रीकांत
25 वर्षीय युवक श्रीकांत को आधुनिक सघन बागबानी का कोहिनूर कहा जाए, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। श्रीकान्त ने अपने परिवार की लगभग दो बीघा बंजर भूमि में कड़ी मेहनत क उपजाऊ बनाया और उसमें सेब पौधों की आधुनिक बैरायटी के 550 पेड़ लगाए, जो मात्र एक वर्ष में ही फलदायी हो गए। प्रथम वर्ष में उनसे सेब फसल के 250 डब्बे तैयार हुए और लगभग 3 लाख की आमदन हई। जबकि दूसरे वर्ष में इस खेती से 450 पेटी डब्बे तैयार हुए हैं।
प्रदेश में नर्सरी नहीं
इन्टरनेट तथा प्रदेश के बागवानी विशेषज्ञों से जानकारी हासिल कर श्रीकांत ने सघन बागवानी के लिए सबसे पहले सेब की सही पौध का चयन किया। सघन बागवानी के लिए नर्सरी से ऐसे पौधे चाहिए, जिसमें कम से कम 5-7 टहनियां हों। ऐसे पौधों की पड़ताल में श्रीकांत ने पाया कि प्रदेश में ऐसी पौध कोई भी नर्सरी नही है, जो ऐसी पौध तैयार कर रही हो।
ऐसे हुआ कमाल
श्रीकांत में विदेशों में रहने वाले अपने से जानकारी हासिल की और जनून के बल पर फैदर प्लांट के स्थान पर देश में ही उपलब्ध व्हिप प्लांट पर ही काम करने का फैसला किया। एक तो रीप्लांटेशन साइट, दूसरा सही पौध का नही होना और तीसरा ड्राई जोन (सूखे क्षेत्र) मे बगीचा स्थापित करना, ये तीनो बातें सघन बागवानी के बिलकुल विपरीत थी। फिर भी श्रीकांत ने वर्ष 2016 में एम-9 रूटस्टॉक पर सेब की विभिन्न प्रजातियों के लगभग 550 पौधे रोपित किये।
इटली से मिली शाबाशी
6 महीनो में ही श्रीकांत में पौधों को ऐसा बना दिया,मानों कि नर्सरी के ही फैदर प्लांट्स हो। वर्ष 2016 में उनके इस बगीचे में इटली की नामी नर्सरी से आये विशेषज्ञ ने भी इस बात को माना कि श्रीकांत ने इतने कम समय और विपरीत परिस्थतियों जो किया वो सचमुच में हैरान करने वाला था। वर्ष 2017 में श्रीकांत ने इस बगीचे से पहली फसल ली और पहले वर्ष में ही लगभग तीन लाख की आय अर्जित की।
बाग़ में डबल प्रोडक्शन
वैसे सेब की सघन बागवानी में सेब का पौधा 5 सालों में पूरी फसल में आ जाता है जिसमे एक पेड़ से लगभग 1 पेटी का उत्पादन होता है, लेकिन श्रीकांत का कहना है कि वो अपने बगीचे से एक पेड़ से कम से कम 2 पेटी का उत्पादन कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने अपने पेड़ की कैनोपी को अपने क्षेत्र की परिस्थियों के अनुसार तैयार किया है।
तीस से ज्यादा बागवान किये तैयार
श्रीकांत का कहना है कि हमें सघन बागवानी की तकनीकों को अन्य देशों से सीख कर उन्हें अपने क्षेत्र के बातावरण के अनुसार मॉडिफाई करके प्रयोग करना चाहिए। श्रीकांत ने प्रदेश में लगभग तीस से ज्यादा ऐसे सघन बाग़ तैयार कर दिए हैं जो आने वाले सालों में सेब की सघन बागवानी के सबसे उम्दा बागों में से एक होंगे।श्रीकांत का कहना है कि हिमाचल में भी सेब की सघन बागवानी लाभदायक साबित हो सकती है, बशर्ते बागवानी की इस तकनीक को सही ढंग तथा सही प्रशिक्षण लेकर शुरू किया जाये।

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