मेहनत बनी कामयाबी का आधार, खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, हजारों को दिया रोजगार, प्राथमिकता है परोपकार, कोविडकाल में सोशल एक्टिविस्ट बनकर जरूरतमंदों के लिए मददगार बने मुकेश कुमार ठाकुर

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मेहनत बनी कामयाबी का आधार, खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, हजारों को दिया रोजगार, प्राथमिकता है परोपकार, कोविडकाल में सोशल एक्टिविस्ट बनकर जरूरतमंदों के लिए मददगार बने मुकेश कुमार ठाकुर
डाडासीबा से प्रीतम सिंह की रिपोर्ट
कहते हैं कि मेहनत कभी बेकमार नहीं जाती। मुकेश कुमार ठाकुर उर्फसोनू की कामयाबी का आधार भी मेहनत ही बनी। कारोबारी हुनर व प्रबंधन कौशल के दम पर मुकेश ने अपना करोड़ों का कारोबार खड़ा किया और हजारों को रोजगार दिया। कांगड़ा के जसवां प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत आते सीयूल डाकघर के डूहकी गांव के गुरबचन सिंह के बेटे मुकेश कुमार ठाकुर उर्फ सोनू ठाकुर कांगड़ा जिला के एक प्रतिष्ठित ट्रांसपोर्टर और कारोबारी हैं। वे कस्बा जागीर पंचायत के निवाचित उपप्रधान हैं। कारोबार और सियासत में सफल इस युवा की पहचान एक सोशल एक्टिविस्ट के तौर पर है। एक आम घर के इस होनहार ने अपने हुनर से क्षेत्र में खास पहचान बनाई है। दोस्तों और चाहने वालों के बीच मुकेशकुमार ठाकुर सोनू भाई के नाम से जाने जाते हैं।
फ्रंट फुट पर कोरोना वारियर
कोविड 19 के चलते लॉकडाउन लगा तो इस दौरान स्थानीय लोगों को अपने उपचार के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज जाने में असुविधा होने लगी। तब सोनू ने अपनी एक बस को बिना किराये के लोगों की सेवा में लगा दिया। कोरोना की दूसरी लहर में जारी कर्फ्यू के बीच सोनू ने जरूरतमंदों की मदद के लिए फ्रंट फुट पर खड़े हो कर राशन और दवाइयां उपलब्ध कराने की हर संभव मदद कर की और अब भी जरूरतमंदों के लिए हर मददगार बने हुए रहैं।
हजारों युवाओं को रोजगार
सोनू ने एक हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार प्रदान किया है। वह हमेशा बेरोजगारों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। जब बीते दिनों पालमपुर में सेना की भर्ती थी तो देहरा, प्रागपुर व ज्वालाजी, की तरफ से भर्ती के लिए पालमपुर आने वाले लिए युवाओं के लिए उन्होंने पालमपुर में निशुल्क ठहरने और खाने की व्यवस्था की थी। कई गरीब परिवारों की बेटियों की शादियों में हर संभव मदद करने वाले सोनू स्थानीय युवाओं को खेल से जोड़ने के लिए स्पोर्ट्स किट्स उपलब्ध करवाते आ रहे हैं।
सोनू : सन आॅफ सॉयल
कोविड़काल में क्षेत्र की 78 पंचायतों में जरूरतमंदों को राशन और दवाईयों की घर- द्वार पर व्यवस्था करने में सोनू व उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
लॉकडाउन के दौरान उपचार के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज जाने वाले क्षेत्र के निवासियों के लिए निशुल्क बस सुविधा प्रदान की। सोनू युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए लंबे अर्से से स्पोर्टस किट्स बांटते आ रहे हैं। वे जरूरतमंद युवाओं के लिए किताबें व प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हर संभव मदद करते आ रहे हैं। वे युवाओं की समस्याओं को लेकर उनसे संवाद करते रहते हैं। सोनू से सेरी गांव की तीन बेटियों को गोद लिया है। इन बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया था। तीनों की पढ़ाई और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए वे तमाम संसाधन उपलब्ध करवाएंगे। ढलियारा कॉलेज में पढ़ रही शिवानी शर्मा व उनकी छोटी बहनों के लिए भाई बन सोनू हर मदद कर रहे हैं। सोनू से भुनेड़ पंचायत के दो अनाथ बच्चों को गोद लिया है। उनके पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी जबकि मां को कोरोना ने लील लिया। सोनू ने उक्त महिला के उपचार के लिए एक लाख की मदद की थी, लेकिन उक्त महिला को बचा नहीं पाए। अब सोनू उसे बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। कोविड के दौरान सोनू रोड़ी- कोड़ी पंचायत के चपलाह गांव में दो बेटियों की शादी के लिए आर्थिक मदद और त्यामल और हंडाल गांवों में जरूरतमद स्टूडेंट्स की मदद को आगे आए। संस्कृति, आस्था से जुड़े पर्वों व उत्सवों के उनकी भूमिका अहम रहती है। लंगर लगवाने के अलावा मोक्ष धामों में सुविधाएं जुटाने में आगे रहते हैं। हाल ही में उन्होंने जम्बल पंचायत के मोक्ष धाम में बैंच लगवाने के लिए पंचायत की आर्थिक मदद कर बैठने की सुविधा प्रदान की है।

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