मुकद्दर को नहीं कोसा, खुद पर किया भरोसा , लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज रिकॉर्ड टाइम में लेह से मनाली पहुंचने का कारनामा

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मुकद्दर को नहीं कोसा, खुद पर किया भरोसा , लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज रिकॉर्ड टाइम में लेह से मनाली पहुंचने का कारनामा
मनाली से विनोद भावुक की रिपोर्ट
साहस और रोमांच के खेल बाइकिंग में उसके नाम वल्र्ड रिकॉर्ड दर्ज है। वह ‘बैक एन बियोड़’ कंपनी की मालिक है, जो देश भर में बाइक टूर का आयोजन करती है। 55 साल की सिंगल मदर मोक्षा ने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत और दिलेरी के दम पर न केवल खास मुकाम हासिल किया है, बल्कि आर्थिक आजादी की ऊंची उड़ान भी भरी है। 2007 से इंटरनेशनल डेस्टिनेशन मनाली में आकर अमेरिकी ट्रैवलर कोनी से हुई मुलाकात के बाद मोक्षा की जिंदगी का मकसद बदल गया और उसने बाइकिंग के क्षेत्र में खुद को साबित कर एक प्रेरककथा लिख दी। आज मोक्षा महिला सशक्तिकरण और बेटी बचाओं जैसे अभियानों का हिस्सा है।
बाइक पर अकेले करेगी भारत भ्रमण
अमेरिकी ट्रैवलर कोनी से रॉयल इनफील्ड पर भारत भ्रमण कर रही थीं। मनाली में जब मोक्षा की मुलाकात कोनी से हुई तो वह उससे बेहद प्रभावित हुई। इस मुलाकात के बाद मोक्षा ने खुद ट्रिप पर जाने का प्लान बनाया। मोक्षा ने अकेले ही मनाली से लेह तक रॉयल इनफील्ड से सफर किया। मोक्षा ने लेह से वापस मनाली तक का सफर रिकॉर्ड 20 घंटे और 20 मिनट में पूरा किया। मोक्षा के इस रिकॉर्ड को लिम्का बुक आूप्ऊ वल्र्ड रिकार्ड में जगह मिली। 2009 में मोक्षा ने क्चड्डष्द्मठ्ठक्चद्ग4शठ्ठस्र की स्थापना की, जो कि पूरे देश में बाइक टूर ऑर्गनाइज करती है। इस साल2 अक्टूबर को मोक्षा अपनी रॉयल इनफील्ड बाइक पर अकेले भारत भ्रमण पर निकलने वाली हैं।
छोटी उम्र में शादी, छोडऩा पड़ा ससुराल
पंजाब के होशियारपुर की मोक्षा की 1984 में छोटी उम्र में ही शादी हो गई थी। शादी के एक साल बाद ही वह एक बेटी मां बन गई। मां बनने के बाद मोक्षा के लिए जिंदगी इतनी खुशनुआं नहीं रहीं। बेटी पैदा करने पर उन्हें ससुराल वालों के ताने सुनने को मजबूर होना पड़ा। मोक्षा और उनकी मासूम बेटी को प्रताडऩा का भी शिकार होना पड़ा। मोक्षा को जब लगा कि पति भी उसका साथ देने के बजाये अपने परिवार वालों का पक्ष लेता है तो तंगआकर मोक्षा ने ससुराल छोडऩे का फैसला कर लिया। मायके जाने के बजाये वह चंडीगढ़ आ गई।
बेटी की एजूकेशन के लिए चंडीगढ़ में स्ट्रगल
चंडीगढ़ में मोक्षा ने एक परिवार के यहां ड्राइवर की नौकरी कर ली। बाद में वह होटल में भी काम करने लगीं। 80 और 90 का दशक महिलाओं के काम करने को लेकर इतना सहज नहीं था, इसलिए मोक्षा को काफी दिक्कतें आ रहीं थी। मोक्षा कहती हैं कि एक सिंगल मदर जब अकेले काम करके अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश करती है तो लोग इसे स्वीकार ही नहीं करते, लेकिन उस वक्त मेरे लिए कोई और विकल्प भी नहीं था। मोक्षा ने 1989 में अपने पति से तलाक ले लिया। 1999 के बाद वह अपनी बेटी के स्कूल में वॉर्डन के तौर पर काम करने लगीं। अब उसके जीवन का एक ही मकसद था बेटी प्राची को बहतर शिक्षा देना। प्राची की स्कूल की पढ़ाई 2004 में खत्म हो गई।
सिंगल मदर को संघर्ष से सक्सेस
बेटी की स्कूली पढ़ाई से थोड़ा मुक्त होने पर उसी साल मोक्षा काठमांडू चली गईं और वहां माउंटेनियरिंग का कोर्स पूरा किया। सिंगल मदर मोक्षा 2007 में मनाली आ गईं। उसके पिता मनाली में सेब की बागवानी करते थे, लेकिन पिता के काम में शामिल होने के बजाये मोक्षा ने खुद की एक ट्रैवल एजेंसी खोली। बंटाने की बजाय अपनी खुद की एक ट्रैवल एजेंसी खोली। यहां आकर मोक्षा ने न केवल खुद बाइकिंग में वल्र्ड रिकॉर्ड स्थापित किया बल्कि वाइकिंग टृर आर्गेनाइज करवाने के लिए सारे देश में मशहूर हो गई।

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