मिलिए मंडी युवा प्रोगांमिग इंजीनियर मुनीष मोदगिल से जो प्लाटिक कचरे को इक्_ा करने के लिए रोज ‘स्वच्छ भारत’ का थैला लेकर आते हैं ऑफिस, स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक करने के किए बनाते हैं पोस्टर, टी शर्ट भी प्रिंट करवाई, हर संडे को चलाते हैं स्वच्छता अभियान

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मिलिए मंडी युवा प्रोगांमिग इंजीनियर मुनीष मोदगिल से जो प्लाटिक कचरे को इक्_ा करने के लिए रोज ‘स्वच्छ भारत’ का थैला लेकर आते हैं ऑफिस, स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक करने के किए बनाते हैं पोस्टर, टी शर्ट भी प्रिंट करवाई, हर संडे को चलाते हैं स्वच्छता अभियान
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
आइए, आपको मिलाते हैं मंडी के युवा कम्प्यूटर प्रोगांमिग इंजीनियर मुनीष मोदगिल से जो प्लाटिक कचरे को इक्_ा करने के लिए रोज ‘स्वच्छ भारत’ का थैला लेकर ऑफिस आते हैं। स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए वे खुद पोस्टर बनाते हैं, उन्होंने स्वच्छता का संदेश देने वाली टी शर्ट भी प्रिंट करवाई है। वह हर संडे को स्वच्छता अभियान चलाते हैं। मंडी के पधर गांव के रहने वाले मनीष मोदगिल को गंदगी से सख्त नफरत है। वे जहां भी जाते हैं स्वच्छता के लिए जागरूकता संदेश देते रहते हैं। उनकी इस मुहिम का असर दिखने लगा है। अब कई स्थानीय युवक नरेंद्र कुमार, अक्षय कुमार, मोहित व कपिल उनके साथ इन मिशन में जुड़ गए हैं। एक रिटायर्ड शिक्षक निर्मल चौहान इस मिशन में उनके पक्के साथी बन गए हैं। मुनीष पधर से नारला तक स्वच्छता अभियान चलाते हैं और इक_ा हुआ कचरा पंचायत को सौंप देते हैं।
खुद बोरा उठाकर प्लाटिक बीनने जुट गए
2 अक्तूबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंग यूज प्लास्टिक पर बैन की घोषणा की। मुनीष मोदगिल को तो मानों मकसद ही मिल गया। कुद दिनों के बाद ही उन्होंने प्लाटिक कचरे को इक्_ा करने और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान शुरू कर दिया। एक सुबह मुनीष ने अपने छह साल के बेटे के हाथ में स्फाई के लिए जागरूक करने वाला पोस्टर पकड़ाया और खुद बोरा उठाकर प्लाटिक कचरे को बीनने जुट गए। हालांकि शुरूआती दौर निराशा भरा था, लेकिन मॉर्निंग वॉक के दौरान प्लास्टिक कचरे को इक_ा करने का काम नियमित जारी रखा। मनीष बस में सफर करते वक्तअथवा किसी भी टूरिस्ट स्टेशन पर भ्रमण के दौरान भी स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करते रहते हें।
डीसी ऑफिर मंडी में सेवारत
मुनीष मोदगिल के पिता चंबा में सरकारी जॉब पर थे, इसलिए उनकी प्राथमिक शिक्षा चंबा से हुई। हाई स्कूल की पढ़ाई प्रधर से और जमा दो दरंग स्कूल से की और 2005 में मंडी कॉलेज से बीसीए की पढ़ाई करने के बाद चंडीगढ़ से कम्प्यूटर नेटवकिंग का डिप्लोमा किया। दो साल तक मनीष ने पधर स्कूल में बच्चों को कम्प्यूटर का प्रशिक्षण प्रदान किया। 2010 में उन्हें एनआईसी शिमला में नेटवकिंग इंजीनियर के तौर पर नोकरी मिल गई। 2013 में वे एनआईसी मंडी आ गए। उपायुक्त कार्य मंडी में नेटवकिंग इंजीनियरिंग का काम उनके जिम्मे है।

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