मिडल स्टैंडर्ड में पढ़ते हुए शुरू कर स्टेज से बोलना, एजुकेशन लोन लेकर की जर्नलिज्म की पढ़ाई, छोटी उम्र में ऊंची उड़ान, लाइव टाइम टीवी की तेज़ तर्रार युवा पत्रकार शालिका ठाकुर की प्रेरककथा

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मिडल स्टैंडर्ड में पढ़ते हुए शुरू कर स्टेज से बोलना, एजुकेशन लोन लेकर की जर्नलिज्म की पढ़ाई, छोटी उम्र में ऊंची उड़ान, लाइव टाइम टीवी की तेज़ तर्रार युवा पत्रकार शालिका ठाकुर की प्रेरककथा
धर्मशाला से संजीव कौशल की रिपोर्ट
विषय पर मजबूत पकड़, मुहावरेदार भाषा और उच्चारण में शुद्धता जैसी विशेषताओं के चलते महज 21 साल की उम्र में स्थापित रिपोर्ट के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाली शालिका ठाकुर साहित्य में भी गहरी दखल रखती हैं. वर्तमान में शालिका ठाकुर कांगड़ा जिला के पालमपुर उपमंडल से लाइव टाइम टीवी की तेज तर्रार जर्नलिस्ट के रूप में पहचान बनाने के कामयाब रही है. साक्षात्कार में सामने मुख्यमत्री हो अथवा पूर्व मुख्यमंत्री अपने बेबाक और तीखे सवालों से सामने वाले को सोचने पर मजबूर कर देने वाली शालिका गहन अध्ययन और कड़ी मेहनत में यकीन रखती है. आप शायद की जानते हो कि एक आम घर की इस लड़की ने मिडल स्टैंडर्ड में पढ़ते हुए शुरू कर स्टेज से बोलना शुरू कर दिया था. स्कूल स्तर की जिस भी भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया, हमेशा प्रथम स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. जमा दो के बाद शालिका में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से तीन साल जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान की उसने कंटेंट राइटिंग शुरू कर दी थी, जो कैरियर के शुरुआती दौर में उसके लिए वरदान साबित हुई. इस प्रेरककथा का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि पशु चिकित्सा विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की इस बेटी ने अपनी जर्नलिज्म की पढ़ाई करने के लिए एजुकेशन लोन लिया और पढ़ाई के दौरान जॉब कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया. शालिका के लिए खुशी की बात यह है कि पत्रकार बनना उसका सपना था, जिसमे रंग भरने के उनके पिता हमेशा उसके पक्षधर रहे. यही कारण है कि शालिका के लिए रोल मॉडल उनके पिता हैं.
बेटियों की चमक में पिता का संघर्ष
हमीरपुर जिला के सुजानपुर क्षेत्र के एक छोटे से गांव झुलानी के दम्पति कृष्ण और पिंकी की तीसरी संतान के रूप में बेटी का जन्म हुआ तो परिवार से ज्यादा रिश्तेदारों भोंयें सिकोड़ी थी. पिता के पशु चिकित्सा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और माता के गृहणी होने के बावजूद इस दम्पति ने अपने बच्चों को उच्च शिक्षित करने में संसाधन उपलब्ध करवाने में कोई कसर नहीं रखी. शालिका की बड़ी बहन ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की जबकि शालिका ने जर्नालिज्म की डिग्री ली.
बड़ी बहन ने की मदद
जमा दो करने के बाद जब शालिका चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में एडमिशन ली तो परिवार को उसकी पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लेना पड़ा. उसकी बड़ी बहन चंडीगढ़ में जॉब करती थी, उसने चुटकी के खर्चे उठाने में मदद की. शालिका जानती थी कि परिवार की आर्थिक स्थिति नाजुक है, इसलिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दूसरे साल में अपनी पॉकेट मनी जुटाने के लिए न्यूज़ कंटेंट लिखना शुरू कर दिया. इससे उसके परिजनों का आर्थिक बोझ कुछ कम होने लगा.
ऐसे हुई कैरियर की शुरुआत
शालिका ठाकुर को न्यूज़ 18 पंजाब – हरियाणा से इंटरशिप करने का अवसर मिला. इस दौरान उसके काम से प्रभावित होकर प्रबंधन की ओर से उसे जॉब ऑफर मिला, लेकिन कोविड 19 के संक्रमण के चलते हुए देशव्यापी लोकडाउन के चलते उसके हाथ से फिसल गया. साल 2020 में शालिका ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में घर वापसी की और एक न्यूज़ वेब पोर्टल के साथ अपने कैरियर की शुरुआत की. वर्तमान में शालिका ठाकुर लाइव टाइम टीवी के साथ अपनी पारी को आगे बढ़ाया.

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