मिट्टी से सोना – सिंचाई के लिए नहीं पानी, पांच सौ किसानों ने एलोविरा उगाकर लिख दी नई कहानी, हमीरपुर जिला के बमसन ब्लॉक में अनूठी पहल,30 सहकारी सभाएं मिल कर रहीं औषधीय खेती

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मिट्टी से सोना – सिंचाई के लिए नहीं पानी, पांच सौ किसानों ने एलोविरा उगाकर लिख दी नई कहानी, हमीरपुर जिला के बमसन ब्लॉक में अनूठी पहल,30 सहकारी सभाएं मिल कर रहीं औषधीय खेती
बमसन से विनोद भावुक की रिपोर्ट
औषधीय पौधों की खेती के लिए सहकारिता का अनूठा मॉडल हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के बमसन ब्लॉक में देखा जा सकता है। यहां तीस सहकारी सभाएं मिल कर एलोविरा की खेती कर रही हैं। इन सभाओं के सदस्यों ने मिलकर हमीर जिला हर्बल संघ का गठन किया है, जो खेती के लिए जरूरी प्लांटिग मेटीरियल और उत्पादों को बेचने में अहम भूमिका निभा रहा है। इन सहकारी सभाओं के साथ क्षेत्र के 500 से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं। सभाओं के सदस्यों ने ऐसे क्षेत्र से औषधीय पौधों की ख्ेाती की शुरूआत की है, जहां एक तरफ सिंचाई सुविधाओं का अभाव है, वहीं दूसरी ओर बंदरों का आतंक हैं। यहां के किसानों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद एलोविरा की बंपर फसल उगाकर कमाल किया है। हमीर जिला हर्बल संघ ने हर्बल यूनिट स्थापित कर हिम हर्बल के नाम से चार हर्बल प्रॉडक्स को बाजार में स्थापित करने में अहम भूमिका अदा की है। उत्पादों की गुणवता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एचपीएमसी से हमीर जिला हर्बल संघ से उत्पाद खरीदने का करार किया है। हमीर जिला हर्बल संघ को औषधीय पौधों की खेती और हर्बल उत्पाद निर्माण में बेहतरीन कार्य के लिए प्रदेश सरकार की ओर से उत्कृष्ठ संघ का पुरस्कार प्रदान किया गया है।
ऐसे हुई औषधीय कृषिकरण की शुरूआत
वर्ष 2008 में जब हिमाचल प्रदेश में प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो हिमाचल प्रदेश को हर्बल राज्य के रूप में विकसित करने को प्राथमिकता दी गई। उसी दौरान हमीरपुर जिला के बमसन ब्लॉक में ऐसे किसानों ने औषधीय पौधों की खेती की ओर रूख किया जो सिंचाई सुविधा न होने और बंदरों के आंतक के चलते खेती से सालों पहले हाथ पीछे खींच चुके थे। वर्ष 2010 में औषधीय पौधों की खेती के लिए इस क्षेत्र में 30 सहकारी सभाओं का गठन किया गया और 507 किसानों ने औषधीय पौधों की खेती की पहल की और औषधीय पौधों की खेती करने वाली सहकारी सभाओं के सदस्यों ने हमीर जिला हर्बल सहकारी संघ गठित किया और एलोविरा पर आधारित चार हर्बल उत्पाद बाजार में उतारे और सहकारी सभाओं के जरिये उत्पादों के लिए बाजार विकसित किया।
मार्केट में चार हर्बल प्रॉडक्ट्स
जिला हर्बल संघ ने तीन लाख का कर्ज लेकर एलोविरा से हर्बल उत्पाद बनाने के लिए यूनिट स्थापित किया।
इसके लिए जहां जरूरी मशीनरी की खरीद की गई, बल्कि हर्बल उत्पाद बनाने के लिए अपने कर्मचारियों को जरूरी ट्रेनिंग करवाई। स्थानीय सांसद अनुराग ठाकुर ने इस यूनिट का शुभारंभ किया। इस यूनिट में एलोविरा के चार उत्पाद हर्बल शैम्पू, हर्बल हेंड वाश, एलोविरा जैल और एलोविरा जूस का उत्पादन किया।
एचपीएमसी से कान्ट्रेक्ट
जिला हर्बल संघ ने हिम ब्रांड से अपने उत्पाद बाजार में उतारे। संघ ने प्रदेश की सहकारी सभाओं के जरिये अपने उत्पादों के लिए राह तैयार की। ये हर्बल उत्पाद तेजी से ग्राहकों की नजर में चढ़ गए। नतीजे इतने शानदार व उत्साहवर्धक थे कि एक साल सेे भी कम समय की अवधि में जिला हर्बल सहकारी संघ ने आधे से ज्यादा बैंक कर्ज चुकता कर दिया। शुरूआती दौर में औषधीय पौधों की खेती करने वालों को भी खासा लाभ हुआ। बड़ी कामयाबी तब मिली जब जिला हर्बल सहकारी संघ के साथ हिमाचल प्रदेश के सरकारी उपक्रम एचपीएमसी ने जूस खरीदने के लिए बड़ा करार किया। बेहतर नतीजों को देखते हुए जिला हर्बल सहकारी संघ न केवल औषधीय पौधों की खेती में विस्तार की योजनाएं बनाने में जुट गया, बल्कि और कई हर्बल उत्पाद तैयार करने की दिशा में प्रयास होने लगे हैं।
पतंजली के सुझाव पर अमल
उस समय की प्रदेश सरकार हिमाचल को हर्बल राज्य के तौर पर विकसित करने जा रही थी, ऐसे में औषधीय पौधों की खेती को आगे आईं इन सहकारी सभाओं को नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड, स्टेट मेडिसिनल प्लंट्स बोर्ड, प्रदेश के सहकारिता, बागवानी और पंचायती राज विभाग का सहयोग मिला। मनरेगा के तहत औषधीय पौधों की प्लांटेशन की गई। वर्ष 2012 में एलोविरा की पहली फसल तैयार हुई तो जिला हर्बल संघ के पदाधिकारियों ने पतंजलि के पदाधिकारियों से संपर्क किया। पतंजलि की ओर से कहा गया कि कच्चे माल को उसकी फैक्टरी तक पहुंचाया जाए। पतंजलि की ओर से यह भी सुझाव दिया गया कि जिला हर्बल संघ वहीं पर यूनिट स्थापित कर एलोविरा की प्रोसेसिंग और इसके उत्पाद बनाने की शुरूआत करे। जिला हर्बल संघ ने पतंजलि के सुझाव पर अमल करते हुए हमीरपुर में खुद का हर्बल प्रॉडक्ट्स यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया।
बेरोजगारी का निकलेगा हल
हमीर जिला हर्बल संघ के अध्यक्ष रसील सिंह मनकोटिया कहते हैं कि हिमाचल प्रदेश में हर्बल खेती को बढ़ावा देकर ही बेरोजगारी को दूर किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश में विभिन्न प्रकार की जड़ी- बूटियों की खेती करने के अनुकूल जलवायु है। औषधीय पौधों की खेती के लिए गंभीर प्रयास हों तो न केवल खेती छोड़ चुके किसानों को खेतों की ओर मोड़ा जा सकता है, बल्कि बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए जा सकते हैं। उनका कहना है कि अगर कृषि आय को दोगुना करना है तो औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहन देना समय की मांग है। उन्होंने नेशनल मेडिसनल प्लांट्स बोर्ड व स्टेट मेडिसनल प्लांट्स बार्ड के अधिकारियों से भी संपर्क साधा है। वे कहते हैं कि औषधीय पौधों की खेती के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रहीं विभिन्न योजाओं के क्रियान्वयन की गति तेज होनी चाहिए।

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