मिटटी के लोग – वो लेकर आया कुल्लू में अनार, अब करोड़ों का हो रहा कारोबार

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मिटटी के लोग – वो लेकर आया कुल्लू में अनार, अब करोड़ों का हो रहा कारोबार
कुल्लू से पौमिला ठाकुर की रिपोर्ट
कुल्लू जिला के एक विकसित गांव थ्रास के 80 वर्षीय होतम पॉल का नाम प्रदेश में पहले अनार उत्पादक के रूप में जाना जाता है। होतम पॉल1969 में पिंजौर से अपने एक मित्र से कांधारी अनार का एक पौधा लेकर आये थे, जिसकी बदौलत आज कुल्लू जिला को प्रदेश का सबसे बड़ा अनार उत्पादक के रूप में जाना जाता है। होतम सेवानिवृत बीपीओ व् जाने माने समाजसेवी हैं।जिनकी हिम्मत व् उत्साह की वजह से हर लिहाज से उनका गांव हिमाचल का एक अग्रणी गांव है।अनार उत्पादन के लिए उनकी जी तोड़ मेहनत का ही नतीजा है कि आज इनके साथ साथ कुल्लू जिला के बहुत से लोगों की अनार उत्पादन में रूचि बढ़ी है और बड़े भूभाग पर अनार के बागीचे लहलहाते दिखते हैं।
कुल्लू व् मंडी जिला के साथ लगते क्षेत्र में इस बार अनार उत्पादन का एक सौ पचास करोड़ का आंकड़ा पर किया है जो कि लोगों की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करने के क्षेत्र में बड़ा कदम है।
होतम ग्यारह वर्षों तक उर्दू अध्यापन भी कर चुके हैं और इनके परीक्षा परिणाम अधिकतर शत प्रतिशत रहे हैं।
अपने गांव व् समाज के प्रति कुछ करने की प्रेरणा इन्हें समाजसेवा से जोड़े रखे हुए है और अपने गाँव के विकास में इनका योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है।होतम जी भारतीय इतिहास संकल्प योजना से भी जुड़े हैं. इन्हें अनार उत्पादन में विभिन्न फल प्रदर्शनियों में चौदह बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
1969 से 1985 तक अनार की खेती पूर्णतया मौसम व देसी खाद पर ही निर्भर रही और कई बार कीड़ा आदि लगने के कारण पूरी तरह से नष्ट भी हुए लेकिन 1985 में जब बजौरा में कृषि व् फल विभाग का अध्ययन केंद्र खुला तो होतम जी ने वहाँ जाकर कीटनाशकों के उपयोग बारे जानकारी ली और बहुत लाभान्वित भी हुए।
होतम जी के अनार उत्पादन के कई वर्षों के बाद यहां के बाकी लोगों की भी इसमें रूचि उतपन्न हुयी और इनकी देखरेख में बहुत से परिवारों ने अनार उत्पादन को अपने मुख्य रोज़गार के रूप में अपनाया और अपनी आर्थिकी सुदृढ़ की।

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