‘मामू’ की मिसाल – जरूरतमंद स्टूडेंट्स का रखा हमेशा ख्याल, स्कूल कैंपस के विकास में किया कमाल, सेवानिवृत प्रिंसीपल देवेंद्र सिंह की प्रेरककथा

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‘मामू’ की मिसाल – जरूरतमंद स्टूडेंट्स का रखा हमेशा ख्याल, स्कूल कैंपस के विकास में किया कमाल, सेवानिवृत प्रिंसीपल देवेंद्र सिंह की प्रेरककथा
जैसा कि संजीवन धीमान ने फोकस हिमाचल को बताया
शिक्षक बच्चों का मार्गदर्शक होता है, प्रेरक होता है। शिक्षक अपने परिश्रम और तप से विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करता है। शिक्षक अपने विवेक से बच्चों के जीवन में ऐसी ज्योति जलाता है, जिससे परिवार, समाज और देश प्रकाशमय हो। इस प्रेरककथा के नायक देवेंद्र सिंह एक ऐसे ही शिक्षक हैं, जिन्होंने अपने समर्पण से शिक्षा जगत में अनूठी मिसाल पेश की है। ‘मामू के नाम से मशहूर ‘देवेंद्र सिंह’ 34 साल विभिन्न स्कूलों में सेवाएं प्रदान कर पिछले ही कल ही मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल नगरोटा बगवां के प्रिसिंपल के पद सेवानिवृत हुए हैं।
कई युवाओं के आइकन हैं ‘मामू’
अपने छात्र जीवन में डीएवी कॉलेज कांगड़ा की शान रहे देवेंद्र सिंह अंग्रेजी व हिंदी भषाओं में बराबर दखल रखते हैं। ‘मामू’ उन बिरले शिक्षकों में शामिल हैं, जो अपनी विशेष कार्यशैली के चलते स्टूडेंट्स, स्टाफ, अभिभावकों व स्थानीय लोगों के आइकन बन जाते हैं। शायद कम ही लोगों को जानकारी होगी कि कई जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी करने के लिए ‘मामू’ हर माह अपनी जेब से आर्थिक मदद करते रहे हैं। एक टीम लीडर के तौर पर उन्होंने हमेशा अपने अधिनस्थों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका अदा की है।
स्कूल नहीं शिक्षा का मंदिर
देवेंद्र सिंह ने पिं्रसीपल रहते 129 साल पुराने नगरोटा बगवां के स्कूल को शिक्षा के मंदिर में बदलने में न केवल अतिरिक्तसमय दिया, बल्कि परिसर के विकास के लिए आर्थिक संसाधन भी खुद ही जुटाए। उन्होंने स्कूल प्रबंधन समिति, स्कूल स्टाफ, अभिभावकों व शहर के लोगों को साथ लेकर महज एक साल में इस स्कूल परिसर का नक्शा बदल डाला।
स्कूल परिसर को समलत कर परिसर में कई पुष्पवाटिकाएं स्थापित की गई हैं। विभिन्न पुष्प वाटिकाओं के रखरखाव के लिए स्टूडेंट्स के ग्रुप बनाए गए। यहां नूरपुर हादसे में मारे गए स्कूली बच्चों की याद में भी एक वाटिका बनाई है। विभिन्न तरह के फूलों वाली वाटिकाओं में साठ से भी ज्यादा किस्मों के गुलाब उगाए गए हैं।
आधारभूत ढांचे का विकास
नगरोटा के कायस्थवाड़ी निवासी देवेंद्र सिंह ने अपनी आरंभिक शिक्षा चैल मिलिट्री स्कूल से हासिल की है। मिलिट्री स्कूल का अनुशासन ही हमेशा उन्हें बेहतरीन स्कूल प्रबंधन के प्रेरित करता रहा। उनके प्रयासों से ही स्कूल के आधारभूत ढांचे को विकसित किया गया। कई इमारतों की पुरानी छतों को बदलने से लेकर इमारतों को आकर्षक रंगों से रोशन करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर हुआ।
मेडीटेशन पार्क, वांकिंग प्लाजा सहित कई योजनाएं हकीकत की जमीन पर उतारी गईं। दावे के साथ कहा जा सकता है कि प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल का परिसर सीनियर सेकेंडरी स्कूल नगरोटा बगवां के परिसर से खूबसूरत नहीं हो सकता है। प्रदेश के शिक्षा विभाग ने इस स्कूल को मॉडल स्कूल का दर्जे के लिए चुना है। स्थानीय विधायक अरुण कुमार कूका ने स्कूल के आधारभूत ढांचे के विकास के उदार आर्थिक मदद की है.
प्रिंसीपल का प्रबंधन कौशल
कोरोनाकाल से कुछ समय पहले चार दिन में एसओएस की परीक्षा के लिए दो हजार स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा केंद्र की शानदार व्यवस्था करवाकर ‘मामू’ ने अपने चुस्त प्रबंधन कौशल का परिचय करवाया था। उनके प्रयासों से ही कोविड 19 के दौरान शहरवासियों के सहयोग से नगरोटा सीनियर सेकेंडरी स्कूल के स्टाफ ने स्कूल परिसर में दो माह तक सांझा चूल्हा संचालित कर क्रंटाइन सेंटरों और राहत शिविरों में रह रहे लोगों को तीन समय का खाना पका कर उपलब्ध करवाया।
नई पारी के लिए पृष्ठभूमि तैयार करे सामाज
बेशक देवेंद्र सिंह सरकारी शिक्षा सेवा से सेवानिवृत हो गए हैं, लेकिन स्टूडेंट्स व स्कूल के लिए उनका समपर्ण कतई कम नहीं हुआ है। ऐसे होनहार शिक्षक देश व समाज के लिए कई चमकदार हीरों को तराश सकते हैं। यह स्थानीय समाज की जिम्मेदारी है कि ऐसे शिक्षक की निरंतर सेवाओं के लिए पृष्ठभूमि तैयार करे और उनके ज्ञान व अनुभव का लाभ स्थानीय युवाओं को मिले। यह गर्व की बात है कि यह अदभुत सख्शियत नगरोटा बगवां की विरासत है।

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