‘मरने के बाद मेरी लाश को नाटक में इस्तमाल कर लिया जाए’, भारत रत्न के अधिकारी, उनके हिस्से दुश्वारी, सबसे पहले हिमाचल में फिल्म सिटी बनाने का सपना देखने वाले अमर स्नेह मंडी के गोहर में गुमनामी की जिन्दगी जीने को मजबूर

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‘मरने के बाद मेरी लाश को नाटक में इस्तमाल कर लिया जाए’, भारत रत्न के अधिकारी, उनके हिस्से दुश्वारी, सबसे पहले हिमाचल में फिल्म सिटी बनाने का सपना देखने वाले अमर स्नेह मंडी के गोहर में गुमनामी की जिन्दगी जीने को मजबूर
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
अमर स्नेह को अधिकतर सिनेमा प्रेमी उनके द्वारा निर्देशित अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘द सोमाली दरविश’ से जानते हैं। अफ्रीका में बनी यह एक विशेष फिल्म है, जिसमें 16 देशों के लोगों ने काम किया था। यह फिल्म सोमालिया में हुई क्रांति पर बनी दुनिया की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। अमर स्नेह देश के बड़े साहित्यकार, अभिनेता, फिल्म, टीवी, रंगमंच और रेडियो कलाकार हैं और पिछले 50 वर्षों से कार्य कर रहे हैं। अब तक अमर स्नेह की तीन किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं और 600 से ज्यादा व्यंग्य और कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं। अभिनेता, निर्देशक, लेखक एवं शिक्षक के तौर पर उनकी पहचान है। दो दशक पहले अमर स्नेह ने सबसे पहले हिमाचल प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने का सपना देखा था। इसी सपने में रंग भरने के लिए उन्होंने हिमाचल को अपना दूसरा घर बना लिया और मंडी के गोहर में रहने लगे। बीच- बीच में काम करने मुंबई का रुख करते रहे, लेकिन उनका असली मकसद फ़िल्मी दुनिया को हिमाचल प्रदेश की तरफ आकर्षित करना ही रहा। उनकी सिफारिश पर कई फिल्म यूनिट्स आउटडोर शूटिंग के लिए हिमाचल प्रदेश पहुँचीं और खुद अमर स्नेह मीडिया, नौकरशाही और नेताओं से इस उम्मीद में मिलते रहे कि हिमाचल प्रदेश में फिल्म सिटी का सपना मूर्त हो। फिल्म निर्माण, रंगमंच, टेलीविजन और रेडियो के सितारों की समझ रखने वाले जानते हैं कि अमर स्नेह ने इन विधाओं में ऐसा बिरला काम किया है, जिसके चलते वे ‘भारत रत्न’ के अधिकारी हैं।
‘द सोमाली दरविश’ के लिए उन्हें एप्रिसिएशन लेटर
रिपब्लिक ऑफ़ सोमालिया के दिल्ली स्थित दूतावास ने अमर स्नेह निर्देशित नेशनल फिल्म ‘द सोमाली दरविश’ के लिए उन्हें एप्रिसिएशन लेटर दिया गया है। सोमालिया में अपने हुनर की चमक बिखेरने वाले अमर स्नेह बुढ़ापे की सांझ में मंडी के गोहर में गुमनाम जिन्दगी जीने को मजबूर हैं और उनका बहुत सा सृजन प्रकाशन से पहले ही स्वाह हो चुका है। व्यवस्था को आइना दिखाने वाला अपने दौर का एक चमकता सितारा महज एक राशन कार्ड के लिए धक्के खा रहा हो तो व्यवस्था की पोल खुद खुल जाती है। आइये उनके जीवन के शानदार काम के लिए भारत सरकार से उन्हें ‘भारत रत्न’ की मांग करते हैं।
अपने दौर के दूरदर्शन के सबसे चर्चित कलाकार
अमर स्नेह की कला यात्रा सन 1957 में नटराज कुंज से एक पेशेवर अभिनेता के रूप में शुरू हुई। उसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के नाटक विभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के गीत एवं नाट्य प्रभाग में शामिल हुए। पदमश्री हबीब तनवीर के नया थिएटर, अंशुमाली थिएटर्स तथा देश की अनेक व्यवसायिक और अर्ध व्यवसायिक संस्थाओं के साथ सक्रिय रहकर रंगमंच पर ही अब तक आप 1300 से अधिक अभिनय प्रदर्शन कर चुके हैं। अमर स्नेह दूरदर्शन के सबसे अधिक चर्चित और सफल अभिनेता माने जाते हैं।
प्रयोगधर्मी थिएट्रिकल कंपनी ‘थिएटर लैब’
अमर स्नेह ने सन 1973 में देश की प्रथम प्रयोगधर्मी थिएट्रिकल कंपनी ‘थिएटर लैब’ मुम्बई में स्थापित की और लगभग 12 वर्षों तक इसके सक्रिय निदेशक रहे। मुंबई और दिल्ली दूरदर्शन में सक्रिय रहकर अनेक नाटकों, धारावाहिकों का लेखन एवं निर्देशन किया। 90 के दशक में वे भारत के प्रथम अंतर्राष्ट्रीय टेलीविजन एशिया टीवी नेटवर्क (एटीएन) के निदेशक रहे। अमर स्नेर अपने 55 वर्ष की कार्य अवधि में रंगमंच, टेलीविजन, रेडियो, फिल्म और प्रिंट मीडिया से अभिनेता, निर्देशक और लेखक के रूप में जुड़े रहे। वे नाटक, व्यंग्य और लघुकथा लेखन में सिद्धहस्त चित्रात्मक अभिव्यक्ति के लिए जाने जाते हैं। वे देश में ही नहीं, विदेशों में भी फिल्म निर्देशक के रूप में स्थापित हैं।
पर्दे पर हजारों पात्रों को जीने वाला बिरला कलाकार
अमर स्नेह एक विलक्षण बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं, जिन्होंने एक कुशल अभिनेता, नाटककार, निर्देशक और लघु कथाकार के रूप में थिएटर, टीवी, फिल्म में अपनी पहचान बनाई है। टाइपड हुए बिना विस्तृत श्रृंखला के पात्रों के 1300 से अधिक अभिनय प्रदर्शन किए हैं, जो कड़ी मेहनत और नाटकीयता के अध्ययन के माध्यम से मानव प्रकृति और शिल्प निर्माण के गहन अध्ययन करने की क्षमता को चित्रित करते हैं। उन्हें रंगमंच और टीवी अभिनेता के रूप में अपार लोकप्रियता मिली और जनता और आलोचकों ने हमेशा उनकी प्रशंसा की। उन्होंने 36 पूर्ण लंबाई के और लघु नाटक लिखे, उनका मंचन किया, नियमित और प्रयोगात्मक रंगमंच के रूप में उन्होंने मान्यता प्राप्त की।
सोमालिया तक दिखाया निर्देशन का करिश्मा
भारत सरकार ने कई बार उनके रचनात्मक कार्यों को खरीदा। वह लगभग तीन सौ कहानियों और व्यंग्य रचनाओं के बेहतरीन लघु कथाकारों में से एक हैं। उनके उल्लेखनीय अभिनय और लेखन कार्यों का उद्देश्य मानव स्वभाव को समझना, मानवीय मूल्यों, मानवीय संवेदनशीलता की रक्षा करना, एक बेहतर दुनिया बनाना और मानव जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए गहरी समझ पैदा करना है। वह पहले भारतीय हैं जिन्हें एक दूसरे देश ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म परियोजना को निर्देशित करने के लिए चुना। उन्होंने “द सोमाली दर्विश” का निर्देशन किया, जो पूर्वी अफ्रीका के संघीय गणराज्य सोमालिया के राष्ट्रीय नायक की एक बायोपिक फिल्म है, जिसमें 16 देशों के कलाकारों ने अभिनय किया था।
हर रूपरंग में महारत हासिल
अमर स्नेह ने अपनी असाधारण दुर्लभ प्रतिभा के जरिए अंग्रेजी के प्रसिद्ध मुहावरे ‘जैक ऑफ ऑल मास्टर्स ऑफ नन’ को तोड़कर एक नया मुहावरा ‘जैक ऑफ ऑल मास्टर ऑफ ऑल’ का निर्माण किया। संभवतः वे भारत के पहले ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने ललित कला, कला प्रदर्शन, रंगमंच, अभिनय, नृत्य और जनसंचार के सभी प्रकार के रूपरंग और भावों में कार्य किया। नृत्य, अभिनय, नाटक, गद्य-पद्य, कथा, पटकथा लेखन, निर्देशन किया और लोगों को सिखाया, शिक्षित – प्रशिक्षित किया, उनको काम दिया और मास मीडिया, सूचना, प्रेस, जनसम्पर्क, और मनोरंजन के हर रूपरंग में महारत हासिल की। वह इतने समर्पित कलाकार, बड़े अभिनेता हैं कि उन्होंने अपनी ‘वसीयत’ कुछ यूं लिखी है, ‘मरने के बाद मेरी लाश को नाटक में इस्तमाल कर लिया जाए’।
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अमर स्नेह, मंडी जिला के गोहर में रहते हैं। वे ललित कला, कला प्रदर्शन, रंगमंच, अभिनय, नृत्य और जनसंचार के सभी प्रकार के रूपरंगों और भावों के शब्दकोष हैं। मोबाइल नम्बर 82610 88038 पर उनसे संपर्क किया जा सकता है।

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