मखमली आवाज से लोकगीतों का बेताज बादशाह बना हिमाचल पुलिस का यह हैड कांस्टेबल, कोटला की रजौल पंचायत के प्रेम शर्मा की पहाड़ी संगीत में धूम

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मखमली आवाज से लोकगीतों का बेताज बादशाह बना हिमाचल पुलिस का यह हैड कांस्टेबल, कोटला की रजौल पंचायत के प्रेम शर्मा की पहाड़ी संगीत में धूम
शाहपुर से डिम्पल जसवाल की रिपोर्ट
अमूमन यह मान लिया जाता है कि हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवान लोक संगीत और लोक संस्कृति के संरक्षण को लेकर कोई ज्यादा गंभीर नहीं होते, लेकिन इस अवधारणा को सेकेण्ड आईआरबी बटालियन सकोह, धर्मशाला में तैनात हिमाचल प्रदेश पुलिस के हैड कांस्टेबल प्रेम शर्मा ने गलत साबित कर दिया है। कांगड़ा जिला के कोटला क्षेत्र की रजौल पंचायत के रहने वाले प्रेम शर्मा न केवल कांगड़ा के लोकसंगीत के संरक्षण में जुटे हैं, बल्कि उनकी विशेषता यह है कि वह अन्य जिलों के लोक संगीत को भी अपनी मखमली आवाज के जरिये लोकसंगीत के चाहने वालों तक पहुंचा रहे हैं।
सात जिलों से दे चुके सेवायें, सभी जिलों के संगीत पर पकड़
प्रेम शर्मा हिमाचल प्रदेश के सात जिलों में सेवाएं दे चुके हैं। अपने अब तक के कार्यकाल में प्रेम शर्मा को किन्नौर, लाहुल स्पिति, मंडी, चंबा, शिमला, सिरमौर, कांगड़ा में कार्य करने का अवसर मिला है। प्रेम शर्मा ने जिस भी जिला में सेवायें प्रदान की, वहां की स्थानीय बोली को सीखने के साथ वहां के लोक संगीत को समझने की पुरजोर कोशिश की। यही कारण है कि प्रेम शर्मा को प्रदेश के विभिन्न जनपदों के गीतों को गाने की महारत हासिल है। वे विभिन्न बोलियों में खुद गीत लिखने और कम्पोज करने में भी माहिर हैं और अपने अपने लिखे और कम्पोज किये गीतों को खुद गाकर म्यूजिक अल्बम के जरिये श्रोताओं को परोस रहे हैं।
धर्मशाला कॉलेज में पढाई के दौरान मिली दिशा
कोटला और हारचक्कियां से स्कूली पढ़ाई करने के बाद प्रेम शर्मा ने धर्मशाला कॉलेज से नॉन मेडिकल स्ट्रीम में स्नातक किया है। हालांकि लोकगीतों के प्रति वे बचपन से ही प्रभावित थे, लेकिन कॉलेज पहुँचने पर उनकी कला को नई उड़ान मिली। कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी ने उनके गायन के शौक को नई दिशा प्रदान की। साल 2003 में प्रेम शर्मा ने कामेडी शोर्ट फिल्म ‘दो साढू’ का न केवल लेखन किया, बल्कि दमदार अभिनय भी किया। यह शोर्ट फिल्म सुपर हिट रही, जिसने उनकी आगे की राह आसान कर दी और उनका रुझान लोक संगीत के संरक्षण की तरफ हो गया। साल 2005 में वह हिमाचल प्रदेश पुलिस में भर्ती होकर थर्ड आईआरबी बटालियन पंडोह में पोस्ट हुए, लेकिन पुलिस की नौकरी के दौरान उन्होंने न केवल अपने शौक को ज़िंदा रखा, बल्कि हिमाचल के लोक संगीत को बारीकी से समझने में सफल रहे।
कई हिट अलबम हैं प्रेम के नाम
प्रेम शर्मा के केलंग बजीर को समर्पित भजन अलबम ‘कुगती जो जाणा जरूर’, ‘सोने रूपे चिड़िये’, ‘ची देशे लगियां लड़ाइयां’ और मुरली रिलीज हो चुके हैं, जिन्हें लोक संगीत के चाहने वालों ने जमकर सराहा है। प्रेम शर्मा प्रदेश के विभिन्न जनपदों के पारम्परिक गीतों को श्रोताओं के सामने लाने में जुटे हैं, वहीं अपने लिखे और कम्पोज किये पहाडी गीतों को भी पेश करने की तैयारियों में जुटे हैं। प्रेम शर्मा प्रदेश के अन्य गायकों के साथ भी जुगलबंदी करने जा रहे है। उनका कहना है कि लोक संगीत उनकी रूह को सकून देता है, इसलिए वह लोक संगीत के संरक्षण में जुटे हैं।

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