बूढाकेदार के कुंए में मौजूद हैं नंदी की पूंछ के चिन्ह, जल से गोमय की गंध, इस तीर्थ में स्नान करने से के बाद ही पूर्ण होती है चार धाम तीर्थ यात्रा, गंगा दशहरा पर पवित्र स्नान

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बूढाकेदार के कुंए में मौजूद हैं नंदी की पूंछ के चिन्ह, जल से गोमय की गंध, इस तीर्थ में स्नान करने से के बाद ही पूर्ण होती है चार धाम तीर्थ यात्रा, गंगा दशहरा पर पवित्र स्नान
जंजैहली से हिमाराम शास्त्री की रिपोर्ट
जो भी हिन्दू चार धाम तीर्थ यात्रा करते हैं उनके लिए अंत मे बूढाकेदार तीर्थ की यात्रा करना जरूरी है अन्यथा उनकी यात्रा अपूर्ण मानी जाती है। बूढाकेदार तीर्थ में नंदी की पूंछ के चिन्ह आज भी लगभग 18फुट गहरे कुॅए मे मौजूद हैं. कुंए के तल में संचित जल से गोमय की गंध आती है। गाय का दान पुण्य में सबसे महत्वपूर्ण अंग पूॅछ मानी जाती है और यह बूढाकेदार तीर्थ में विद्यमान है इससे तीर्थ की श्रेष्ठता काफी बढ जाती है।
शिकारी माता के आंचल में बूढाकेदार
माता शिकारी योगिनी पीठ के आंचल में स्थित बूढाकेदार में भगवान शिव अपनी तपोभूमि पर शिव लिंग रूप में गुफा में विराजमान है । इस पर्वत पर शिव और शक्ति का अद्भुत संगम होने से यह जाग्रत स्थान है। यहां शिव और काली के उपासक साधना करके अपने ईष्ट की सिद्धि सरलता से प्राप्त कर लेते हैं। यह भी कहा जाता है कि यदि बुढाकेदार तीर्थ में पहले स्नान किया जाये तो उसके बाद माता शिकारी के दर्शन किये जायें तो माता उन पर काफी खुश हो जाती है।
गंगा दशहरा पर बूढाकेदार में पवित्र स्नान
बूढाकेदार के पवित्र जल प्रपात में गंगा दशहरा के दिन स्नान करने के लिये हजारों तीर्थ यात्री पहुंचे. हिमाचल प्रदेश के अलावा, पंजाब ,हरियाणा उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल के तीर्थयात्री यहां स्नान के लिए हर साल आते हैं. बर्फीला क्षेत्र होने के कारण नबंम्वर से अप्रैल तक यात्री यहाॅ नहीं पहुंच पाते, वाकी शेष महीने यहां पर लोगों का तांता वर्ष भर लगा रहता है।
दिल्ली से स्नान के लिए आई संगत
बुढाकेदार में देवी देवता भी स्नान करने के लिए आते हैं। इस बार शनितीर्थ जगत चौक दिल्ली के मंहत संदीप महाराज व शनिधाम धर्म सेवा समिति के समस्त पदाधिकरी यहाँ स्नान करने के लिए आये हैं. जंजैहली के निकट तोलूथाछ तीर्थाखड संगम स्थान पर शनिधाम अनुसंधान तत्वावधान की स्थापना करने के लिए भूमि पूजन किया ।
हत्या के दोष की निवृति के लिए यहाँ आये पांडव
कहते हैं कि महाभारत के युद्ध में पांडवों के हाथो से उनके अनेक निकट संबंधियों मे कटुम्वी, भ्राता , ताया,गुरू और मामा की मृत्यु होने से उनको हत्या का दोष लगा। हत्या के दोष की निवृति के लिए कृष्ण ने युधिष्ठिर को शिव के नंदी की विधिवत पूजा करने को कहा. इस उद्देश्य से पांडव बूढाकेदार पहुंचे. जैसे ही शिव ने पांडवों को देखा वे वहां से लुप्त हो गये और नंदी भी अपना सुक्ष्म रूप धारण कर भूमिगत हो गया. नंदी की उपस्थिति के यहां चिन्ह मौजूद हैं

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