बीस साल पहले 32 मील- रानीताल रूट पर एक बस के साथ शुरू हुआ था सफर, अब बलौरिया ट्रांसपोर्ट के बेड़े में छह बसें, कांगड़ा में अशोका लेलैंड के दो सेल्स एंड सर्विस शोरूम, चंबा में सर्विस सेंटर, शिक्षक दम्पति के बेटे की कारोबार में कामयाब होने की प्रेरककथा

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बीस साल पहले 32 मील- रानीताल रूट पर एक बस के साथ शुरू हुआ था सफर, अब बलौरिया ट्रांसपोर्ट के बेड़े में छह बसें, कांगड़ा में अशोका लेलैंड के दो सेल्स एंड सर्विस शोरूम, चंबा में सर्विस सेंटर, शिक्षक दम्पति के बेटे की कारोबार में कामयाब होने की प्रेरककथा
धर्मशाला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
शाहपुर तहसील के रैत गांव के शिक्षक दम्पति स्वर्गीय दर्शन सिंह बलौरिया और श्रीमती संतोष गुलेरिया चाहते थे कि बेटा अनुज भी शिक्षक बन कर अध्यापन के क्षेत्र में अपना कैरियर बनांये, इसी सोच के चलते उन्होंने बेटे को स्नातक करने के साथ जेबीटी का कोर्स भी करवाया। दूसरी ओर बेटा अंशु (अनुज बलौरिया) नौकारी के बजाये कारोबार में अपनी किस्मत आजमाना चाह रहा था। परिजनों ने बेटे की खुशी में अपना सकूं देखते हुए 21 साल की उम्र में कारोबार की बुनियाद रखने में आर्थिक मदद की। 2001 में एक बस के साथ बलौरिया ट्रांसपोर्ट की शुरुआत हुई और रूट मिला 32 मील- रानीताल। अंशु अब 41 साल के हैं और बलौरिया ट्रांसपोर्ट के बेड़े में 6 बसें हैं, जबकि अंशु पठानकोट- मनाली नेशनल हाईवे पर रैत और नालटी में अशोका लेलैंड के दो सेल्स एंड सर्विस शोरूम, चंबा में सर्विस सेंटर के पार्टनर हैं। कारोबारी कौशल और मेहनत से बीस साल में अंशु ने साबित कर दिया है कि युवावस्था में लिया उनका निर्णय सही था। नौकरी की जगह कारोबार चुनने वाले अनुज बलौरिया आज सफल कारोबारी हैं और 35 युवाओं को रोजगार प्रदान कर रहे हैं।
इसलिए बने ट्रांसपोर्टर
अनुज बलौरिया कहते हैं कि ट्रांसपोर्टर बनने के स्टार्टअप के आइडिया के पीछे वजह यह थी कि इस कारोबार में नकद का कारोबार था। बीस साल पहले ठेठ चंगर क्षेत्र में 32 मील- रानीताल रूट पर बस चलाने का काम कम जोखिम भरा नहीं था। शुरू में कई तरह की दिक्कतें आईं, लेकिन उनके समाधान भी निकलते गए और अनुभव होता गया। अनुज बलौरिया कहते हैं कि हैं कि उनके बैंक ने हमेशा उन पर भरोसा किया और मुश्किल वक्त में वित्त प्रबंधन में मदद की जिससे उनके कारोबार का दायरा बढ़ता गया। बैंक उधार चुकाने की बात हो अथवा करों के भुगतान की, अनुज बलौरिया ने कभी कोई डिफाल्ट नहीं किया। इस वजह से उनके कारोबारी रिश्तों में साख बनी।
जय अम्बे ऑटोमोबाइल की शुरुआत
ट्रांसपोर्टर के कारोबार को स्थापित करने के बाद अनुज बलौरिया कमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स और सर्विस के कारोबार में उतरे। उन्होंने पार्टनरशिप में रैत और नालटी में अशोका लेलैंड के दो शोरूम स्थापित किये, जबकि चंबा में सर्विस सेंटर शुरू किया। इस तरह से जय अम्बे ऑटोमोबाइल की शुरुआत हुई जो व्यवसायिक वाहनों की बिक्री और सर्विस के लिए भरोसे का ब्रांड है। जय अम्बे ऑटोमोबाइल के नाम सेल्स के कई रिकार्ड्स हैं। अनुज बलौरिया कहते हैं कि कुशल प्रबंधन और मेहनती स्टाफ उनकी कामयाबी का राज है। अपने स्टाफ और ग्राहक दोनों का भरोसा जीत कर यह कारोबार स्थापित किया है।
परिवार पहली प्राथमिकता
अनुज बलौरिया के पिता श्री दर्शन सिंह बलौरिया बेटे की कारोबारी कामयाबी देखने के लिए अब इस दुनिया में नहीं हैं। अनुज की माता श्रीमती संतोष बलौरिया को संतोष है कि उनके बेटे ने लीक से हट कर कुछ करने की ठानी और उसे कर दिखाया। अनुज की पत्नी श्रीमती भावना बलौरिया हाउसवाइफ हैं। दो बेटियां अवंतिका राजपूत और रिधिका राजपूत स्कूल स्तर पर पढ़ाई कर रही हैं। अनुज बलौरिया ऐसे कारोबारी हैं जो सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहते हैं। वे कहते हैं कि मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। परिवार अनुज की पहली प्राथमिकता है।

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