बीस ‘पाथों’ में आते थे धान के एक लाख दाने, एक ‘खार’ होती थी 6 क्विंटल के बराबर, यह था हमारे बुजुर्गों का विश्वनीय पैमाना

Spread the love

बीस ‘पाथों’ में आते थे धान के एक लाख दाने, एक ‘खार’ होती थी 6 क्विंटल के बराबर, यह था हमारे बुजुर्गों का विश्वनीय पैमाना
सुंदरनगर से पवन चौहान की रिपोर्ट
एक वह समय भी था जब मापन की विधियां अनुमान के आधार पर कार्य करती थीं और उस विषेश वर्ग या समाज की लेन-देन की प्रकिया में अपनी अहम भूमिका निभाती थी। उस समय की मापन की कई विधियों में से एक थी ‘पाथा विधि’। पाथा अनाज, मुख्यत धान को तोलने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यह लोहे का बना बेलनाकार रुप में होता था। पाथे दो प्रकार के होते थे। एक बड़ा और एक छोटा। बड़े पाथे में लगभग डेढ़ किलोग्राम जबकि छोटे पाथे में लगभग सवा किलो अनाज आता था। अनाज लेने- देने का पैमाना पाथा ही होता था।
बीस पाथों में एक लाख धान के एक लाख दाने
धान के भरे बीस पाथों में एक लाख धान के दाने आते थे ऐसा माना जाता था। बीस लाख दानों की एक ‘खार’ होती थी। एक खार लगभग 6 क्विंटल के बराबर होती थी। पहले जिसके पास एक खार धान हो जाता था तो समझा जाता था कि उसके पास पर्याप्त मात्रा में अनाज हो गया है। अनाज को उधार देने का भी एक तरीका था। यदि 20 पाथे उधार दिए जाते तो अनाज चुकाने के समय उसके साथ 5 पाथे ब्याज स्वरुप वसूले जाते थे। परंतु यह भी जरुरी नहीं था कि ब्याज स्वरुप 5 ही पाथे लिए जाएं। कई इससे ज्यादा संख्या में भी पाथे वसूलते थे।
पाथे के ऊपर सुन्दर डिजाइन
दोनों पाथों का व्यास लगभग बराबर (6 या 7 ईंच ) और ऊंचाई अढ़ाई से चार ईंच होती थी। पाथे का निर्माण वही लोहार करता था जो पाथे के बिषय में पूर्ण ज्ञान रखता हो तथा इसकी हर बारीकी को जानता हो। पाथा बेलनाकार होता था और इसके दोनों तरफ लोहे के गोल कड़े लगे होते थे, जो इसे पकडऩे या टांगने में काम आते थे। इसके अतिरिक्तपाथे पर अपनी सामथ्र्य के अनुसार सुन्दर डिजाइन भी बनाए गए होते थे। पाथा उस समय का वह विश्वसनीय पैमाना था जिसके द्वारा लोगों में अनाज का लेन-देन होता था। लोहे के पाथों से पहले बांस से बने पाथे होते थे, जो लगभग लोहे के पाथे के आकार-प्रकार के होते थे।
दूसरा जरिया : सेर या मण
अनाज को तोलने का एक अन्य जरिया भी विद्यमान था, जिसे हम सेर या मण के रुप में जानते हैं। एक सेर कच्चा 400 ग्राम, एक सेर पक्का एक किलोग्राम, एक मण कच्चा 16 किलाग्राम तथा एक मण पक्का 40 किलोग्राम के बराबर होता था। अढ़ाई मण पक्का एक क्विंंटल के बराबर होता था। सेर और पाथे का आपस में गहरा संबंध था। छोटा पाथा तीन सेर और बड़ा पाथा चार सेर का होता था। पांच सेर वाले बर्तन को ‘बट्टी’ कहा जाता था। बुजुर्गों के अनुसार छोटा पाथा दूसरे व्यक्तिको अनाज देने और बड़ा पाथा अनाज लेने में इस्तेमाल किया जाता था।
अन्य विधि : तराजु और बट्टे
सेर मापन की एक अन्य विधि थी जो हर प्रकार की वस्तु को तोलने के लिए प्रयोग की जा सकती थी। इस विधि में तराजु और बट्टे का सामूहिक कार्य होता था। बट्टों का माप उन बट्टों के बिल्कुल बराबर होता जिन्हे राजा या जमींदार किसानों से लगान वसूलते समय प्रयोग में लाता था।
पाथे का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद
आज हमारे पास मापन का हरेक साधन मौजूद है। इस कारण पाथे का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद हो चुका है, क्योंकि इस विधि से समय की खपत ज्यादा होती थी। लेकिन जब हमारे पास मापन के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं था तो उस वक्तपाथा ही था जो हमारी अनाज के लेन-देन की प्रक्रिया को सरल और विष्वसनीय बनाता था। यह उस दौर का हमारा सच्चा साथी था।
————————————————-
~ पवन चौहान, गांव व डा. महादेव ,तहसील सुंदरनगर, जिला मंडी (हि.प्र.) मोबाइल : 098054 02242, 094185 82242

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *