बिलासपुर के ब्लड बैंक हैं इंटरनेशनल मास्टर चैंपियन सुशील पुंडीर, वरिष्ठ साहित्यकार एवं लोक कलाकार के रूप में भी बनाई खास पहचान

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बिलासपुर के ब्लड बैंक हैं इंटरनेशनल मास्टर चैंपियन सुशील पुंडीर, वरिष्ठ साहित्यकार एवं लोक कलाकार के रूप में भी बनाई खास पहचान

बिलासपुर से रत्न चंद निर्झर की रिपोर्ट

 

मास्टर एथलेटिक्स के इंटरनेशनल चैंपियन का खिताब हासिल करने वाले सुशील पुंडीर रेगुलर ब्लड डोनर हैं और उन्हें बिलासपुर का ब्लड बैंक कहा जाता है। रौड़ा सेक्टर के निवासी सुशील पुंडीर एक संस्था की तरह काम करते हैं। शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक के पद से सेवानिवृत सुशील पुंडीर वरिष्ठ साहित्यकार हैं और एक स्थापित खिलाड़ी होने के साथ वह एक नियमित रक्तदाता के तौर पर अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वाहन में हमेशा आगे रहते हैं। वह न केवल ब्लड डोनेशन केंपों में नियमित रक्तदान करते आ रहे हैं, बल्कि रक्तदान जागरूकता के लिए भी हमेशा आगे रहते हैं।

ग्राउंड पर बनाए कई शानदार रिकॉर्ड

अपने स्कूल के दिनों से ही सुशील पुंडीर खेलों के प्रति आकर्षित रहे हैं। कॉलेज के दिनों में एक प्रतिभावान खिलाड़ी रहे सुशील पुंडीर कई बार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। सिंगापुर में हुई अंतरराष्ट्रीय मास्टर एथलैटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने 400 मीटर रिले दौड़ में गोल्ड मैडल हासिल किया और शॉटपुट में सिल्वर मैडल जीत कर वह भारतीय कैंप के स्टार प्लेयर रहे।

अफसर की भूमिका रंगकर्मी का रोल

 

सुशील पुंडीर की गिनती ऐसे शिक्षक के रूप में होती है, जिन पर उनके स्टूडेंट्स हमेशा गर्व करते हैं। बतौर शिक्षक स्टूडेंट्स में अपनी गहरी छाप छोडऩे और आदर्श स्थापित करने वाले सुशील पुंडीर संयुक्त निदेशक के पद से सेवानिवृत हुए, बावजूद इसके वह पिछले करीब तीन दशकों से डियारा सैक्टर में आयोजित होने वाले श्री रामनाटक में रामायण के विभिन्न किरदारों को अपनी अभिनय क्षमता से जीवंत कर चुके हैं।

साहित्यकार सिखा रहा सामाजिक सरोकार

 

सुशील पुंडीर साहित्य के क्षेत्र का भी एक अहम नाम है। अपने अध्यापन के कार्यकाल में वह जहां- जहां रहे हैं, वहां की साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं के सक्रिय सदस्य रहे हैं। कविता विधा पर खास पकड़ रखने वाले सुशील पुंडीर के दो काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। सुशील की कविताओं में जिंदगी के रंग हैं। विभिन्न सामाजिक मुद्दों के चिंतन के अलावा पहाड़ी संस्कृति को लेकर उनकी सोच को पढ़ा जा सकता है।

हर काम बेमिसाल, सादगी की मिसाल

 

सुशील पुंडीर एक ऐसे अधिकारी रहे हैं, जो सादगी की मिसाल रहे हैं। दोस्तों के बीच बिना लाग- लपेट बेबाक अपनी बात कहने वाले पुंडीर का सेंस ऑफ ह्यूमर कमाल का है। उनका कहना है कि वह अपने प्रदेश की संस्कृति से गहरे जुड़े हैं और लोक जीवन के हर रंग से वाकिफ हैं। उनका कहना है कि अपने काम के प्रति समर्पण ही किसी की सबसे बड़ी पूंजी होती होती है। वह कहते हैं कि वे खुशनसीब हैं कि उन्हें जिंदगी को समझने और बचाने का अवसर मिला है। उनका कहना है कि विनम्रता आदमी की सबसे बड़ी कमाई है और विनम्रता हासिल करने के लिए आदमी को अपने इनसान होने को समझना पड़ता है। जिसने इस राज को जान लिया, उसके लिए ये दुनिया और दुनिया की हर चीज प्यारी है।

 

मस्तमौला साहित्यकार, मनमौजी कलाकार

 

सुशील पुंडीर को जानने वाले बताते हैं कि वह एक योग्य सेवानिृत अधिकारी होने के साथ एक मस्तमौला इनसान हैं। हर दम उनके चेहरे पर एक मुस्कान तैरती रहती है। बात चाहे लेाक संस्कृति की हो, साहित्य कर्म की हो, अथवा सामाजिक जिम्मेवारी हो, एक जोशिला खिलाड़ी हमेशा तैयार मिलता है। यह उनके व्यक्तित्व की ही खूबी है कि एक बार उनसे मुलाकात होने पर हमेशा के लिए किसी को भी वह अपाना बना लेते हैं। बहुआयामी प्रतिभा के धनी पुंडीर के दोस्तों को विस्तृत दायरा है। खेल आयोजनों के अलावा साहित्यिक आयोजनों में उनकी भागीदारी हमेशा रहती है। वह जिस भी संस्थान में रहे हैं, स्वयं स्टाफ व अधिनस्थ अधिकारियों के लिए मिसाल कायम करते रहें। सुशील पुंडीर का कहना है कि जीवन में उन्हें जो कुछ मिला है, उसके लिए वह हमेशा ईश्वर के धन्यावादी हैं। इस जीवन में व्यक्तिगत उपलब्धियों से अहम यह है कि मैं किसी के काम आ सका। याायद यही एहसास है जो मुझे हर दम ऊर्जा से भरे रखता है और यह ऊर्जा मुझे प्रोत्साहित करती है।


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