बचपन में हुआ रंगों से प्यार, आख़िरी पलों तक रहा खुमार, पहाड़ की सुगंध से सराबोर है 92 साल तक चित्रकला के लिए समर्पित रहे महान चित्रकार एचसी राय के रंगों का संसार

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बचपन में हुआ रंगों से प्यार, आख़िरी पलों तक रहा खुमार, पहाड़ की सुगंध से सराबोर है 92 साल तक चित्रकला के लिए समर्पित रहे महान चित्रकार एचसी राय के रंगों का संसार

 

शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट

 

चार साल की उम्र में रंगों से ऐसा प्यार जिसका खुमार आख़िरी पलों तक रहा खुमार। चित्रकला की ऐसी धुन सवार हुई कि पूरी उम्र कला के नाम कर दी और कला को ही जीवन बना लिया। 96 साल के जीवन में 92 साल चित्रकला के लिए समर्पित रहे। शिमला में रहते हुए अपने जीवन की बेहतरीन कलाकृतियों को जन्म देने वाले फाइन आर्ट कॉलेज शिमला के पहले प्रिंसिपल एचसी राय बेशक बुढ़ापे की सांझ में महानगर मुंबई में रहने लगे, लेकिन उनके चित्रों में पहाड़ की भीनी भीनी सुगंध हमेशा महसूस की जाती रही। महान चित्रकार एचसी राय बेशक अब इस दुनिया में नहीं हैं, पर उनके रंगों का संसार पहाड़ की सुगंध से सराबोर है।

 

चार साल की उम्र में कला के प्रति रुचि

1 9 23 में बेरली में पैदा हुए एचसी राय (हरीश चंद्रराय) को चार साल की बाल्यावस्था में ही कला के प्रति रुचि पैदा हो गई थी। हालाँकि कि कला की दुनिया में शिखर पर पहुंचे इस मनीषी के जीवन में कई बाधाएं आईं लेकिन जुनून के दम पर कला का अनूठा संसार रच डाला और दृश्य कला और सौंदर्यशास्त्र में महान ऊंचाइयों को हासिल कर सके।

 

जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स, मुंबई से पढाई

 

गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट्स, लखनऊ में सर्वश्री एके हल्दर, एन रॉय चौधरी, एल एम सेन, बी सेन व श्रीधर महापात्र के मार्गदर्शन में कला की आरंभिक बारीकियां सीखने वाले एचसी राय ने प्रतिष्ठित सर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स, मुंबई से शिक्षा हासिल की।

 

 

बेरली कॉलेज में कला के प्रोफेसर

 

एचसी राय बेरली कॉलेज में कला के एक प्रोफेसर के रूप में काम किया। यहां एक दशक के कार्याकाल के बाद उनकी नियुक्ति गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स शिमला के प्रिंसिपल के रूप में हुई, यहां उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति तक निरंतर काम किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एचसी राय भारतीय सेना में एक कलाकार के रूप में सेवा की।

 

 

बंगाल स्कूल ऑफ पेंटिंग में प्रयोग

राय ने बंगाल स्कूल ऑफ पेंटिंग में विभिन्न प्रयोग करते हुए चित्रकारी के उच्च शैक्षणिक पहलुओं को छूआ, उन्होंने वाटर कलर्स, पेस्टल, क्रेयंस, आयल पेंटिंग, मूर्तिकला में खुद को स्थापित किया। करना उन्होंने क्ले और आयल में कई बड़े आकार न्यूड्स बनाए। क्ले से यथार्थवादी मानव शरीर बनाया भीतर से पूरी खोखला था।

 

बिरला मंदिर के मुख्य वास्तुकार ने किया चरणस्पर्श

पोट्रेट और स्कल्पचर रूचि ने उन्हें मानवीय शरीर का पता लगाने के लिए प्रेरित किया, जिसके लिए उन्होंने हजारों स्केच बनाए। स्केचिंग में उनकी दिलचस्पी दस साल की कम उम्र में शुरू हो गई थी। गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट्स, लखनऊ में उनके बनाये पोट्रेट्स को उस दौर के कला की पारखी एके हल्दर, बी सेन और एम आर आचरेकर खुद के पोट्रेट्स से बेहतर बताते थे। एक स्वामी शिवानंद के पेंसिल स्केच की प्रशंसा करते हुए एक  बार श्री ए.के. हल्दार ने कहा था, ‘ भारत में कोई भी कलाकार इस तरह के काम को को समझने की क्षमता भी नहीं रखता है।‘ बिरला मंदिर दिल्ली के मुख्य वास्तुकार ने उनकी स्केचबुक देखने के बाद उनके चरणस्पर्श कर लिए थे।

 

आयल कलर्स और वाटर कलर्स में पूर्णता का मकसद

 

एचसी राय का उद्देश्य आयल कलर्स और वाटर कलर्स में पूर्णता हासिल करना था। कई शाही परिवारों, व्यापारिक घरानों, व्यवसायियों, फिल्म सितारों और यहां तक कि आम लोगों ने उनसे अपने चित्र बनवाये और कुछ ने उन्हें चित्रों के लिए कमीशन भी दिया। वह समान प्रवाह और तीव्रता के साथ काम करते रहे।

 

शिमला के प्रसिद्ध राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार

एचसी राय राय की पेंटिंग, संपूर्ण अनुभव और विभिन्न सूक्ष्म प्रयोगों के साथ चित्रकला के कौशल दिखाती है। भारतीय और पश्चिमी सौंदर्यशास्त्र, आकृति विज्ञान और कविता में उनकी रुचि ने जो कुछ भी किया था, उसमें उच्च मानदंड बनाए रखने में उन्हें मदद मिली। भारतीय शास्त्रीय संगीत और वास्तुकला में उनकी गहरी रुचि उनके शोध के पूरक रहे। राय शिमला में स्थित प्रसिद्ध राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार हैं। जीवन के नौ दशक बाद भी एक परिपूर्ण चित्र चित्रित करने में उनका कौशल हमेशा की तरह ताजा रहा।

 

हिमाचल का ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’

भारत सरकार की और से एचसी राय का चयन दो बार वयोवृद्ध कलाकार पुरस्कार (वेट्रन आर्टिस्ट अवार्ड ) के लिए किया गया। उन्हें हिमाचल प्रदेश सरकार की और से ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।  उन्होंने इस अवार्ड राशि से दोगुनी राशि का मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दे दिया था।

 

शिमला में 950 वर्गफुट में स्टूडियो

 

एचसी राय राय की कलाकृतियों को दुनिया के कई कोनों में खरीदा जा चुका है। राय के पेंटिंग्स अब भी शिखर सम्मेलन हॉल में मौजूद हैं, जहां ऐतिहासिक इंदिरा- भुट्टो शिखर सम्मेलन हुआ था। राय ने खुद को मिशन के लिए समर्पित किया और शिमला में प्राकृतिक सौंदर्य के बीच 950 वर्गफुट में अपने स्टूडियो की स्थापना की। प्रकृति के साथ धुन में रहते हुए उन्होंने यहां आयल और वाटर कलर्स के विभिन्न प्रयोगात्मक चित्र बनाए।

 

 

पुस्तक में राय का काम

 

 

1 99 2 में मारिया ब्रोस द्वारा प्रकाशित ‘द सिमला स्टोरी , ग्लो एंड आफ्टर ग्लो ऑफ़ राज : एक स्केच बुक’ जिसके सह-लेखक ओसी सूद हैं, उस पुस्तक के सभी चित्रों को एचसी राय द्वारा स्केच किया गया था। पुस्तक में शिमला के सभी एतिहासिक इमारतों और विश्व विरासत भवनों के स्केच हैं।

 

 

रोज चार से छह घंटे कला को समर्पित

 

 

89 वर्ष की आयु में एक हादसे का शिकार होने के बाद वह शिमला से अपनी बेटी अमलाराय के पास मुंबई में स्थानांतरित हो गये, पर जीवन और कला के लिए उनका उत्साह जीवन के आख़िरी लम्हों तक जारी रहा। जिन्दगी की सांझ में 95 साल की उम्र में भी वे प्रति दिन चार से छः घंटे अपनी कला को देते रहे। अक्टूबर 2018 में यह महान चित्रकार भगवान् को प्यारा हो गया।

 

 

नेहरु सेंटर मुंबई में कला प्रदर्शनी

 

 

जब 95 साल की उम्र में एच सी राय ने ‘नेहरू सेंटर मुंबई में अपने चित्रों की प्रदर्शनी लगाईं तोमुंबई में रहने वाले हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार अनूप सेठी ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा, ‘नेहरू सेंटर में बृहद् कला प्रदर्शनी देखी, खासकर शिमला कला महाविद्यालय के प्रथम प्राचार्य 95 वर्षीय एच सी राय की चित्रकृतियां देखने का अनुभव अनुपम था। करीब साठ साल पहले के ये चित्र इतने ताजा, नवीन, समकालीन, सहज, सम्पूर्ण थे कि आनंद आ गया।‘

 

 


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