बंजार का बालो  कुंड : यहां झूठी कसम खाने पर होता है कुल का नाश

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बंजार का बालो  कुंड : यहां झूठी कसम खाने पर होता है कुल का नाश

कुल्लू से आरती ठाकुर की रिपोर्ट

 

बंजार उपमंडल के तहत आने वाली कोठी शिकारी और फाटी चेथर के मध्य बालो  नामक कुंड  की ऐतिहासिक, पौराणिक, सांस्कृतिक मान्यता है। कुछ लोग कसम खाने व वचन देने के लिए विशेषकर यहां पहुंचते हैं तथा जल मुट्ठी में उठाकर अपनी सच्चाई को साबित करते हैं लेकिन कसम नहीं निभाने पर या झूठे होने पर जल को छुआ तो कुल का नाश होता हुआ भी देखा गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब वर व कन्या की कुंडली के मिलान में भावी अनिष्ट ग्रह दृष्टिगोचर हो रहा हो या मंगलीक योग पाया गया हो तो भाद्र शुक्ल पक्ष की रात्रि को सैकड़ों लोग जागरण करने आते हैं। परिणय सूत्र में बंधने वाले भी इसी जल को अग्नि के स्थान पर साक्षी मानकर वैवाहिक जीवन का श्रीगणेश करते हैं।

12 इंच लंबी गढ़ की चाबी

पुराने समय में अनंत नाग का रथ बनने से पूर्व करड़ू के रूप में उनका पूजन किया जाता था, उसी दौरान तादी चेथर खाबल के गुर, बलागाड़ के पुरोहित इस गढ़ में अहर्निश भगवान शेष की भक्ति में लीन रहते थे। जिनके पास आज भी 12 इंच लंबी गढ़ की चाबी पालकी में रखी हुई है।

नाग-गोपियों के मिलन से बारिश

बालो मंदिर के समीप ही जोगणियों का प्रसिद्ध शक्ति स्थल है। इन्हें अनंत बालू नाग की पाताल में रहने वाली नाग-गोपियां माना जाता है। मान्यता है कि जब भी हरियान क्षेत्र में सूखा पड़ता है तो बालू नाग अपने हरियानों के साथ नाग-गोपियों से मिलन करने के लिए बाहु पहुंचते हैं और सरोवर के भीतर प्रवेश करके योगनियों से जलक्रीड़ा करते हैं। देव मिलन के बाद हरियान क्षेत्र में बारिश हो जाती है।


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