फर्श से अर्श तक – नैहरनपुखर के छोटू राम, चंडीगढ़ में बड़ा नाम, ऑफिस ब्वाय से ‘गुरु ऑफ माइक्रोसॉफ्ट टेक्नोलॉजी’ के मुकाम पर पहुंचने की प्रेरककथा

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फर्श से अर्श तक – नैहरनपुखर के छोटू राम, चंडीगढ़ में बड़ा नाम, ऑफिस ब्वाय से ‘गुरु ऑफ माइक्रोसॉफ्ट टेक्नोलॉजी’ के मुकाम पर पहुंचने की प्रेरककथा

 

चंडीगढ़ से रणदीप बत्ता की रिपोर्ट

इस बार के प्रेरककथा के नायक हैं कांगड़ा जिला के ठेठ ग्रामीण परिवेश वाले नैहरनपुखर गांव से घोर गरीबी के अंधेरे को चीर कर अपने हिस्से का सूरज उगाने वाले छोटू राम। विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद मेहनत और कुशल प्रबंधन के दम पर अपना मुकाम हासिल करने वाले छोटू राम चंडीगढ़ स्थित दो सॉफ्टवेयर कंपनियों के संचालक हैं। ऑफिस बॉय से अपना कॅरिअर शुरू करने वाले छोटू शर्मा का वार्षिक टर्नओवर 10 करोड़ है और उनकी कंपनियों में 150 कर्मचारी काम करते हैं। ‘हिमाचल गौरव’ और ‘ट्राइडेंट फॉर यंग इनोवेशन इंटप्रिन्योर’अवॉर्ड से सम्मानित छोटू राम ने आसमान में छेद करने जैसा कर दिखाया। संसाधनों के अभाव का रोना रोने वाले युवाओं के लिए छोटू राम की संघर्षगाथा बड़ा सबक है। उन्होंने इस कथन को साबित कर दिखाया है कि हर बड़े काम की शुरुआत छोटे स्तर पर होती है।

 

संघर्ष से पड़ी सफलता की बुनियाद

छोटू राम बताते हैं कि वर्ष 1998 में उन्होंने सरकारी कॉलेज ढलियारा से ग्रेजुएशन किया। वह कंप्यूटर कोर्स करना चाहते थे, लेकिन उनके पास इस कोर्स को करने के लिए पैसे नहीं थे। वे इस बात को अच्छी तरह से समझ चुके थे कि बिना कम्प्यूटर नॉलेज के कहीं भी वे अपना कैरियर नहीं बना सकते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि आगे पढ़ाई के आसार नहीं थे। यहीं वे दिन थे जब छोटू शर्मा ने संघर्ष का रास्ता चुना और चंडीगढ़ की राह पकड़ ली। यहां नौकरी के लिए संघर्ष का जो दौर शुरू हुआ, उसमें एक हीरे की चमक निखर कर सामने आ गई। एक कंप्यूटर सेंटर में उन्हें ऑफिर ब्वाय की नौकरी मिल गई। सफलता की इस कहानी में टर्निग प्वांयट यह है कि यहीं से बाद में उन्होंने कंप्यूटर कोर्स किया और माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड सॉफ्टवेयर डेवैल्पर बन गए।

 

ओवरटाईम, ट्यूशन वर्क

छोटू शर्मा कहते हैं कि उन्हें कामयाबी तश्तरी में सजाकर नहीं मिली। यहां तक पहुंचने में काफी मेहनत करनी पड़ी। बच्चों के घर जाकर ट्यूशन पढ़ाना भी संघर्ष में शामिल रहा। साइकिल घूमते हुए छोटू राम कम्प्यूटर की दुनिया में बड़े स्टार्टअप के सपने ले रहा था, लेकिन दूसरी ओर सच यह भी था कि उसके पास खुद का डेस्कटॉप तक नहीं था। इसके लिए बचत जरूरी थी तो छोटू राम ने ओवरटाइम किया, कई बार फाके काटे और दो साल की बचत से बाइक और कंप्यूटर खरीदने में कामयाब हो गए। अब तक उनके सपनों में रंग भरने शुरू हो गए थे।

 

कम्प्यूटर कोर्स और टीचर का रोल

तीसरे साल के संघर्ष में एक साथ दो और अच्छे काम हो गए। एक तरफ छोटू राम ने माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइट सॉफ्टवेयर डेवलपर का कोर्स पूरा किया, वहीं दूसरी तरफ उन्हें एपटेक कंप्यूटर सेंटर में बतौर फैकल्टी टीचर स्टूडेंट्स को पढ़ाने का जॉब ऑफर मिल गया। यह उनकी जिंदगी का एक बड़ा टर्निंग प्वांयट था और उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। संघर्ष अब भी जारी था। शाम के समय वह फैकल्टी के तौर पर एपटेक में क्लास लेता और दिन में कई स्टूडेंट्स के घर जाकर क्लास लेता। सन 2000 के आते-आते वह टीचिंग से अच्छी कमाई करने लगा था, लेकिन मंजिल कहीं ओर थी।

 

किराये का प्लैट, कम्प्यूटर इंस्टीच्यूट

छोटू राम ने दो कमरों के किराए के फ्लैट में एक कम्प्यूटर के साथ अपने कंप्यूटर इंस्टीट्यूट की शुरुआत की। छह ही महीनों में उसके इंस्टीट्यूट में 80 से ज्यादा स्टूडेंट हो गए। कुछ समय बाद संस्थान में कंप्यूटर आ गए। कम ही समय में डॉट नेट की टीचिंग में छोटू का नाम चंडीगढ़ में छा गया। छोटू के अधिकतर स्टूडेंट्स को करोड़ों डॉलर्ज के टर्नओवर वाली कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट, एक्सेंचर, टीसीएस और इन्फोसेस में अच्छे खासे पैकेज पर नौकरी मिलने लगी। छोटू शर्मा को ‘गुरु ऑफ माइक्रोसॉफ्ट टेक्नोलॉजी’ बुलाया जाने लगा। 2007 में उसने चंडीगढ़ में कई स्थानों पर सीएस इन्फोटेक के नाम से इंस्टीट्यूट खोल लिए। उनके इंस्टीट्यूट में 1000 से ज्यादा स्टूडेंट कंप्यूटर शिक्षा ले रहे है।

 

एक कम्प्यूटर के साथ इंस्टीट्यूट की शुरुआत

 

छोटू राम ने दो कमरों के किराए के फ्लैट में एक कम्प्यूटर के साथ अपने कंप्यूटर इंस्टीट्यूट की शुरुआत की। छह ही महीनों में उसके इंस्टीट्यूट में 80 से ज्यादा स्टूडेंट हो गए। कुछ समय बाद संस्थान में कंप्यूटर आ गए। कम ही समय में डॉट नेट की टीचिंग में छोटू का नाम चंडीगढ़ में छा गया। छोटू के अधिकतर स्टूडेंट्स को करोड़ों डॉलर्ज के टर्नओवर वाली कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट, एक्सेंचर, टीसीएस और इन्फोसेस में अच्छे खासे पैकेज पर नौकरी मिलने लगी। छोटू शर्मा को ‘गुरु ऑफ माइक्रोसॉफ्ट टेक्नोलॉजी’ बुलाया जाने लगा। 2007 में उसने चंडीगढ़ में कई स्थानों पर सीएस इन्फोटेक के नाम से इंस्टीट्यूट खोल लिए। उनके इंस्टीट्यूट में 1000 से ज्यादा स्टूडेंट कंप्यूटर शिक्षा ले
रहे है।


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