पढ़िए रेलवे एवं वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के ट्वीटर हैंडल पर क्यों है सिरमौर के इस कैफे की चर्चा, केंद्रीय मंत्री ने क्यों बताया इसे नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की झलक

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पढ़िए रेलवे एवं वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के ट्वीटर हैंडल पर क्यों है सिरमौर के इस कैफे की चर्चा, केंद्रीय मंत्री ने क्यों बताया इसे नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की झलक
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
रेलवे एवं वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीटर हैंडल पर सिरमौर के ‘कैफे एबल’ की खूब तारीफ की और केंद्रीय मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की झलक बताया। दरअसल इस कैफे के संचालन में अलग- अलग विकलांगता के शिकार
लोग काम कर रहे हैं । इस कैफे में भोजन और पेय पदार्थ परोसे जाते हैं, जो ऐसे ही विशेष विशेष लोगों द्वारा बनाए जाते हैं और उनके द्वारा भी परोसे जाते हैं। कैफ़े अलग-अलग तरह के विकलांगों को रोज़गार देने के लिए खोला गया है. रेलवे एवं वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने का ट्वीटर पर कहना है कि यह विचार पीएम मोदी के लिए अत्मानिर्भार भारत के दृष्टिकोण के करीब जाने का है, जिससे भारत आत्मनिर्भर बना है। इस कदम की पीयूष गोयल ने सराहना की है और कैफे कैसे चल रहा है, इसकी जानकारी को ट्विटर पर साझा किया है।
कुक भी करते हैं, सर्व भी करते हैं विकलांग
डीडी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कैफे की स्थापना कोविड़ -19 के चलते हुए लॉकडाउन में जिन विशेष लोगों की नौकरियां चली गईं उनको रोजगार प्रदान करना है। विकलांग लोगों के लिए काम कर रहे आस्था स्कूल ने जिला प्रशासन से मिल कर कैफे एबल खोलने का लिया। वर्तमान में पांच प्रशिक्षित विशेष लोग कैफे संचालन में अपना कौशल दिखा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बेशक कैफे इतना बड़ा नहीं है और शाम को 6 बजे तक ही खुला है। इस कैफे में भोजन और पेय पदार्थ परोसे जाते हैं जो उन लोगों द्वारा बनाए जाते हैं जो विशेष रूप से-अभ्यस्त होते हैं. पांच श्रमिकों के अलावा, कैफे में एक पर्यवेक्षक है।
यह है बिजनस मॉडल
उपायुक्त डॉ. आर के परुथी कहते हैं कि “यह एक प्रायोजित कार्यक्रम है। अलग-अलग तरह के विकलांग आर्थिक तौर पर स्वतंत्र कर एक सामान्य जीवन जी सकें। कैफे के संचालन में यह ध्यान रखना है कि कैफे जो भी मुनाफा कमाएगा, उसे वहां के श्रमिकों के बीच वितरित किया जाएगा और यदि कोई नुकसान होता है, तो वह अस्था स्कूल वहन करेगा। वे कहते हैं कि यह अपनी तरह का पहला प्रयास है.

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