प्रेरक- खुद अस्सी फीसदी विकलांग, दान कर दिए अपने अंग, विजय से सीखिए जमाने के लिए जीना

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प्रेरक- खुद अस्सी फीसदी विकलांग, दान कर दिए अपने अंग, विजय से सीखिए जमाने के लिए जीना
पालमपुर से विनोद भावुक की रिपोर्ट
वह इतना विकलांग है कि चल- फिर तक नहीं सकता, लेकिन संवेदनशील इतना कि रक्तदान को जागरूक करने के लिएहमेशा आगे रहता है. उसने अपने ऑर्गन डोनेट कर अनूठी मिसाल पेश की है. मुकद्दर को कोसने के बजाए वह एक छोटी सी दुकान चला कर अपनी आजीविका चला रहा है. संघर्ष की यह प्रेरककथा का नायक है विजय धीमान.कांगड़ा जिला की धीरा तहसील के मरहूं गांव के विजय धीमान ने समाजसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है.
बीमारी नहीं आड़े आई, पूरी की पढ़ाई
विजय का कहना कि जब वह तीन साल के थे तब मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक गंभीर बिमारी ने इन्हें जकड़ना शुरू कर दिया। पता नहीं था कि यह बिमारी गंभीर रूप धारण कर लेगी और जिसकी गिरफ्त में आकर चलना फिरना भी बंद हो जाएगा। विजय ने अपनी पढ़ाई को सुचारू रखते हुए इस बिमारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। बारहवीं कक्षा को पास किया, उसके बाद सुंदरनगर से आईटीआई की।
समाज के लिए प्रेरक हैं विजय
विजय खुद की बिमारी को किनारे रखकर मानवता की निस्वार्थ सेवा में अग्रिणी पंक्ति में विराजमान हैं। आर्गन डोनेट करने वाला विजय प्रेरणास्रोत हैं।
विजय मध्यम वर्गीय परिवार से संबंधित हैं।विजय धीमान पालमपुरिया नाम से मशहूर यह युवा किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। शारीरिक दिक्कत भी इन्हें सेवा के मार्ग से अलग नहीं कर सकी।आज भी यह नशे के दुष्प्रभावों और लोगों को रक्तदान करने के लिए जागरूक करते रहते हैं।

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