प्रेरककथा – धर्मशाला में चाय फैक्टरी की मशीनरी कोलकाता के मुकाबले हॉफ रेट पर, विनोद धीमान ने बना दिया देश का सबसे छोटा 16 इंच का ‘रोलिंग टी टेबल’

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प्रेरककथा – धर्मशाला में चाय फैक्टरी की मशीनरी कोलकाता के मुकाबले हॉफ रेट पर, विनोद धीमान ने बना दिया देश का सबसे छोटा 16 इंच का ‘रोलिंग टी टेबल’

 

धर्मशाला से विनोद भावुक की रिपोर्ट

 

यह प्रेरककथा है हिमाचल प्रदेश के उस युवा इंजीनियर की, जिसने देश का सबसे छोटा 16 इंच का ‘रोलिंग टी टेबल’ बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला के साथ लगते दाड़ी गांव के विनोद धीमान ने चाय उत्पादन के लिए कुटीर व लघु उद्योग स्थापित करने के लिए किफायती माइक्रो मशीनरी जैसे छोटा ‘रोलिंग टी टेबल, ड्रायर, ग्रेटिंग मशीन विकसित कर चाय उत्पादन की दुनिया में क्रांतिकारी खोज की है। विनोद धीमान के बनाए यह उपकरण धर्मशाला, जोगिंद्रनगर, गोपालपुर आदि छोटे चाय उद्योगों का आधार बन गए हैं। टी बोर्ड ऑफ इंडिया के अधिकारियों का कहना है कि विनोद धीमान की खोज ‘कांगड़ा चाय’ के छोटे चाय बागवानों के लिए वरदान साबित होने वाली है।

 

गोपालपुर से मिली प्रतिभा को पहचान


विनोद धीमान का कहना है कि उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर गोपालपुर स्थित ग्राीनबड्स इंटरप्राइसेस के संचालक सचिन बुटेल ने प्रदान किया। उन्होंने चाय उत्पादन में काम आने वाले इस उपकरणों को विकसित करने में आर्थिक मदद की। विनोद धीमान ने गोपालपुर स्थित ग्राीनबड्स इंटरप्राइसेस की फैक्टरी के लिए छोटे ड्रायर, ग्रेडिंग मशीन और रोलिंग टी टेबल विकसित किए। ये उपकरण कोलकाता में मिलने वाले उपकरणों से आधी लागत पर बनकर तैयार हो गए।

 

बदल सकती है उत्पादन की तस्वीर

हिमाचल प्रदेश में अभी 2312 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की खेती की जा रही हैं, जबकि 1300 हेक्टेयर रकबे पर ही गुणवत्ता वाली चाय पैदा की जा रही है। अगर दूसरे चाय बागानों को भी पुनर्जीवित किया जाए तो चाय का उत्पादन 10 लाख किलोग्राम से बढक़र 20 लाख किलोग्राम तक किया जा सकता है। मंडी व चंबा जिलों में भी चाय उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। विनोद धीमान की विकसित की गई सस्ती मशीनरी प्रदेश के चाय उत्पादन का चेहरा बदनले की कुव्वत रखती है।

 

असम व कोलकाता में स्टडी

विनोद धीमान का कहना है कि चाय उत्पादन के क्षेत्र में किए गए उनके सफल प्रयोगों को देखते हुए टी ओर्ड ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया। उनका कहना है कि टी बोर्ड के निदेशक अनुपम दास और इंजीनियर अभिमन्यु शर्मा ने उन्हें असम और कोलकाता जाकर चाय उत्पादन में काम आने वाली मशीनरी का अध्ययन करने के अवसर उपलब्ध करवाए। वे कहते हैं कि इस अध्ययन से उन्हें चाय उत्पादन में काम आने वाली सस्ती मशीनरी विकसित करने में बड़ी मदद मिली।

 

पिता ने तराशा बेटे का हुनर

विनोद धीमान के पिता रमेश धीमान सिद्धबाड़ी टी फैक्टरी सेे फोरमैन रिटायर्ड हुए हैं। कांगड़ा जिला में स्थित विभिन्न चाय फैक्टरियों की मशीनरी में फॉल्ट आने पर अब भी उनकी सेवाएं ली जाती हैं। चाय उत्पादन से जुड़े उपकरणों की मुरम्मत की आरंभिक शिक्षा उन्हें अपने पिता रमेश धीमान से मिली और वह भी पिता के साथ इस मशीनरी की रिपेयर में दक्ष हो गए। यहीं से विनोद धीमान को चाय उत्पादन के लिए छोटे उपकरण बनाने का आइडिया आया, जो सफल रहा।

स्कूटर पर कैंचियां तेज करने की मशीन

 

धर्मशाला के युवा इंजीनियर विनोद धीमान ने चाय बागानों में काम आने वाली कैंचियों को धार देने के लिए स्कूटर पर ऐसी मशीन विकसित की है जो छोटे चाय बागवानों के लिए कारगर सिद्ध हो रही है। विनोद धीमान का कहना है कि जिला के हजारों छोटे टी प्लांटर सस्ती मशीनरी हासिल कर सकें, इस दिशा में वह काम कर रहे हैं। विनोद धीमान कहते हैं कि चाय उत्पादन में काम करने वाले ड्रायर महंगे होते हैं, लेकिन उन्होंने बेहद सस्ता ड्रायर विकसित किया है।


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