प्रेरककथा : दर्द बांटने का ‘प्रयास’, जरूरतमंदों के जीवन में उल्लास, 10 सदस्यों से शुरू हुई संस्था में अब 1200 मेंबर, हर मेंबर हर माह करता है 200 रूपए का सहयोग

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प्रेरककथा : दर्द बांटने का ‘प्रयास’, जरूरतमंदों के जीवन में उल्लास, 10 सदस्यों से शुरू हुई संस्था में अब 1200 मेंबर, हर मेंबर हर माह करता है 200 रूपए का सहयोग
हमीरपुर से डॉ. राकेश शर्मा की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश की कुछ सामाजिक संस्थाएं लीक से बेहतर समाज के निर्माण में शानदार भूमिकाएं अदा रही हैं। ऐसी ही एक संस्था हमीरपुर में जरूरतमंदों का दर्द बांट कर उनके जीवन में उल्लास भरने के ‘प्रयास’ में जुटी है। ‘प्रयास’ संस्था की शुरुआत 25 जनवरी 2013 को हुई। 10 दोस्तों, जिनमें कोई किसान था, कोई व्यवसायी, कोई सरकारी कर्मचारी और कोई भूतपूर्व सैनिक। संस्था के सदस्यों ने गरीबों, अनाथों, दिव्यांगो व बेराजेगारों को रोजगार के लिए दक्ष करने और रोजगार उपल्बध करवाने से शुरूआत की। संस्था ने आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों की पढ़ाई का जिम्मा भी उठाया है। उनके इन नेक प्रयासों को देखते हुए लोग जुड़ते गए और वर्तमान में प्रयास के सदस्यों की संख्या 1200 हैं। संस्था का हर सदस्य हर महीने संस्था को न केवल 200 रुपए सहयोग राशि प्रदान करता है, बल्कि संस्था की ओर से किए जाने वाले सामाजिक कार्यों में भी सहयोग करता है।
मोबाइल एम्बूलेंस संचालित करने वाली पहली संस्था
प्रयास संस्था प्रदेश की ऐसी पहली संस्था बन है जो गांव- गांव तक जरूरतमंदों के लिए मोबाइल एम्बूलैंस संचालित कर रही है। इस मोबाइल वैन में एक हेल्थ ऑफिसर एवं पैरा मेडिकल वालंटियरस के अलावा नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन तथा वाहन चालक होते हैं, जो लोगों के घर द्वार पहुंचकर न केवल विभिन्न प्रकार के रोगों की निशुल्क जांच करते है बल्कि मौके पर उनका इलाज भी करते है।
पचास हजार लोगों का घर पर उपचार
मोबाइल वैन में 40 से भी अधिक बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधा मुफ्त में उपलब्ध होती है, जिसमें केएफटी, एलएफटी, हिमटॉलाजी टेस्ट, इलेक्ट्रोलाइटस टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल टेस्ट, शूगर तथा है पेटाइटिस के निशुल्ट टेस्ट किए जाते हैं और निशुल्क दवाई उपलब्ध करवाई जाती है। 350 पंचायतों तक एम्बलैंस वैन अपनी पहुंच बना चुकी हैं और पचास हजार लोगों को इस एम्बूलेंस वैन का लाभ मिल चुका है, जिसमें 73 फीसदी महिलाओं ने इस सेवा का लाभ उठाया है।
ऐसे हुई एम्बूलैंस वैन की शुरूआत
संस्था के पास प्रतिदिन ऐसे मरीज आते थे, जिनकी देखभाल या इलाज करवाने वाला कोई नहीं होता था। किसी के पास पैसों की कमी होती, तो कोई पूरी तरह से असहाय होता था। इस समस्या का स्थाई समाधान करने के लिए संस्था ने मोबाइल एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की पहल की। सांसद अनुराग ठाकुर ने सांसद निधि से मोबाइल एम्बुलेंस के लिए राशि उपलब्ध करवा करवाई और अप्रैल 2018 से एम्बूलैंस वैन की शुरूआत हुई।
60 युवाओं को उपलब्ध करवाया रोजगार
प्रयास संस्था क्षेत्र के युवाओं को रोजग़ार के लिए दक्ष करने के लिए कंप्यूटर, टैली, एकाउंटिंग की ट्रेनिंग का प्रब्रध कर रही है। युवाओं को रोजग़ार दिलाने में भी संस्था हर-संभव मदद करती है। संस्था के प्रयासों से अब तक 60 से ज़्यादा युवाओं को रोजग़ार मिल चुका है। प्राकृतिक आपदा के दौरान पीडितों की मदद के लिए भी संस्था उदार मदद करती है।

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