प्रेरककथा – टाटपटी वाले सरकारी स्कूल से पढ़कर इंजीनियर बने चन्द्रशेखर डोगरा ने खाड़ी तक दिखाई अपनी प्रतिभा की चमक, अपने स्टार्टअप के लिए छोड़ी सरकारी नौकरी, पावर प्रोजेक्ट्स, सिविल वर्क और रोड़ कंस्ट्रक्शन में भरोसे का बड़ा ब्रांड कांगड़ा की एमसीसी कंपनी

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प्रेरककथा – टाटपटी वाले सरकारी स्कूल से पढ़कर इंजीनियर बने चन्द्रशेखर डोगरा ने खाड़ी तक दिखाई अपनी प्रतिभा की चमक, अपने स्टार्टअप के लिए छोड़ी सरकारी नौकरी, पावर प्रोजेक्ट्स, सिविल वर्क और रोड़ कंस्ट्रक्शन में भरोसे का बड़ा ब्रांड कांगड़ा की एमसीसी कंपनी
धर्मशाला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
बिलासपुर में स्थित कौल डैम में 62 करोड़ की लागत वाली टनल का निर्माण हो, अथवा पालमपुर के न्युगल में 15 मेगावाट के ओम पावर प्रोजेक्ट का निर्माण हो, या फिर मनाली में भीलबाड़ा ग्रुप के एडी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का निर्माण हो, कांगड़ा की एमसीसी पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने काम की गुणवता से अपनी विशेष साख बनाई है। इस कंपनी ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग के चामुंडा नंदिकेशर धाम के 26 करोड़ की लागत वाले सौंदर्यीकरण और कांगड़ा के ब्रजेशवरी मंदिर के करोड़ों के सौंदर्यीकरण के काम को निर्धारित समय अवधि में गुणवता के साथ किया है। साल 2018 में एमसीसी ने रोड़ कंस्ट्रक्शन की दिशा में कदम बढ़ाये हैं। सैंकड़ों करोड़ की हैवी मशीनरी, सैंकड़ों टेक्नीकल एवं नॉन टेक्नीकल स्टाफ वाली एमसीसी कंपनी एक ऐसे युवा की जिद और जुनून की प्रेरककथा है, जिसने अपनी स्कूली पढ़ाई टाटपटी वाले सरकारी स्कूल से की और अपनी प्रतिभा से प्री मेडिकल और सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर खाड़ी तक अपने हुनर का लोहा मनवाया और फिर डेढ़ दशक तक सरकारी नौकरी करने के बाद अपने स्टार्टअप के लिए अपनी जॉब को क्विट कर दिया। कांगड़ा जिला के शाहपुर उपमंडल के मनेई गांव से संबंध रखने वाले चंद्रशेखर डोगरा का महज 12 साल में कारोबारी जगत में फर्श से अर्स तक का सफर काम के प्रति समर्पण, कुशल प्रबंधन और कड़ी मेहनत का प्रतिफल है।
सरकारी स्कूल की प्रतिभा, विदेश तक चमक
अगस्त 1959 में मनेई शिक्षक के घर पैदा हुए चन्द्रशेखर डोगरा की प्राथमिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक पाठशाला मनेई से हुई और उन्होंने राजकीय उच्च पाठशाला लंज से दसवीं की परीक्षा पास की। साल 1976 में धर्मशाला कॉलेज से प्री मेडिकल करने के बाद उन्होंने साल 1979 में पंजाब युनिवार्सिटी के इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद कुछ समय के लिए शाहपुर में एडहोक पर लोक निर्माण विभाग और सिंचाई एवं जन स्वस्थ्य विभाग में बतौर कनिष्ठ अभियंता के रूप में सेवायें प्रदान की। साल 1983 में चन्द्रशेखर डोगरा ने अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए खाड़ी देश ओमान की उड़ान भरी। ओमान में जहां उन्हें अपने काम में महारत हासिल हुई, वहीँ आर्थिक तौर पर भी मजबूत हुए।
एयरपोर्ट पर मिल गया जॉब ऑफर
ओमान में सात साल सिविल इन्जीनियर के तौर पर काम करने के बाद नवम्बर 1989 में चन्द्रशेखर डोगरा भारत लौटे। अभी वे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे ही थे कि हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड की तरफ से नाथपा झाकड़ी में जूनियर इंजीनियर पद का जॉब ऑफर लेटर उनके हाथ में था। इस जॉब ऑफर को स्वीकार कर उन्होंने 14 साल हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड में कार्य किया और जब वे एसडीओ के पद पर तैनात थे तो साल 2009 में उन्होंने सरकारी नौकरी से रिजाइन कर खुद का स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया। चन्द्रशेखर डोगरा में एमसीसी पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना कर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स की कंस्ट्रक्शन की दिशा में कदम बढ़ाये।
पति – पत्नी ने एकसाथ छोड़ी सरकारी नौकरी
साल 1987 में चन्द्रशेखर डोगरा कोटला निवासी शिक्षिका मधुवाला से परिणय सूत्र में बंधे। साल 2009 में जब चन्द्रशेखर ने एसडीओ के पद से इस्तीफा दिया, सराहन में तैनात उनकी धर्मपत्नी ने भी अपने पद से इस्तीफा देकर पति के स्टार्टअप में सहयोग का निर्णय लिया। सिविल इंजीनियरिंग कर बेटे अभिनव डोगरा और बीटेक आईटी एवं एमबीए पास बेटी अक्षिता डोगरा भी एमसीसी कंपनी के निदेशक मंडल का हिस्सा हैं। अभिनव जहां कंस्ट्रक्शन और टनल इंजीनियरिंग का काम देखता है, वहीं बेटी अक्षिता कांगड़ा बाला जी विहार स्थित कंपनी के ऑफिस और फायनांस को संभालती है।
सादा जीवन, लोक संस्कृति से प्यार
चन्द्रशेखर डोगरा बेहद सादा जीवन जीते हैं। वह साध्विक भोजन करते हैं और स्थानीय पहाड़ी व्यंजन उनकी कमजोरी है। वह पहाड़ी लोक संस्कृति के पक्के हिमायती हैं और उन्हें फुर्सत के क्षणों में लोक गीत- संगीत सुनना पसंद है। प्रदेश की समृद्ध संस्कृति से जुड़े सामाजिक एवं धार्मिक उत्सवों और त्योहारों में बढ़- चढ़ कर भाग लेते हैं। वे मांसाहार, मदिरापान और धुम्रपान से कोसों दूर हैं। शानदार कारोबारी कामयाबी के बावजूद चन्द्रशेखर डोगरा एक संवेदनशील व्यक्तित्व के मालिक हैं। मेहनत के बलबूते सफलता का शिखर छूने वाले चन्द्रशेखर डोगरा सही में पहाड़ी युवाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं।

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