प्राकृतिक रूप में उगने वाले इस जंगली फल की बागवानी की पहल, आईआईटी मंडी के प्रयासों से विकसित हो रहा देश का पहला काफल उद्यान

Spread the love

प्राकृतिक रूप में उगने वाले इस जंगली फल की बागवानी की पहल, आईआईटी मंडी के प्रयासों से विकसित हो रहा देश का पहला काफल उद्यान
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के जंगलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला फल-काफल न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की रोकथाम में भी सहायक सिद्ध होता है। वर्ष में मात्र दो महीनों में मिलने वाले इस फल की इन दिनों हिमाचल प्रदेश में खूब भरमार देखने को मिल रही है। इन दिनों मंडी के बाज़ार में इस फल की बहार है. खुशी की बात यह है कि आईआईटी मंडी के प्रयासों से कमांद गाँव में देश का पहला काफल उद्यान विकसित हो रहा है।
काफल या कठफल
काफल को कठफल भी कहा जाता है। यह फल हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के जंगलों में 15 से अढ़ाई हजार मीटर की उंचाई पर पाया जाता है। इसके पेड़ जंगल में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं और इन पेड़ों पर वर्ष में सिर्फ एक बार ही यह फल लगता है। आईआईटी मंडी के प्रयासों से कमांद में विकसित किये जा रहे वनस्पति उद्यान में फल विज्ञानिक डॉ चिरणजीत परमार की देख रेख में इस जंगली फल के पेड़ को उगाया जा रहा है.
मल्टीविटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट
छोटे-छोटे दानों वाला यह फल खाने में तो स्वादिष्ट होता ही है लेकिन इसमें कई औषधिय गुण भी छुपे हुए हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान मंडी के अनुसंधान अधिकारी डा. विकास नरयाल की मानें तो काफल में भारी मात्रा में मल्टीविटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो गर्मी के कारण लगने वाली लू से इंसान का बचाव करते हैं। काफल के पेड़ की छाल का इस्तेमाल अन्य प्रकार के औषधियों को बनाने में भी किया जाता है।
सेंधे नमक के साथ काफल का स्वाद
मंडी जिला के लोग काफल को सेंधे नमक के साथ खाना पंसद करते हैं क्योंकि इससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। काफल के बाहर एक रसीली परत होती है जबकि अंदर एक छोटी सी सख्त गुठली होती है। लेकिन इस फल को गुठली सहित खाया जाता है। सीजन की शुरूआत में इस फल के दाम 400 रूपए प्रतिकिलो होते हैं जबकि सीजन की समाप्ति पर 50 रूपए प्रतिकिलो तक भी इसे बेचा जाता है।
अब बगीचे में उगेगा काफल
हिमाचल प्रदेश में न तो काफल का कोई बगीचा है और न ही कोई इसके पौधों को लगाता है। यह जंगल में प्राकृतिक तौर पर ही पाया जाता है। अधिक ठंडक और अधिक गर्मी वाले इलाकों में काफल के पेड़ नहीं मिलते। यही कारण है कि लोग वर्ष में सिर्फ एक बार मिलने वाले इस फल की खरीददारी के लिए इंतजार में रहते हैं। मंडी आईआईटी के प्रयास सिरे चढ़े तो कमांध में काफल का बगीचा फलेगा फूलेगा।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *