पोजिटिव स्टोरी – परीक्षा पास कर जिन किताबों को रद्दी में बेच दिया जाता है, ऐसी किताबों को जोड़ कर नूरपुर में स्थापित कर दिए 25 पुस्तकालय, नूरपुर के पूर्व विधायक के बेटे की सार्थक सोच का परिणाम

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पोजिटिव स्टोरी – परीक्षा पास कर जिन किताबों को रद्दी में बेच दिया जाता है, ऐसी किताबों को जोड़ कर नूरपुर में स्थापित कर दिए 25 पुस्तकालय, नूरपुर के पूर्व विधायक के बेटे की सार्थक सोच का परिणाम
नूरपुर से सुखदेव सिंह की रिपोर्ट
ज्यादातर स्टूडेंट्स के अभिभावक उनके परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनकी किताबों को या तो रद्दी में बेच देते हैं अथवा घर के किसी वीरान कौने में पड़ी दीमक का आहार बनती रहती हैं। अगर उन्हीं किताबो को किसी जरूरमंद बच्चे को पढ़ने के लिए दिया जाए तो उसकी बहुत बड़ी मदद हो सकती है। कांगड़ा जिला के नूरपुर निवासी अखिल बक्शी ने इसी सोच का परिचय देते हुए नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में जरूरतमन्द स्टूडेंट्स के लिए 35 लाइब्रेरी स्कूली खोलकर नई पहल की है। स्टूडेंट्स लाइब्रेरी से किताबें लेकर इनका पूरा लाभ उठा रहे हैं। ऐसी लाइब्रेरी के लिए किताबें दान करने वालों और उन्हें पढ़ने वालों का रिकॉर्ड बताता है कि यह मुहिम खूब रंग ला रही है। अखिल बक्शी नूरपुर में गैर सरकारी संस्था रंजीत बक्शी जनकल्याण सभा के बैनर तले न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगा रहे हैं, बल्कि समाजसेवा के अन्य क्षेत्रों में भी संस्था महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। अखिल बक्शी नूरपुर के पूर्व विधायक स्वर्गीय रंजीत बक्शी का बेटा है, अपने स्वर्गीय पिता की स्मृतियों को जिन्दा रखने के उद्देश्य से उन्होंने रंजित बक्शी जन कल्याण सभा का निर्माण करके समाज सेवा में मिसाल कायम की है।
कोरोना वारियर्स के रूप में मदद
कोरोना काल के दौरान आम आदमी का जन जीवन अस्त- व्यस्त होकर रह गया था। प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश की जनता की हर संभव मदद करने का प्रयास किया, वहीं इस संकट के दौर में कई समाज सेवी लोगों ने जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाए। नूरपुर की गैर सरारी संस्था रंजीत बक्शी जनकल्याण जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए आगे आई। इस संस्था ने जरूरतमंद लोगों को राशन किट और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई।
लीगल और मेडिकल सपोर्ट
संस्था डाक्टरों और वकीलों की टीमों का गठन करके जरूरतमंद लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य और कानूनी मदद कर रही है। शिक्षा का प्रसार और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का विकास करना संस्था का मुख्य उद्देश्य है। यह संस्था कैरियर काउंसलिंग और सेमीनारों के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मदद कर रही है। भवन निर्माण में लोगों की आर्थिक मदद के लिए भी संस्था आगे आई है अब तक पच्चीस परिवारों की और अब टक 25 परिवारों की आर्थिक मदद कर चुकी है।
मदद के लिए मासिक मीटिंग
इस संस्था की प्रत्येक महीने बैठक होती है, जिसमें सभी विषयों पर चर्चा करके जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए रूपरेखा बनाई जाती है। हाल ही में गेही लगोड़ के चंदू राम के मकान की रिपेयर के लिए तीस हजार की मदद की। संस्था ने लोहारा के यशपाल का नाम बीपीएल में दर्ज करवाकर उसे बकरी पालन योजना से जोड़ा है। संस्था ने कामनाला के रमन को पत्नी के उपचार के लिए पच्चीस हजार रूपये की आर्थिक मदद और घियाली गांव के कश्मीर मीर सिंह को उपचार के लिए तीस हजार रूपये की मदद पहुंचाई है। ऐसे पच्चीस लोगों की संस्था ने आर्थिक मदद की है।
उच्च शिक्षित युवा 
रंजित बक्शी जनकल्याण सभा के संस्थापक अखिल बक्शी उच्च शिक्षित, ईमानदार, मृदुभाषी, मिलनसार और साफ,सुथरी छवि के मालिक हैं। अखिल बक्शी ने मास कम्युनिकेशन करने के बाद साल 2O13 में नेट और यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करके आठ साल तक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सेवायें प्रदान की है। उनका कहना की उनके पिता का सपना था की युवाओं को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाकर रोजगार से जोड़ा जाए, इसलिए वह इसी विजन को लेकर चल रहे हैं। उनका मानना कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बरतने की बहुत जरूरत है और जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

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