पुरुलिया के जंगल बचाने तीन हथियार लेकर निकलती थी वह बॉबकट फारेस्ट ऑफिसर, अब हिमाचल के फ़ॉरेस्ट विभाग की मुखिया, कांगड़ा की बहू डॉ. सविता के नाम हैं कई बिरले रिकॉर्ड

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पुरुलिया के जंगल बचाने तीन हथियार लेकर निकलती थी वह बॉबकट फारेस्ट ऑफिसर, अब हिमाचल के फ़ॉरेस्ट विभाग की मुखिया, कांगड़ा की बहू डॉ. सविता के नाम हैं कई बिरले रिकॉर्ड
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
1985 बैच की आईएफएस अधिकारी डॉ. सविता शर्मा को प्रदेश सरकार ने एक सितम्बर को वन विभाग का मुखिया नियुक्त किया है। प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) के पद पर नियुक्त डॉ. सविता पहली महिला आईएफएस अधिकारी हैं, जो इस पद पर पहुँची हैं। यह भी बिरला ही रिकॉर्ड है कि डॉ. सविता इस पद पर अपने पति की उत्तराधिकारी बनीं हैं। उनसे पहले उनके पति अजय कुमार इस पद पर तैनात थे। पश्चिम बंगाल कैडर की आईएफएस अधिकारी डॉ. सविता के बारे में कम ही लोगों को जानकारी होगी कि उनकी पहली नियुक्ति उस पुरुलिया में हुई थी, जो अवैध हथियारों और लकड़ी तस्करी को लेकर बदनाम था। तब एक युवा बॉबकट फ़ॉरेस्ट ऑफिसर पुरुलिया के जंगल बचाने के लिए तीन हथियार लेकर निकलती थी। कांगड़ा की बहू डॉ. सविता के नाम कई बिरले रिकॉर्ड दर्ज हैं।
सरकारी स्कूल की स्टूडेंट
दिल्ली में शिक्षक पिता श्रीनिधि भरद्वाज और मां रमला देवी के चार बच्चों में सबसे छोटी बेटी सविता की स्कूली शिक्षा भी घर के अन्य बच्चों की तरह सरकारी स्कूल से शुरू हुई। अनुशासित शिक्षक दम्पति के घर कड़े नियम थे। सबको सूरज उगने से पहले बिस्तर छोड़ना होता। गीता पाठ करना होता। रोज किसी न किसी विषय पर पिता के साथ परिचर्चा में भाग लेना जरूरी था। पढ़ाई पर फोकस पहली प्राथमिकता। पांचवी तक कॉ एजुकेशन के बाद सरकारी गर्ल्स स्कूल का रास्ता पकड़ा। सेंटर बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन की हर परीक्षा का परिणाम शानदार रहा।
उच्च शिक्षित वन अधिकारी हैं डॉ. सविता
डॉ. सविता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज से बोटनी ओनर्स के साथ बीएससी करने के बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एमएससी और आईएआरआई से प्लांट पैथोलोजी में पीएचडी की है। नौकरी के दौरान उन्होंने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में 9 माह का एडवांस कोर्स किया है और बेहतरीन सेवाओं के लिए ‘कोलम्बो प्लान ’ के तहत चयनित होने पर सरकार ने उन्हें एमबीए करने ऑस्ट्रेलिया भेजा।
तस्करों पर फायरिंग का रिकॉर्ड
1985 में भारतीय वन सेवा में चुने जाने पर दो साल के प्रशिक्षण के पश्चिम बंगाल कैडर के तहत डॉ. सविता की पहली नियुक्ति रेंज ऑफिसर के तौर पर पुरुलिया रेंज में हुई। यहां वन तस्करों पर नुकेल डालने के लिए इस युवा वन अधिकारी ने फायरिंग तक की और अपनी प्रतिभा और दिलेरी का परिचय दिया। वह जब हथियारबंद होकर अपनी रेंज में निकलती तो वन तस्करों को भागने पर मजबूर हो जाना पड़ता।
कांगड़ा में ससुराल
1988 में धर्मशाला शहर के साथ लगते शीला चौक के 1984 बैच के आईएफएस अधिकारी अजय शर्मा के साथ परिणय सूत्र में बंधने के बाद डॉ. सविता ने हिमाचल प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बना लिया। हिमाचल में रामपुर से शुरू हुए सफर में कुल्लू, मंडी, शिमला जैसे कई पड़ाव आये और विभिन्न पदों पर खुद को साबित किया। मंडी में सेवा के दौरान इकलौती बेटी का जन्म हुआ। डीएफओ कुल्लू के तौर पर तीन साल के अपने कार्यकाल को डॉ. सविता अपने जीवन का सबसे अच्चा कार्यकाल मानती हैं।
मनवाया अपने हुनर का लोहा
1995 में डॉ. सविता डेपुटेशन पर नेशनल कमीशन फॉर वीमेन की डिप्टी सेक्रेटरी बन कर दिल्ली चली गईं।1996 -99 सोशल जस्टिस एंड एनपावरमेंट में डायरेक्टर रहीं। 2001 में हिमाचल लौट कर डीएफओ वाइल्ड लाइफ और कंजरवेटर फायनांस जैसे पदों पर काम करने के बाद 2004 में डॉ. सविता दूसरी बाद डेपुटेशन पर दिल्ली गईं। इस दौरन वे इन्फोर्मेशन एंड ब्रोडकास्टिंग निदेशालय में निदेशक रहीं और आरएनआई, डीएवीपी जैसी महतवपूर्ण संस्थाओं की हैड रहीं। तीन साल सेवाएं देने के बाद 5 साल स्टेट फारेस्ट सर्विसेस सेन्ट्रल अकादमी के प्रिंसिपल के तौर पर सेवाएं प्रदान कीं। 2012 में हयूमन रिसोर्स डवलपमेंट में अडिशनल प्रिंसिपल चीफ बनीं और 2014 में इंडियन कौंसिल फॉर फोरेस्टरी की डिप्टी डायरेक्टर जनरल बनने वाली पहली महिला फ़ॉरेस्ट ऑफिसर बनीं। डॉ. सविता 4 साल तक फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट देहरादून की डायरेक्टर के पद पर रही। 2019 में डॉ. सविता हिमाचल लौटी और पीसीसीएफ वन्य जीव बनीं। 1 सितबर 2020 को डॉ. सविता हिमाचल प्रदेश वन विभाग की मुखिया बनीं।

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