पीजीआई चंडीगढ़ में प्रशासनिक अधिकारी राकेश कुमार सिंह के दिल में धडक़ती है कविता, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला की पत्रिका “हिमांजली’ के संपादक के तौर पर बनाई पहचान

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पीजीआई चंडीगढ़ में प्रशासनिक अधिकारी राकेश कुमार सिंह के दिल में धडक़ती है कविता, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला की पत्रिका “हिमांजली’ के संपादक के तौर पर बनाई पहचान
चंडीगढ़ से वीरेंद्र शर्मा ‘वीर’ कर रिपोर्ट
पीजीआई चंडीगढ़ में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत राकेश कुमार सिंह के कोमल हृदय में कविता धडक़ती है। उन्होंने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला की पत्रिका “हिमांजली’ के संपादक के तौर पर पहचान बनाई है। अपने पिछले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2014 से लेकर 2018 तक उन्हें भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला की ओर से प्रकाशित की जा रही छमाही पत्रिका “हिमांजली’ के संपादक होने का गौरव प्राप्त हुआ है। यह एक कवि हृदय की ही अभिलाषा हो सकती है कि अच्छा भला दिल्ली में सीए छोड़ कर केवल अपने ही प्रदेश में स्कूल अध्यापक बन कर नई नस्ल को जीवन का पाठ पठाने का छोटा सा योगदान दिल को सूकुन दे जाता है।
सांइस का स्टूडेंट बन गया साहित्यकार
विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल करने के बावजूद साहित्य में रूचि ने हिंदी में एमए, एमफिल व पीएचडी करने के लिए प्रोत्साहित किया। साहित्य के इसी प्रेम ने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला की पत्रिका ” हिमांजली ” के संपादक बनने का अवसर प्रदान किया। उनकी रचनाएं खासकर कविताएं व गज़़लें विभिन्न समाचार पत्र व पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं। वे हिमालय साहित्य मंच, शिमला , नवल प्रयास, भाषा एवं संस्कृति विभाग के साहित्यिक कार्यक्रमों में प्रमुखता से सहभागिता निभाते आ रहे हैं। उन्हें साहित्यकर्म के लिए भाषा, कला और संस्कृति विभाग और नराकास शिमला द्वारा पुरस्कृत किया गया है।
पीएचडी करने में जुटे हैं राकेश
बिलासपुर जिला के बैहल में जन्में राकेश कुमार सिंह की प्रारम्भिक शिक्षा-गांव के ही सरकारी विद्यालय से हुई। हाई स्कूल व बारहवीं तत्कालीन बिहार व वर्तमान झारखंड के श्रमिक हाई स्कूल, तोपा-पिंडरा व संत कोलंबस महाविद्यालय, हजारीबाग से की। बीएससी की स्नातक डिग्री नालागढ़ कालेज से ली। उनके बाद धर्मशाला से बीएड की पढ़ाई की। उन्होंने एमएससी व एमए हिंदी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से करने के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कमलेश्वर कृत ” कितने पाकिस्तान” उपन्यास पर शोधकार्य कर एमफिल की है। वर्तमान में वह “भारत विभाजन पर आधारित हिंदी फिल्मों का अनुशीलन” विषय पर पीएचडी के शोधकार्य में जुटे हैं।
टांडा मैडिकल कालेज से शुरू की नौकरी
राकेश कुमार सिंह ने सरकारी सेवा वर्ष 2000 से टांडा मैडिकल कालेज से आरंभ की। वर्ष 2006 में उनका हिमाचल प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा में चयन हो गया। इसके उपरांत उन्होंने शिक्षा, उद्योग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला, आबकारी एवं कराधान विभाग में अनुभाग अधिकारी एवं सहायक नियंत्रक के रूप में सेवा प्रदान की। वर्तमान में वह पीजीआई चंडीगढ़ में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत।
हिमाचल के मरीजों के लिए चंडीगढ़ में फरिशते
राकेश कुमार सिंह की गिनती ऐसे युवा अधिकारी के तौर पर होती है जो चंडीगढ़ में पहुंचने वाले हिमाचल प्रदेश के मरीजों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए व्यवस्था करने के लिए वे अक्सर अपने निर्धारित सेवा समय के बावजूद पीजीआई में उपस्थित मिलते हैं।

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