पिता के सपने में बेटों ने भरे रंग बिना कोई दान लिए शाहपुर के दुर्गम इलाके में बनवा दिया भव्य मंदिर

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पिता के सपने में बेटों ने भरे रंग, बिना कोई दान लिए शाहपुर के दुर्गम इलाके में बनवा दिया भव्य मंदिर, उड़ीसा के कारीगरों के हुनर का कमाल
शाहपुर से राजीव पटियाल की रिपोर्ट

कौन कहता है कि आसमां में सुराख़ नहीं होता। एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। दुष्यंत कुमार की गजल , “पलको से शहतीर उठा लो यारो” की उपरोक्त पंक्तियों को चरितार्थ किया है ,शाहपुर उपमंडल के गांब रुलेहड़ के बाशिंदे विजयकुमार ने। विधानसभा शाहपुर के दुर्गम क्षेत्र धारकंडी का एक गांव है रुलेहड़ , ग्राम पंचायत बोह से सटा हुआ यह गांव भोगौलिक दृष्टि से भी दुर्गम की श्रेणी में आता है , 130 परिवारों के इस गांव के बाशिंदे पंडित पृथ्वी चंद सपुत्र स्व० श्री जयवंत की अभिलाषा जागृत हुई कि अपनी कुलदेवी का मंदिर यहां बनाया जाये. अपने इस विचार को अमलीजामा पहनाने के लिये पंडित जी जुट गये निर्माण स्थल को समतल करने में , चूँकि इलाका दुर्गम था और बड़े – बड़े पत्थरों से अटा पड़ा था, मात्र एक गैंती और झब्बल के साथ पंडित पृथ्वी चंद पहाड़ को समतल करने में जुट गये.

ऐसे सच हुआ सपना

समय बीतता रहा, आस पड़ोस के लोग भी कभी कभार श्रमदान करने आ जाते और धीरे – धीरे जगह साफ़ होती गई , अभी मंदिर की नींव ही रखी गई थी कि विधाता ने पंडित पृथ्वी चंद को अपने पास बुला लिया। पिता के स्बर्गबास के बाद उनकी इच्छापूर्ति का दायित्व अब बेटों पर आन पड़ा। पिता के सपने को साकार करने में दोनों बेटे जुट गए हालंकि परिवार की आर्थिक स्थिति कोई बहुत अच्छी न थी, पर पिता के अधूरे काम को मनोयोग से पूरा करना उनकी प्राथमिकता बन गई.

भाइयों के प्रयास हुए सफल

ओम प्रकाश वन विभाग में वनरक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं, तो दूसरे बेटे विजय कुमार का पालमपुर सब्जी मंडी में आढ़त का कारोबार है. पिता की इच्छा पूर्ण करने के जनून को लिए विजय कुमार मंदिर निर्माण के लिये बेहतरीन कारीगर ढूंढने में लग गए और उनकी तलाश पूरी हुई उड़ीसा के कारीगरों पर। जमीन पिता समतल कर चुके थे. बेटों ने कारीगरों को भव्य मंदिर बनाने का जिम्मा दे दिया , और नतीजा आज सबके सामने है.

बिना दान के बना मंदिर

इस मंदिर निर्माण के लिए न कोई दान लिया गया, न ही किसी सरकारी तंत्र की नजरें इनायत हुई। पंचायत स्तर पर सड़क को मुख्य मार्ग से मंदिर तक जरूर पहुंचा दिया गया है , लेकिन लोक निर्माण विभाग यदि इस सड़क को अपने अधीन ले ले तो इस इलाके की सुंदरता को चार चांद लग जाएंगे.पर्यटन की दृष्टि से यह इलाका बेहद मनमोहक और पर्यटकों को आकर्षित करता है , प्रसिद्ध “खबरू” झरने का रास्ता भी यही से गुजरता है।

पर्यटन को तब लगेंगे पंख

इसी विधानसभा के पर्यटन मंत्री के रूप में मेजर मानकोटिया कई बार इस इलाके की पर्यटन क्षमताओं का जिक्र कर चुके हैं , लेकिन धारकंडी की इस तस्वीर में रंग आज तक नहीं भरा गया। यदि सरकार की नजरें इनायत हो, मंदिर के सामने की जगह को समतल किया जाए, पंचायत द्वारा निर्मित सड़क का जीर्णोद्बार किया जाये तो निश्चित रूप से धार्मिक पर्यटन को पंख लग जायेंगे. आवश्यकता है एक जनून की, लोकहित में कुछ कर गुजरने की।


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