पालमपुर के घुग्गर की संजू पॉल ने हुनर से दुनिया भर मेंं बनाई पहचान, विज्ञान व साहित्य दोनों में स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योगदान

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पालमपुर के घुग्गर की संजू पॉल ने हुनर से दुनिया भर मेंं बनाई पहचान, विज्ञान व साहित्य दोनों में स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योगदान
कुल्लू से विनोद भावुक की रिपोर्ट
इस प्रेरककथा की नायिका है कांगड़ा जिला के पालमपुर उपमंडल के छोटे से गांव घुग्गर की संजू पॉल। पशुपालन विभाग में सहायक निदेशक डॉक्टर संजीव कुमारी पॉल का साहित्यिक नाम संजू पॉल है। वर्तमान में कुल्लू जिला के बजौरा की निवासी संजू पॉल की पहचान एक लेखक-, कलाकार और पशु- चिकित्सा विशेषज्ञ के तौर है। संजू पॉल विज्ञान व साहित्य दोनों विधाओं में स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का योगदान दे रहीं हैं। हिंदी, अंगे्रजी के अलावा पहाड़ी भाषा में भी उनकी जबरदस्त कमांड है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी संजू पॉल ने रेखांकन और पेंटिंग पर भी कार्य किया है, जिसमें वेस्ट पी वी सी शीटस को काव्र्ड पेंटिग के रूप में विकसित किया है। उन्होंने एक शॉट फिल्म ‘कैथारिस’ का निर्माण किया है जो अपने संघर्षों को सुलझाने के लिए अपनी कला के माध्यम से खुद से संवाद करने की कथा है। कुल्लू के जुड़वा बच्चों अपूर्वा और प्राची के दमदार अभिनय से सजी कहानी का फिल्मांकन कुल्लू के कमलकांत ने किया है।
एंटी रेबीज़ कैम्पेन के लिए एजुकेशन मैटीरियल डिवैल्प-
संजू पॉल ने ब्रिटिश फायब्रायड ट्रस्ट और आई एस आई एस न्यूज़ के लिए अंग्रेज़ी हिंदी अनुवादक का भी कार्य किया है। ब्रिटेन की वैटप्रो नामक वैबसाईट के लिए कई आलेख लिखे हैं, जिनमें वैटनरी से संबधित टैक्निकल लेख व छोटी कथायें शामिल हैं। उन्होंने एंटी रेबीज़ की अंतर्राष्ट्रीय कैम्पेन के लिए एजुकेशन मैटीरियल डिवैल्प किये हैंर्। Zoological Information Management System नाम के ग्लोबल प्रोजेक्ट में भी उनके इनपुट्स शामिल हैं।
इंडोनेशिया, थायलैंड के विश्वविद्यालयों तक संजू पॉल की कविताएं –
संजू पॉल ने सैंकड़ों कवितायें लिखी हैं। उनकी कुछ कविताएं इंडोनेशिया, थायलैंड के विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में उपयोग हुई हैं। संजू पॉल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्य व कला विषयों पर प्रस्तुति, पोयट्री व टीचिंग वर्कशाप्स और कला और साहित्य की परियोजनाओं पर लगातार सक्रिय हैं। संजू पॉल ने स्कूली विद्यार्थियों से लेकर पक्के अनुभवी लेखकों- व कलाकारों के साथ रचनायें सृजित की हैं, जिनमें दुनिया के कई कोनों से लोग शामिल हैं। प्रख्यात कलाकार स्लोबोदान दान पायच ने संजू की शैडो स्टोरी तस्वीरों के लिये कहा है-
Magnificent, meaningful, like a Sufi story.
Like poems of Rabia of Basra or Mirabai.
शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में कविता
प्रख्यात शिक्षाविद, लेखक व संगीतकार डा. स्टीफन कोनलोन ने संजू की कविताओं को medicinal garden of words की संज्ञा दी है, उन्होंने संजू द्वारा बूंदों पर की गई फोटोग्राफी पर एक गीत कम्पोज़ किया है जिसे कि प्रथम बार थायलैंड में पोयट्री यूनिवर्स नामक कार्यक्रम में गाया गया था। संजू की एक कविता हिमाचल शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में भी प्रयोग हुई है। स्ट्रैंथन दाय सोल एक्सपैरिमैंटल पोयट्री पर आधारित एकल काव्य संग्रह है। मैंटर दाय माईंड में संजू ने इंडोनेशिया की पुरवंती कुसुमंगतयास तथा भूटान के बल बहादुर भंडारी के साथ काम किया है। स्माईल दाय सौरोज़ और प्रिज़्रव दाय पीस पोयट्री प्रोजैक्टस पर आधारित किताबें है जिनमें संजू पॉल ने विभिन्न देशों के विद्यार्थियों, अध्यापकों, लेखकों व कलाकारों के साथ काम किया है।
पहाड़ की प्रतिभा पर नाज
शिक्षक दंपति के घर 21 दिसंबर 1971 को पैदा हुई संजीव कुमारी की स्कूली शिक्षा की शुरूआत चांद पब्लिक स्कूल घुग्गर से हुई और जमा दो मेडीकल की पढ़ाई डीएवी कॉलेज कांगड़ा से की। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वेटनरी कॉलेज पालमपुर से वेटनरी सांइस में स्नात्कोतर की पढ़ाई की है। कॉलेज के दिनों से ही संजू वैज्ञानिक और साहित्यकार के तौर पर पहचान बनाने लगी थीं। उनका चयन पशुपालन विभाग में हुआ और आजकल वह पशुपालन विभाग में सहायक निदेशक हैं। उनके पति पशुपालन विभाग में अधिकारी हैं। बहुमुखी प्रतिभाशाली, योग्य, साधारण, गम्भीर, मददगार स्वभाव तथा संवेदनशील कवयित्री संजू पॉल पर हिमाचल प्रदेश को गर्व है।

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