पालमपुर की बहू, दुबई में कंपनी की मालिक

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सार्थक सोच – पालमपुर की बहू, दुबई में कंपनी की मालिक, खाड़ी में लैदर प्लाजा कंपनी स्थापित कर उद्यमी बनीं रितू पठानिया की प्रेरकगाथा
दुबई से सुखदेव सिंह की रिपोर्ट

बीस साल पहले अपने पति के साथ पालमपुर से दुबई आई रीतू पठानिया ने शुरुआती दिनों में एक बेटी की मां होने के बावजूद पति को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए जंबो नामक कंपनी में काम किया। इसी दौरान खुद का कारोबार स्थापित करने की रितू की हसरत हिलौरे मारती रही। बेहतरीन प्रबंधन के दम पर रितू पठानिया ने दुबई में अपनी लैदर प्लाजा नामक कंपनी स्थापित कर साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई बाधा आड़े नहीं आती। आज उनके पति दुबई में खुद का कारोबार करते हैं, वहीं रितू पठानिया अपनी कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में जुटी है। रितू पठानियां की दो बेटियां अपूर्वा परमार और रुद्राणी हैं। मेहनत के दम पर कारोबार स्थापित कर यह परिवार दुबई में खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा है।

धर्मशाला-चंडीगढ़ से पढ़ाई


रितू पठानिया का जन्म पिता रोहित पठानिया व माता चंद्रकांता के घर हुआ। पिता कॉऑप्रेटिव सोसायटी में अतिरिक्त रजिस्ट्रार और माता सीनियर सैकेंडरी स्कूल ब्याय धर्मशाला में सेवाएं दे रही थी। माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी में कार्यरत होने की वजह से रितू का बचपन दादा-दादी के साथ ज्यादा बीता। रितू ने माता-पिता के साथ उस समय रहना शुरू किया, जब वह कंडाघाट के स्कूल में पढ़ती थी। बाद में परिजन धर्मशाला शिफ्ट हो गए। रितू ने दसवीं तक की पढ़ाई धर्मशाला, जबकि स्नात्तक की पढ़ाई चंडीगढ़ से की है। रितू ने कंप्यूटर में भी डिग्री की है।

आईबीएम से जॉब ऑफर


रितू ने कुछ समय के लिए बतौर इंग्लिश लेक्चरार भी सेवाएं दी, मगर शुरू से ही वह खुद का बिजनेस करना चाहती थी। कंप्यूटर की शिक्षा ग्रहण करने के बाद ही रितू की शादी पालमपुर के नरेश परमार से हुई। इस दौरान रितू को आईबीएम कंपनी से जॉब ऑफर मिला और उसने बेंगलुरु से कॉरपोरेट मार्किंटिंग से अपने कैरियर की शुरुआत की। बाद में परिवार के दुबई शिफ्ट होने के चलते रितू ने जंबो कंपनी में सेवाएं दीं।

सामाजिक जिम्मेदारियों का एहसास

दुबई में हिमाचल के बशिंदों की ओर से हर साल आयोजित किए जाने वाले रक्तदान शिविर के पीछे रितू की ही सोच है। शिविर में हिमाचल से संबंध रखने वाले १०० से रक्तदाता रक्तदान करते हैं। रितू की सार्थक सोच का नतीजा था कि दुबई में सफल रक्तदान शिविर नियमित आयोजन बन गया है। इसके लिए रितू कैंपेन चलाती है। रितू का कहना है कि समाजिक कार्यों में हिस्सेदारी की सीख उसे दादा-दादी और माता-पिता से मिली है।


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