पांच सदी पहले बेबे नानकी का बनाया पहला चंबा रुमाल होशियारपुर के एक गुरूद्वारे में  सहेज कर रखा, लंदन के विक्टोरिया अल्बर्ट म्यूजियम में संरक्षित तीन सदी पुराना चंबा रुमाल  

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पांच सदी पहले बेबे नानकी का बनाया पहला चंबा रुमाल होशियारपुर के एक गुरूद्वारे में  सहेज कर रखा, लंदन के विक्टोरिया अल्बर्ट म्यूजियम में संरक्षित तीन सदी पुराना चंबा रुमाल  

 

चंबा से मनीष वैद की रिपोर्ट

 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश के चंबा की ललिता वकील को कला क्षेत्र में पद्मश्री अवार्ड देने की घोषणा की है। पांच दशक की कठोर साधना से पांच सौ साल पुरानी चंबा रुमाल की हस्तकला को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने वाली चोंतडा मोहल्ला निवासी ललिता वकील को इससे पहले भी कई राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं। जिस चंबा रुमाल की विरासत को सहेजने के लिए ललिता वकील पद्मश्री मिलने जा रहा है, आइये जानते हैं ‘दो रूखे’ टांके की कढाई की अनूठी हस्तकला वाले चंबा रुमाल के इतिहास के बारे में।

 

बेबे नानकी ने बनाया था पहला चंबा रुमाल

इतिहास में वर्णन है कि सोलहवीं शताब्दी में गुरु नानक देव जी की बहन बेबे नानकी ने बनाया था। यह रुमाल आज भी होशियारपुर के एक गुरुद्वारे में धरोहर के रूप में सहेज कर रखा गया  है। 17वीं सदी में राजा पृथ्वी सिंह ने चम्बा रुमाल की हस्तकला को संवारने और निखारने में अहम् भूमिका अदा की और चंबा रुमाल पर ‘दो रुखा टांका’ कला शुरू की। उनके राज में चंबा रियासत में न केवल आम जनता चंबा रुमाल बनाती थी, बल्कि राज परिवार की महिलायें भी चंबा रुमाल की कढ़ाई में माहिर होती थीं।

 

लंदन के विक्टोरिया अल्बर्ट म्यूजियम में चंबा रुमाल

The President, Shri Ram Nath Kovind presenting the Nari Shakti Puruskar for the year 2018 to Ms. Lalita Vakil, on the occasion of the International Women’s Day, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on March 08, 2019.

18वीं शताब्दी में चंबा के बहुत से हस्तशिल्पी चंबा रुमाल बनाने की कला में पारंगत हो गए थे। राजा उमेद सिंह ने चंबा रुमाल की हस्तकला और हस्तशिल्पियों को संरक्षण दिया और चंबा रुमाल की कला विदेशों तक पहुंची। राजा गोपाल सिंह ने सन 1883 में कुरुक्षेत्र युद्ध की कृतियों वाला चंबा रुमाल ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधियों को भेंट किया था, जिसे लंदन के विक्टोरिया अल्बर्ट म्यूजियम में सहेज कर रखा गया है। साल 1911 में चंबा के राजा भूरी सिंह दिल्ली दरबार में ब्रिटिश क्राउन को चंबा रुमाल तोहफे में दिए थे। चंबा रुमाल के हस्तशिल्प के संरक्षण में राजा भूरी सिंह की भूमिका भी अहम् रही।


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