पदमश्री से सम्मानित कांगड़ा के डॉक्टर बाप- बेटे की जोड़ी, पहले पिता रहे एम्स दिल्ली के डीन, अब बेटा उसी संस्थान का डायरेक्टर

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पदमश्री से सम्मानित कांगड़ा के डॉक्टर बाप- बेटे की जोड़ी, पहले पिता रहे एम्स दिल्ली के डीन, अब बेटा उसी संस्थान का डायरेक्टर
कांगड़ा से विनोद भावुक की रिपोर्ट
इस प्रेरककथा में आपको मिलवा रहे हैं कांगड़ा के डॉक्टर बाप- बेटे की एक ऐसी जोड़ी से जिन दोनों को चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान देश के प्रितिष्ठित पदमश्री से सम्मानित किया गया है। यह भी संयोग ही है कि पहले पिता जिस एम्स दिल्ली के डीन रहे, अब उनका इकलौता बेटा उस संस्थान का डायरेक्टर है। भारत के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में पहचान रखने वाले डॉक्टर रणदीप गुलेरिया को भारत सरकार ने साल 2015 गणतंत्र दिवस के अवसर पर पदमश्री से सम्मानित किया है। कम ही लोगों को जानकारी होगी कि रणदीप गुलेरिया के पिता एम्स दिल्ली के सेवानिवृत प्रोफ़ेसर एवं डीन डॉक्टर जगदेव सिंह गुलेरिया को भी बहुत पहले उनकी सेवाओं के लिए पदमश्री से सम्मानित किया जा चुका है। हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव की बात यह है कि चिकित्सकों के इस परिवार का संबंध प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा से है।
आईजीएमसी शिमला के सितारे रणदीप गुलेरिया
5 अप्रैल 1959 को कांगड़ा में पैदा हुए रणदीप गुलेरिया ने साल 1975 में दिल्ली के प्रतिष्ठित सैंट कोलुम्ब्स स्कूल से पढाई करने के बाद आईजीएमसी शिमला से चिकित्सा में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) चंडीगढ़ से सामान्य चिकित्सा में एमडी और पल्मोनोलॉजी में डीएम की है। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली से ‘मेडिसिन इन द पल्मोनोलॉजी,क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन’ में डॉक्टरेट की है।
पीजीआई चंडीगढ़ से कैरियर की शुरुआत
1984 से 1992 तक रणदीप गुलेरिया ने पीजीआई चंडीगढ़ में एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर के रूप में सेवाएं दीं और बाद में डिपार्टमेंट ऑफ़ पल्मोनोलोजी एंड स्लीप डिसऑर्डर विभाग के हेड बन गए। साल 2011 में उन्होंने एम्स दिल्ली में सांस की बीमारियों और नींद की दवा के लिए भारत का पहला केंद्र स्थापित करने के अहम भूमिका अदा की। वे साल 1998 के से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तिगत चिकित्सक रहे। साल 2017 में डॉ. रणदीप गुलेरिया एम्स दिल्ली डायरेक्टर बने। उनकी पत्नी डॉ. किरण गुलेरिया स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं।
इन्डियन नेशनल टास्क फ़ोर्स कोविड 19 के सदस्य
डॉ. रणदीप गुलेरिया कोविड 19 से निपटने के लिए बनी इन्डियन नेशनल टास्क फ़ोर्स के सदस्य हैं। वे इन्फ्लूएंजा टीकाकरण के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा गठित वैज्ञानिक सलाहकार समूह (SAGE) के एक सदस्य हैं। वह एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया, इंडियन चेस्ट सोसाइटी और नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य हैं। वह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), वियना में विकिरण सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर एक सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं।
सांस संबंधी रोगों पर शोध का श्रेय
डॉ. रणदीप गुलेरिया को सांस संबंधी रोगों पर शोध का श्रेय दिया जाता है। उनके शोध निष्कर्ष 36 पुस्तकों और 268 लेखों के माध्यम से दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 117 को एक ऑनलाइन ज्ञान भंडार ‘रिसर्चगेट’ में प्रकाशित किया गया है। वे राज नंदा ट्रस्ट और रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन, यूके से राज नंदा पल्मोनरी डिजीज फैलोशिप प्राप्तकर्ता हैं। वे नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (NAMS) के एक निर्वाचित सदस्य हैं। वे ‘इंडियन जर्नल ऑफ चेस्ट डिजीज, लंग इंडिया, जेएएमए: द जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन और चेस्ट इंडिया सहित कई मेडिकल जर्नल के संपादकीय बोर्डों के सदस्य हैं। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा प्रतिष्ठित चिकित्सा के तहत वर्ष 2014 के लिए प्रतिष्ठित डॉ. बी सी रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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