न मुकद्दर पर अफसोस, न हालात पर आक्रोश, संघर्ष से सफल हुईं ‘संतोष’

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न मुकद्दर पर अफसोस, न हालात पर आक्रोश, संघर्ष से सफल हुईं ‘संतोष’
शाहपुर से विनोद भावुक की रिपोर्ट
बेशक संतोष शर्मा आज एक सक्सेस वुमन हों और टीचिंग, पीआर, होटलियर इंडस्ट्री, ज्योतिष और लेखन में अपनी ख़ास पहचान रखती हों, लेकिन एक वह भी वक्त था जब यह सिंगल वुमन 25 साल की उम्र में दो बच्चों की परवरिश के लिए कड़ा संघर्ष कर रही थी। संतोष की बात यह है की संतोष ने संघर्ष से न केवल अपने दोनों बच्चों को उच्च शिक्षित कर पैरों पर खड़ा किया बल्कि उनकी शादियां कर अब नानी – दादी की भूमिका निभा रही है. महज 17 साल की उम्र में लव मैरिज कर 25 साल की उम्र में दो बच्चों की मां बनने के बाद तालाक की स्थिति का सामना कर खुद को साबित करने वाली शाहपुर की संतोष एक सफल व्यवसायी के तौर पर खुद को साबित कर चुकी हैं और आज उनके पास जीवन की हर एक सुविधा है। संतोष का बेटा जहां सरकारी नौकरी में है, वहीं बेटी शिमला में वकालत करती है, दोनों बच्चे विवाहित हैं।
छोटी उम्र में बड़ी परीक्षा
संतोष शर्मा उन दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि एक लडक़ी जिसने कच्ची उम्र में एक युवक से मुहब्बत की ओर 17 साल की उम्र में उसके साथ प्रेम विवाह रचाकर घर गृहस्थी को संभालने में जुट गई। चार भाई- बहनों वाले परिवार की सबसे बड़ी बेटी की जिद के चलते बेटी के प्रेम विवाह के फैसले को कारोबारी पिता और शिक्षिका मां ने मूक सहमति दे दी। वह एक बेटी और एक बेटे की मां बन गई। बच्चे स्कूल जाने लगे तो नर्सरी टीचर ट्रेनिंग की। पति- पत्नी के संबंधों में तकरार इस कद्र बढ़ी कि 25 साल की उम्र में खुद पति से तालाक ले लिया और बच्चों संग मायके आ गई। संतोष कहती हैं कि कभी जिस शख्स से प्रेम विवाह किया था, तालाक के दस दिन बाद ही उसने दूसरी शादी कर ली।
दो बच्चों संग मायके में पनाह
संतोष बताती हैं कि मुसीबत के असली दिन तो अब शुरू हुए।कल तक जो सगे संबंधी अपनेपन की दुहाई देेते थे, तालाक होने पर सब उसके खिलाफ हो गए। कोई रिश्तेदार किसी भी मांगलिक कार्य में नहीं बुलाता। बेटा और बेटी भी पिता का घर छोड़ उसके पास पहुंच गए। दो बच्चों की पढ़ाई और खुद के कैरियर की जिम्मेदारी ऐसी मां पर थी, जो खुद अपने मायके में पनाह लिए हुए थी। हालात से लड़ते हुए फैसला लिया कि आत्महत्या नहीं करनी है। खुद स्टैंड होना है और खुद के बच्चों का कैरियर भी बनाना है।
नर्सरी टीचर से हुई शुरुआत
संतोष बताती हैं कई शुरुआती करीब तीन साल एक स्थानीय स्कूल में नर्सरी टीचर सेवाएं दीं। इससे भी बच्चों की पढ़ाई का खर्च चलना मुश्किल लगा तो एक कंपनी में बतौर जन सूचना अधिकारी काम करना शुरू किया। संतोष शर्मा कहती हैं कि जिस उम्र में अमूमन लड़कियों की शादी होती है, उस उम्र में वह तालाकशुदा थी और दो बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी सिर पर थी। जिंदगी में कई कड़वे अनुभव बस इसी से समझ लो कि कमजोर औरत को मर्द ही नहीं औरतें भी टॉर्चर करने में पीछे न हीं रहती।
कारोबार में खुद को साबित किया
संतोष शर्मा की जिंदगी का बड़ा हिस्सा संघर्ष में गुजरा है। इस दौरान उन्होंने होटल उद्योग, कॉन्ट्रैक्टरशिप और ज्योतिष के क्षेत्र में सफर पारी खेली है
उसके पास आज जीवन की तमाम सुविधाएं हैं। मायके में रहने को मजबूर होने वाली संतोष शानदार बंगले की मालिक है और उनके पास एक्सक्यूटिव कार है। संतोष ने दोनों बच्चों को उच्च शिक्षित कर रोजगार के काबिल बनाया है और दोनों की शादियां कर उनकी गृहस्थी बसा दी है।
नानी – दादी के रोल में संतोष
नानी और दादी के रोल में अब संतोष को किसी से कोई शिकवा नहीं है। जिंदगी के कड़वे अनुभवों से गुजरी संतोष बेशक आज सफल नारी हैं, लेकिन उनका कहना है कि औरत को अपने दांपत्य जीवन को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करनी छाइये। वे कहती हैं कि जीवन में कई उतार- चढ़ाव आते हैं, ऐसे में किसी भी छोटी तकरार पर अगल होने का फैसला बचकाना होता है। बच्चों के लिए पिता की बहुत अहमियत होती है। इसलिए परिवार को तोडऩे से बचाने की हर संभव कोशिश होनी चाहिए।

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