नौकरी करते हुए की डिग्री, डेलीवेज से कैरियर की शुरुआत कर अधीक्षण अभियंता बनने वाले केके शर्मा की प्रेरककथा

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नौकरी करते हुए की डिग्री, डेलीवेज से कैरियर की शुरुआत कर अधीक्षण अभियंता बनने वाले केके शर्मा की प्रेरककथा
कुल्लू से आरती ठाकुर की रिपोर्ट
इस प्रेरककथा के नायक एक ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने टाटपट्टी वाले सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर अपनी प्रतिभा से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और डेली वेज काम करते हुए इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। उनके पिता अपने समय के क्षेत्र के सबसे ज्यादा पढ़े- लिखे व्यक्ति थे। शास्त्री के रूप में मशहूर पिता का स्कूल अध्यापक से लेकर कॉलेज प्रोफ़ेसर तक बनने का संघर्ष बेटे के लिए प्रेरक बना। उन्हें इस बात का कतई मलाल नहीं कि डिग्री करने के बावजूद उन्हें सालों पदोन्नति का लाभ नहीं मिला, बल्कि इस दौरान जो निर्माण कार्य की बारीकियां सीखने का अनुभव मिला उसे अपनी खुशकिस्मती मानते हैं। काम के प्रति अनुशासनहीनता कतई बर्दास्त नहीं, ऐसा होने की सूरत में उनकी छवि एक गुस्सेल अफसर की है, लेकिन उनके व्यक्तित्व का दूसरा पहलू यह है कि अनमोल जीवन को बचाने के लिए नियमित रक्तदान करते हैं और मुख्यमंत्री राहत कोष सहित सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाली कई संस्थाओं के लिए नियमित आर्थिक अंशदान करते हैं। कम की लोग जानते हैं कि वे कई जरूरतमंदों की चुपचाप मदद करते हैं। आपको मिलवा रहे हैं हम अधीक्षण अभियंता के के शर्मा से।
डेली वेज सर्वेयर से अधीक्षण अभियता तक का सफर
डेली वेज सर्वेयर के रूप में कैरियर की शुरुआत करने वाले के के शर्मा हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के 6वें सर्कल, कुल्लू के अधीक्षण अभियंता हैं। 9 अप्रैल 2021 को इस सर्कल के 29वें अधीक्षण अभियंता के तौर पर कार्यभार संभाला है। इस सर्कल के तहत कुल्लू जिला और लाहुल- स्पिति जिला के चार डिविजन बंजार, कुल्लू, मनाली और चिनाव वैली शामिल हैं। दोनों जिलों में कई निर्माण कार्य और सड़क परियोजनाएं उनके दिशा –निर्देश में मूर्त रूप लेने को तैयार हैं। अक्तूबर 2023 में सेवानिवृत होने से पहले वह विभाग में अपने काम से अपनी अमित छाप छोडने की दिशा में अग्रसर हैं।
कई निर्माण कार्य और सड़क निर्माण में छाप
के के शर्मा को बतौर जूनियर इंजीनियर गैमन इंडिया कंपनी की और से निर्मित कुल्लू के रामशिला पुल के निर्माण कार्य को करवाने का अवसर मिला जो साल 2005 में बन कर तैयार हुई। ब्यास नदी पर बना यह पुल सिविल इंजीनियरिंग का शानदार कमाल है। कुल्लू की लग्ग घाटी में गिरे हुए पुल के पुनर्निर्माण और उसके बाद घाटी में सड़क निर्माण उनके खाते में बड़ी उपलब्धि है। कुल्लू के चार मंजिला देव सदन के काम को मार्च 2007 में शुरू कर अक्टूबर में रिकॉर्ड समय में पूरा करने का श्रेय उन्हें ही जाता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सिराज और द्रंग विधानसभा क्षेत्र में बनी कई सड़कें उनके खाते में हैं।
जॉब करते हुए की इंजीनियरिंग की डिग्री
मंडी जिला के सरकाघाट तहसील के गांव मौहिं में पिता श्री ज्ञान चंद शर्मा और मां कौशल्या देवी के घर चौथी एवं के रूप में 7 अक्तूबर 1965 को पैदा हुए के के शर्मा एक बहन और तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनकी आरम्भिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से शुरू हुई। पिता की नौकरी के चलते उनकी आगे की स्कूली शिक्षा बिलासपुर और मंडी के विजय हाई स्कूल से हुई। साल 1980 में विजय हाई स्कूल से दसवीं करने के बाद उन्होंने साल 1982 में वल्लभ कॉलेज मंडी से प्री इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने रिजनल इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश के लिए होने वाली लिखित परीक्षा पास की, लेकिन साक्षात्कार में चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। साल 1985 में सरकारी पॉलटेक्नीकल कॉलेज अमृतसर में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग इंडिया की ओर से आयोजित होने वाली डिग्री स्तर की एएमआईई परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और जॉब करते हुए साल 1989 में यह डिग्री हासिल की।
कैरियर के मील पत्थर
के के शर्मा ने अपने इंजीनियरिंग के कैरियर की शुरुआत बतौर डेली वेज की और 1985 से लेकर 1988 तक शुरुआती तीन साल डेली वेज सर्वेयर के तौर काम किया डेली काम किया। 9 मई 1988 को लोक निर्माण विभाग के धर्मपुर सब डिविजन में बतौर जूनियर इंजीनियर उनकी पहली स्थाई नियुक्ति हुई। वह साल 2008 में एसडीओ प्रमोट हुए। एएमआईई से सम्बंधित फैसले का सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आने के बाद साल 1997 से बैक सिनियोरिटी मिली और 8 मई 2013 को अपनी जॉब के पूरे 25 साल बाद वे अधिशाषी अभियंता पदोन्नत हुए। 9 अप्रैल 2021 को लोकनिर्माण विभाग के 6वें सर्कल, कुल्लू में बतौर 29वें अधीक्षण अभियंता के तौर पर कार्यभार संभाला। अपने 33 साल की कार्यकाल के दौरान उन्होंने धर्मपुर, बीबीएनडी, बालीचौकी, गोहर, मंडी, पधर, कुल्लू, बंजार, गोहर, कटराई में सेवाएं प्रदान की हैं।
पिता की राह पर दोनों बेटियां इंजीनियर
माता- पिता के के शर्मा के आदर्श हैं। बेशक दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्शों और उनसे मिली सीख को वे अपनी सबसे बड़ी ताकत और पूंजी मानते हैं। उनका परिवार साल 2005 में कुल्लू के शमशी में बस गया हैं। उनकी पत्नी श्रीमति तेजिन्द्र शर्मा स्कूल कैडर में प्रींसिपल हैं। उनकी दो बेटियां हैं और दोनों इंजीनियर्स हैं। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बेटी जो कंप्यूटर इंजीनियर हैं और एक कॉर्पोरेट कंपनी में सेवाएं प्रदान पर रही हैं।

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