निर्धारित समय से चार साल पहले सड़क बनाने पर मिला स्टेट अवार्ड, मनरेगा में सबसे ज्यादा सड़कें बनाने का रिकॉर्ड, दिहाड़ीदार स्टूडेंट से सहायक अभियंता तक के सफर की प्रेरककथा

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निर्धारित समय से चार साल पहले सड़क बनाने पर मिला स्टेट अवार्ड, मनरेगा में सबसे ज्यादा सड़कें बनाने का रिकॉर्ड, दिहाड़ीदार स्टूडेंट से सहायक अभियंता तक के सफर की प्रेरककथा
मंडी से सत्य प्रकाश की रिपोर्ट
स्पीति घाटी में विपरीत भौगोलिक परिस्थियों के बावजूद बतौर कनिष्ठ अभियंता अतगू – भाभा सड़क का काम निर्धारित समय से चार साल पहले पूरा करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के हाथों स्टेट अवार्ड से सम्मानित चमन लाल चंदेल के नाम मनरेगा में भी सबसे ज्यादा सड़कें बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है. लोकनिर्माण विभाग में चमन लाल चंदेल की गिनती अपनी कार्यशैली की वजह से ख़ास पहचान बनाने में अफसरों में होती है. वे जहां भी कार्यरत रहे हैं, अपने काम से अपनी छाप छोड़ कर आये हैं. वे हमेशा अपने काम के प्रति समर्पित रहने वाले अधिकारी हैं और काम की गुणवता उनकी पहली प्राथमिकता रहती है. वर्तमान में वे पीडब्ल्यूडी नेशनल हाईवे शाहपुर में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत हैं.
एडमिशन के लिए एक साल की मजदूरी, बेची सब्जी
मंडी जिला के द्रंग विधानसभा क्षेत्र की कटिंडी पंचायत के बरनाला गांव के निरक्षर साधारण किसान स्वर्गीय नारायण दास के छह बच्चों में तीसरे नम्बर पर साल 1970 में पैदा हुए चमन लाल की प्राइमरी की पढ़ाई कमांद सरकारी स्कूल से शुरू हुई और हाई स्कूल कटिंडी से साल 1986 में 65% अंकों के साथ मैट्रिक की परीक्षा पास की. परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि बेटे की आगे की पढ़ाई का प्रबंध हो पाता. इस पर चमन लाल ने आगे पढ़ाई जारी रखने के बजाये पढ़ाई के लिए पैसा जोड़ने के लिए उस समय क्षेत्र में तैनात बीट ऑफिसर छवि राम शर्मा की सलाह पर फारेस्ट नर्सरी में 12 रुपए दिहाड़ी पर काम किया और अतिरिक्त समय में सब्जी उगाकर बेची. सारे पैसे को बैंक खाता खोल कर जमा करवाता रहा. एक साल के अन्दर उसके खाते में इतना पैसा जुट गया था कि वह किसी शिक्षण संस्थान में एडमिशन ले सकता था.
उच्च शिक्षा, केम्पस प्लेसमेंट से मिली जॉब
साल 1987 में चमन लाल को महाराष्र्े के कोल्हापुर के एक कॉलेज में पोलटेक्नीकल डिप्लोमा के लिए दाखिला मिल गया. उन्होंने यह तीन साल का डिप्लोमा कॉलेज में सेकेंड रह कर पूरा किया और साल 1991 में महाराष्ट्र के ही एक संस्थान में बीटेक सिविल में दाखिला मिल गया. साल 1993 में डिग्री करने से पहले ही केम्पस प्लेसमेंट के तहत उनका चयन जर्मन कंपनी सीमेंस में हो गया. इसके बावजूद अपनी पढ़ाई जारी राखी और साल 1996 में उन्होंने शिवाजी यूनिवर्सिटी से एमबीए मार्केटिंग एंड प्रोडक्शन किया.
अपने काम से बनाई पहचान
दिसंबर 1996 में चमन लाल की नियुक्ति हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग में बतौर ग्रेजुएट जेई हुई और आरईसी हमीरपुर में पहली नियुक्ति हुई. साल 1999 में उनका तबादला फतेहपुर सब डिविजन में हुआ और एक साल बाद स्पीति डिविजन में भेजे गए. यहां एक सड़क निर्माण को रिकॉर्ड समय में तैयार करने को लेकर चर्चा में आये और 25 जनवरी 2002 में पूर्ण राज्य्तव दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के हाथों स्टेट अवार्ड मिला. अक्टूबर 2006 तक काजा में सेवायें देने के बाद पधर सब डिविजन के कुन्नु सेक्सन में सात साल सेवाएं दीं. इस दौरान टीम माह के छोटे के कार्यकाल के लिए मंडी प्रथम वृत्त में सेवाएं दीं.
मनरेगा में सड़कें बनाने का रिकॉर्ड
नवम्बर 2013 में चमन लाल को मयियाणा और फिर 24 घंटे के अन्दर ननखड़ी बदल दिया गया. यहाँ साढ़े चार साल के कार्यकाल में कई सड़कों को चौड़ा करने में अहम् भूमिका अदा की. फरवरी 2018 में पधर सब डिविजन में तबादला हुआ. इस दौरान मनरेगा के तहत गांव- गांव तक सड़क बनाने का रिकॉर्ड बना डाला और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए. 10 जून 2020 को चमन लाल को डेपुटेशन पर मार्केटिंग बोर्ड में मंडी नियुक्त किया गया और 2 फरवरी 2021 को उन्हें वापिस विभाग में बुलाकर पीडब्ल्यूडी एनएच शाहपुर भेज दिया.
आदर्शों से समझौता मंजूर नहीं
चमन लाल चंदेल ने एक सड़क हादसे में 20 नवम्बर 2020 को अपनी शिक्षिका पत्नी मंजुला को खो दिया. पेशे से साइंस टीचर कार ड्राइविंग सीख रही थी कि अचानक अनियंत्रित होकर व्हीकल खाई में गिर गया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई. उन तीन लोगों में मंजुला भी शामिल थी. उनका एक बेटा है जो जमा दो की पढ़ाई कर रहा है. चमन लाल चंदेल हैं कि वे विभाग में जहां भी तैनात रहे हैं, अपने पद से न्याय करने का प्रयास किया है. काम की गुणवता के साथ समझौता न करने के चक्कर में उन्हें कई बार राजनीति का भी शिकार होना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया है.

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