कभी किशोरावस्था में हुए थे नशे के शिकार अब नशे से युवाओं को बचाने के लिए कर रहे उपकार

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कभी किशोरावस्था में हुए थे नशे के शिकार, अब नशे से युवाओं को बचाने के लिए कर रहे उपकार, कुल्लू घाटी के पर्यटन कारोबारी पंकी सूद की प्रेरककथा

पंकी सूद कुल्लू के हिमालय नेशनल पार्क की तीर्थन घाटी के युवा पर्यटन कारोबारी हैं। वे तीर्थन नदी के किनारे एक स्टे होम व एक कॉटेज चलाते हैं। हिमाचल प्रदेश के आर्किटेक्चर के अनुसार बनाए गए इस कॉटेज में सैलानियों को हिमाचल की समृद्व लोक संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलता है। पंकी सूंद एडवेंचर ट्रेकिंग में माहिर हैं और पर्यटकों को हिमालय की दुर्गम चोटियों पर ट्रेकिंग और कैम्पिंग करवाते हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि पंकी सूद ने खुद नशे के अंधकार से निकल कर न केवल पर्यटन के अनूठे मॉडल की पहल की, बल्कि नशे की गिरफ़्त में आ चुके घाटी के सैंकड़ों युवाओं के लिए मसीहा बन कर काम कर रहे हैं। वे नशे के आदि युवाओं की काउंसलिंग से लेकर उन्हें नशा मुक्तिकेंद्र में भर्ती करवाने में अहम भूमिका अदा करते हैं।

मौज मस्ती से हुई नशे की शुरूआत

पंकी सूद बताते हैं कि नब्बे के दशक की बात है। उन दिनों सिंथेटिक ड्रग्स कोकीन, एलएसडी, किटमिन, हेरोइन, मैथ आदि भारत में आये ही थे। किशोरावस्था में मौज-मस्ती करते-करते कब इन घातक नशों का आदि बन गया, पता ही नहीं चला। अपने जीवन के अनमोल आठ साल नशे के गर्त में स्वाह कर दिए। दरअसल, हिमालयन नेशनल पार्क के आसपास तीर्थन वैली, पार्वती वैली, कसौल और मलाना ऐसी जैसी हसीन वादियां हैं, जहां बहुत से इजऱायली व अन्य युवा ड्रग्स के इस्तेमाल के लिए खिंचे चले आते हैं। ऐसे ही नशेड़ी विदेशी सैलानियों के संपर्क में आकर मैं नशे का आदि बन चुका था। रोज़ नया नशा ही अच्छा लगने लगा था।

नशे के लिए कुछ भी करने को तैयार

परिवार ने पंकी की नशे की लत छुड़वाने की हर कोशिश करके देख ली। परिवार वालों ने सोचा कि बेटे की शादी हो जाएगी और सिर पर जि़म्मेदारी आएगी तो वह नशा छोड़ देगा। पंकी की शादी कर दी गई। वे एक बच्चे का बाप भी बन गयेू, लेकिन नशे की लत नहीं छूटी। नशे की लत पूरी करने के लिए वे कुछ भी कर सकते थे। यहां तक कि चोरी भी। वेअपने नवजात बच्चे को ढाल बनाकर भी अपनी तलब को पूरा कर लेते थे। उसकी सोचने समझने की शक्तिनष्ट हो चुकी थी। एक दिन नवजात बच्चे के जीवन को कड़ाके की ठंड के दांव पर लगा कर वह नशा करने निकल गया तो परिजनों ने तय किया कि किसी भी सूरत में पंकी को नशे के अंधेरे से बाहर निकालना है।

नशा मुक्तिकेंद्र दिल्ली में उपचार

पंकी के परिजन उन्हे नशे की दलदल से निकालने के लिए दिल्ली के एक नशा मुक्तिकेंद्र में ले गए। 6 माह तक उस केंद्र रहे पंकी को उनके काउंसलर ने बहुत समझाया। पंकी अब स्वयं भी नशे के इस जंजाल से बाहर निकलना चाहते थे। धीरे- धीरे वह सामान्य होने लगे। उन्होंने दृढ़ अपनी दृढ़ इच्छाशक्तिसे अपनी नशे की लत पर काबू पाया। पंकी सूद बताते हैं कि सब बहुत मुश्किल तो बहुत था, लेकिन नामुमकिन नहीं था। नशा मुक्तिकेंद्र से लौटकर उन्हें यह बात समझ आई कि जो युवा नशे की गिरफ़्त में आ जाते हैं, उनसे नफऱत कर उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना आसान है, लेकिन इससे नशे की समस्या तो हल नहीं हो सकती। यहीं से उन्होंने ऐसे युवाओं के लिए काम करने की पहल की।

अब अवेयरनेस प्रोग्राम चलाते हैं पंकी

पंकी बताते हैं कि नशे की जड़ें पहाड़ के समाज में बहुत गहराई तक फैल चुकी हैं। बच्चे स्कूल जाने की उम्र में ही इस बुराई के शिकार हो रहे हैं। उन्हें इससे होने वाले नुकसान के बारे में बताना जरूरी है। अब मैं और मेरी पत्नी कुल्लू और आसपास के इलाकों के स्कूलों में जाकर बच्चों के बीच अवेयरनेस प्रोग्राम चलाते हैं। अब लोग खुल कर इस विषय पर बात करने लगे और ज़रूरत पडऩे पर मदद मांगने के लिए आगे भी आने लगे हैं। पंकी सूद व उनकी पत्नी नशे की चपेट में आए युवाओं को नशे से मुक्तकरने के लिए 250 से ज्यादा परिवारों की मदद कर चुके हैं। पंकी कई बड़े मंचों जैसे टेड टॉक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर जाकर भी युवाओं से संवाद करते हैं।

कई लोग बने मददगार

पंकी को नशा छोड़ फिर से जीवन की नई शुरूआत करने में परिजनों के अलावा और कई लोगों का सहयोग मिला है। उस समय नेहरू युवा केंद्र के मुख्य अधिकारी योगेन्द्र चौधरी ने उन्हें प्रोत्साहित किया, जिससे उन्हें नया जीवन शुरू करने की हिम्मत मिली। पंकी कहते हैं कि नशे के खिलाफ उनकी मुहिम में कुल्लू पुलिस का पूरा सहयोग रहा है। पंकी कहते हैं कि नशे की खातिर जिस हालात से वे गुजरे हैं, कोई दूसरा युवा न गुजरे, उनके जीवन का मिशन है।


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