नगरोटा बगवां की नितिन गिल को अमेरिका में मिला है शान्ति के राजदूत का खिताब, आम घर के युवक की योग, आयुर्वेद और रेक्की टीचर के तौर पर विदेशी धरती पर चमकाने की प्रेरककथा

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नगरोटा बगवां की नितिन गिल को अमेरिका में मिला है शान्ति के राजदूत का खिताब, आम घर के युवक की योग, आयुर्वेद और रेक्की टीचर के तौर पर विदेशी धरती पर चमकाने की प्रेरककथा
धर्मशाला से संजीव कौशल की रिपोर्ट
कांगड़ा जिला के नगरोटा बगवां शहर से संबंध रखने वाले नितिन गिल योग, आयुवेद और रेक्की में महारत के दम पर अमेरिका में अपनी प्रतिभा की चमक दिखा रहे है। वाशिंगटन सिटी की बारमेंट स्टेट में रहने वाले नितिन गिल पिछले 13 सालों से योग, आयुर्वेद और रेक्की टीचर के तौर पर अमेरिका में सामजिक- आर्थिक रूतबा स्थापित करने में सफल रहे हैं।
साल 2001 में स्वामी विवेकानन्द आश्रम से योग का प्रशिक्षण लेने वाले नितिन में ऋषिकेश और बंगलूरू से भी योग, आयुवेद और रेक्की का प्रशिक्षण हासिल किया और साल 2007 में इसी में अपना करियर बनाने और भारतीय जीवन पद्दति का विदेश में परचम लहराने के लिए अमेरिका की उड़ान भरी। नितिन ने एक सफल योग टीचर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। अमेरिकी जेलों और चर्च में सामुदायिक योग सिखाने के सामाजिक कार्य के लिए वाशिंगटन सिटी की तरफ नितिन गिल को ‘अम्बेसडर ऑफ़ पेश’ का प्रमाणपत्र दिया है। नितिन गिल अमेरिका की और से प्रमाणित योग प्रशिक्षक हैं। फर्श से अर्श तक पहुंचने की नितिन गिल की प्रेरककथा में कई टर्निंग पॉइंट हैं।
मैक्लोडगंज के रास्ते अमेरिका का सफर
साल 2001 में स्वामी विवेकानन्द आश्रम से योग का प्रशिक्षण लेने के बाद नितिन गिल ने मैक्लोड़गंज में योग स्टूडियो की स्थापना की। निर्वासित तिब्बत की राजधानी और तिब्बती अध्यात्मिक गुरु दलाईलामा की कर्मभूमि होने के कारण मैक्लोड़गंज में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों का आना होता है।
थोड़े से समय में नितिन विदेशी पर्यटकों में खासे लोकप्रिय हो गए। योग प्रशिक्षक के तौर पर मैक्लोड़गंज में सिक्का जमाने के सात साल बाद नितिन गिल को अमेरिका में योग प्रशिक्षक के तौर पर काम करने का ऑफर मिला और इस तरह साल 2007 में मैक्लोडगंज के रास्ते अमेरिका के सफर की शुरुआत हुई।
फर्श से अर्श तक की यात्रा
नगरोटा बगवां शहर के एमईएस में सेवारत श्री बीरबल गिल मिलिटरी हॉस्पिटल योल में सेवारत उनकी धर्मपत्नी श्रीमती संतोष गिल के घर एक बेटे और दो बेटियों के बाद चौथे और सबसे छोटे बेटे के रूप में 5 जुलाई 1971 को पैदा हुए नितिन गिल की परवरिश बड़े लाड- प्यार में हुई। निम्न मध्यवर्गीय परिवार के इस बच्चे की पढ़ाई शहर के सरकारी स्कूल से शुरू हुई जमा दो बॉयज स्कूल नगरोटा बगवां से की। कोशोरावस्था से ही नितिन योग, आयुर्वेद और अध्यात्म के प्रति आकर्षित हो गए और इसी जिज्ञासा के चलते उन्होंने छोटी उम्र में कई दुर्गम स्थानों की यात्राएं कर कई योगसाधकों और आयुर्वेदाचार्यों की संगत कर इन विधाओं में ज्ञान हासिल किया। अमेरिका में पहुंच कर नितिन ने स्नातक की डिग्री हासिल की और सर्टिफाइड योगा टीचर बने।
नवम्बर में अमेरिका जायेंगे नितिन
कोविड 19 के चलते घर आये नितिन नवम्बर में अमेरिका जायेंगे और फिर से योग प्रशिक्षक के तौर अपनी सेवायें शुरू करेंगे। फोकस हिमाचल के साथ संवाद में नितिन गिल ने बताया कि बेशक अब वह मैक्लोड़गंज में बस गए हैं, लेकिन नगरोटा बगवां से उनका गहरा लगाव है। उन्हें जब भी मौक़ा मिलता है वह अपने बचपन की यादों की खुशबू महसूस करने नगरोटा बगवां पहुँच जाते हैं। स्कूल के दिनों की ढेरों स्मृतियां और लागोटिया यार उन्हें नगरोटा बगवां खींच लाते हैं। अध्यात्म, योग और आयुर्वेद की खोज में अब भी उनको दुर्गम यात्राओं का जुनून है।

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