नंगे पांव स्टिक थाम कर भारतीय महिला हॉकी की ‘सिरमौर’ बनने वाली नाहन की तीन सगी बहनों की प्रेरककथा

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नंगे पांव स्टिक थाम कर भारतीय महिला हॉकी की ‘सिरमौर’ बनने वाली नाहन की तीन सगी बहनों की प्रेरककथा

मंडी से पौमिला ठाकुर की रिपोर्ट

यह प्रेरककथा है एक आम घर में जन्म लेकर अपने खेल के हुनर से ख़ास बनने वाली तीन बेटियों के ख़ास बन जाने की। शायद की कोई आसानी से यकीन करे, लेकिन सच यही है कि तीनों बहनों ने नंगे पांव स्कूल मैदान में खेलने की शुरुआत की और अपने दमदार खेल के दम पर टीम इंडिया का हिस्सा बनीं। नाहन के ऐतिहासिक चौगान मैदान से हाकी की स्टिक थाम कर सुदेश, गीता और सीता ने अपनी खेल प्रतिभा के दम पर खेल के मैदान पर खुद को साबित किया। भारतीय महिला हॉकी के गौरवशाली इतिहास में यह बिरला रिकॉर्ड है कि जब एक ही परिवार की तीन बेटियां एकसाथ भारतीय हाकी कैंप का हिस्सा बनी थीं। सिरमौर के नाहन शहर के स्व. उमराव सिंह व बचनी देवी की तीनों बेटियां सुदेश शर्मा, गीता ठाकुर व सीता गोसाई राष्ट्रीय खिलाड़ी रही हैं। सबसे बड़ी बहन सुदेश शर्मा ने खेल से सन्यास के बाद हॉकी की कोचिंग चुना और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की सीनियर कोच बनी, जबकि गीता ठाकुर और सीता गोसाई भारतीय रेलवे का हिस्सा बनीं।

सबसे ज्यादा छुटकी की चमक

सबसे छोटी बेटी सीता गोसाई ने बड़ी बहनों सुदेश शर्मा व गीता ठाकुर को देखते हुए हुए स्टिक पकड़ी और 13 वर्ष की उम्र में हॉकी के राष्ट्रीय कैंप दस्तक दी। दसवीं के बाद वे आगे पढने चंडीगढ़ चली गई और साई सेक्टर-18 में प्रवेश लिया। सीता ने पंजाब यूनिवर्सिटी से कई बार राष्ट्रीय स्तर पर इंटर यूनिवर्सिटी में शानदार प्रदर्शन किया। साल 1991 में सीता को भारतीय महिला हाकी टीम में प्रवेश मिला। वर्ष 2004 तक वह भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं और वर्ष 1996, 1999 व 2001 में भारतीय महिला हाकी टीम की कप्तान रहीं। सीता गोसाई के नेतृत्त्व में भारतीय महिला टीम ने साल 1998 में एशियन हाकी टीम में सिल्वर मेडल, साल1999 में सीनियर एशिया कप में सिल्वर मेडल तथा मैनचेस्टर में कॉमनवैल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता।

बिरले रिकॉर्ड वाली खिलाड़ी

सीता गोसाई के नाम बिरले रिकॉर्ड जुड़े हैं। वह एशिया की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिनका चयन विश्व एकादश की टीम में हुआ था। इतना ही नहीं, सीता गोसाई दो सालों तक भारतीय महिला व पुरुष हॉकी टीम की मुख्य चयनकर्ता रह चुकी हैं। अर्जुन अवार्ड से सम्मानित सीता गोसाई ने हॉकी खेली ही नहीं है, बल्कि हॉकी उसके जीवन का अहम हिस्सा है।

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