दो बार असफल होने पर नहीं मानी हार, एचएएस में कामयाबी हासिल की तीसरी बार, सरकारी स्कूल से पढ़कर अफसर बनने वाले कांगड़ा के उपायुक्त राज्य कर एवं उत्पाद शुल्क विनोद सिंह डोगरा की प्रेरककथा

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दो बार असफल होने पर नहीं मानी हार, एचएएस में कामयाबी हासिल की तीसरी बार, सरकारी स्कूल से पढ़कर अफसर बनने वाले कांगड़ा के उपायुक्त राज्य कर एवं उत्पाद शुल्क विनोद सिंह डोगरा की प्रेरककथा

 

धर्मशाला से संजीव कौशल की रिपोर्ट

 

हमीरपुर के ग्रामीण क्षेत्र से संबंध रखने वाले कृषक पृष्ठभूमि वाले परिवार के होनहार बेटे ने टाटपट्टी वाले सरकारी स्कूल से शिक्षा हासिल कर हिमाचल प्रशासनिक सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा को पास कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। हालांकि उस युवा को दो बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन असफलता की परवाह किये बगैर तीसरे अटेम्प्ट में साल 2000 में 12वां रैंक हासिल कर एचएएस बनने का गौरव हासिल किया। राज्य सेवा आयोग की और से यह परीक्षा चार विभागों के 18 पदों के लिए आयोजित की गई थी और इस परीक्षा को उतीर्ण करने पर उस युवा को आबकारी एवं कराधान अधिकारी के रूप में कालाअम्ब में पहली तैनाती मिली। यह प्रेरककथा वर्तमान में कांगड़ा के उपायुक्त राज्यकर एवं उत्पाद शुल्क विनोद सिंह डोगरा की है। वे ग्रामीण युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं।

फिजिक्स में एमएससी और एचआरडी में डिप्लोमा

हमीरपुर जिला के टोणी देवी क्षेत्र के बनालग गांव के शिक्षक तुलसी राम डोगरा के घर 5 जुलाई 1980 को पैदा हुए विनोद डोगरा ने 1995 में राजकीय उच्च पाठशाला पोंच से दसवीं की पढ़ाई करने के बाद 1997 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हमीरपुर से नॉन मेडिकल में जमा दो की परीक्षा पास कर हमीरपुर कॉलेज में दाखिला लिया। साल 2000 में बीएससी नॉन मेडिकल करने के बाद साल हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से साल 2003 में एमएससी फिजिक्स की डिग्री ली। उसके बाद उन्होंने ह्युमन रिसोर्स डवलपमेंट में डिप्लोमा हासिल किया।

विनम्र और शांत स्वभाव के अफसर

कालाअम्ब से अपने करियर की शुरुआत करने वाले विनोद सिंह डोगरा ने ज्वाली, रोहडू, चक्की, सरकाघाट और नालागढ़ में बतौर आबकारी एवं कराधान सेवायें दी हैं। पदोन्नति के बाद उन्हें कांगड़ा के उपायुक्त राज्यकर एवं उत्पाद शुल्क के तौर पर तैनाती मिली है। विभाग में उनकी पहचान मृदुभाषी, विनम्र और शांत स्वभाव वाले अधिकारी के रूप में होती है, जिनके पास निर्णय लेने की जबरदस्त क्षमता है। उनकी पत्नी बोटनी में एमएससी हैं और उनकी चार साल की एक बेटी वैष्णवी ठाकुर है। विनोद सिंह डोगरा ट्रेकिंग के शौक़ीन हैं और पढना उनकी आदत में शुमार है।


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