देवानंद की ‘ट्रैक्सी डाइवर’ से चमकी मिस शिमला, हिंदी और पाकिस्तानी फिल्मों की अभिनेत्री शीला रमानी ने पचास के दशक में जीता था मिस शिमला का खिताब

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देवानंद की ‘ट्रैक्सी डाइवर’ से चमकी मिस शिमला, हिंदी और पाकिस्तानी फिल्मों की अभिनेत्री शीला रमानी ने पचास के दशक में जीता था मिस शिमला का खिताब

मुंबई से अविनाश शर्मा की रिपोर्ट

पचास के दशक में मिस शिमला का खिताब जीतने वाली बेपनाह खूबसूरती से लेबरेज हुस्न की मल्लिका शीला रमानी को जैसे ही 1954 में फिल्म टैक्सी ड्राइवर के लिए सदाबहार अभिनेत्रा देवानंद के ऑपोजिट साइन किया गया, रातों- रात वह सिल्वर स्क्रीन की क्वीन बन गई।
वह ‘लक्स शॉप’ की ऐड का फेस बन गई जो उस समय हर भारतय अभिनेत्री का बड़ा सपना होता था। भारत और पाकिस्तान की फिल्मों अपने जानदार अभिनय के दम पर सालों सुर्खियां बटोरने वाली शीला रम्मानी का अस्सी साल की उम्र में जब निधन हुआ तो पता चला कि जीवन के आखिरी दिनों में वह मध्यप्रदेश के महू में गुमनाम जीवन जी रही थी।

 

सिंध से पहुंची मुंबई

 

मूलत: पाकिस्तान के सिंध में जन्मी शीला शुरू से ही फिल्मों में काम करना चाहती थीं। वे अपने मामा के जरिये हिंदुस्तानी फिल्मों में आई। उनकी मुलाकात हीरो देवानंद के भाई चेतन आनंद से हुई। उन्हें 1954 में पहली फिल्म देवानंद के साथ ‘टैक्सी ड्राइवर’ में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई। उन्होंने 1956 में पाकिस्तानी फिल्म अबाना में भी काम किया। जंगल किंग 1959, रिटर्न और मिस्टर सुपरमैन 1960 के अलावा तीन बत्ती-चार रास्ता, नौकरी, मीनार, रेलवे प्लेटफार्म, फंटूश, सुरंग और आनंद मठ जैसी फिल्मों में सेकंड हीरोइन के रूप में काम किया।

 

भारत- पाक में जलवा

शीला रमानी ने हिंदी फिल्मों के अलावा पाकिस्तानी फिल्मों में भी काम किया था। अंतिम समय में वे महू में गुमनामी में जीवन बिता रही थीं। 1954 (62 साल पहले) में फिल्म स टैक्सी ड्राइवर की कामयाबी के बाद वे ‘लक्स सोपÓ के ऐड में नजर आने लगी। यह वह दौर था जब ‘लक्स सोप'[ का ऐड पाना हर हीरोइन का सपना होता था।


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