दिल्ली से लेह तक विश्व के सबसे ऊंचाई व लंबे 32 घंटे यात्रा वाले रूट पर सेवाएं देने के लिए एचआरटीसी का लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में है नाम दर्ज, 2023 मई को बीआरओ की मंजूरी के बाद होगा बहाल 15 सितंबर से बंद रूट, जानिये इस रूट की खास बातें

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दिल्ली से लेह तक विश्व के सबसे ऊंचाई व लंबे 32 घंटे यात्रा वाले रूट पर सेवाएं देने के लिए एचआरटीसी का लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में है नाम दर्ज, 2023 मई को बीआरओ की मंजूरी के बाद होगा बहाल 15 सितंबर से बंद रूट, जानिये इस रूट की खास बातें
फोकस हिमाचल ब्यू की केलांग से रिपोर्टरो
विश्व के सबसे अधिक ऊंचाई और दिल्ली से लेह तक 32 घंटे की लंबी यात्रा वाले रूट पर एचआरटीसी की सेवाएं 2023 मई से शुरू हो जाएंगी। दिल्ली से लेह रूट पर बस सेवा गत 15 सितंबर को बंद कर दी गई थी। दिल्ली-लेह के बीच हिमाचल परिवहन निगम की बस बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की मंजूरी के बाद अगले साल मई 2023 में रोड क्लियरेंस मिलने पर इस रूट पर बस सेवा शुरू हो जाएगी। विश्व में सबसे ऊंचाई व लंबे माने जाने वाले इस रूट पर सेवाएं देने के लिए एचआरटीसी का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। लेह रूट का हमारे देश के लिए सामरिक दृष्टि से बहुत महत्व है। कारगिल युद्ध के दौरान इस रूट का प्रयोग भारतीय सेना ने असला बारूद पहुंचाने के लिए किया था। जानिये इस रूट के बारे में और कई खास बातें।हिमाचल प्रदेश का सबसे प्राचीन गांव मीरपुर कोटला, आरंभिक काल का माना जाता है यहां का किला, कई प्राचीन मूर्तियां इसकी गवाह, 1988 में हुई थी इस गांव की खोज
शीत मरुस्थल तक चार राज्य व चार दर्रों से गुजरती है बस
लेह-दिल्ली सबसे लंबा रूट है। इस रूट पर बस 32 घंटों में चार राज्यों की सैर करवाती है। हालांकि, सर्दियों में तापमान के गिरने व बफबारी के कारण यह रूट बंद हो जाता है। इसके बाद मई में ही बहाल किया जाता है। इस बस यात्रा में दिल्ली की चकाचौंध से लेकर मनाली के पहाड़ और लाहुल और लेह का शीत मरुस्थल दिखता है। यह रूट बस सेवा देने के लिए निगम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुका है। इस रूट पर बस कई ऐसे दर्रों से गुजरती है, जहां का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे रहता है। पहला दर्रा रोहतांग पड़ता है जो 13050 फीट की ऊंचाई पर है। हालांकि अटल टनल रोहतांग बनने के बाद इस दर्रे का रुख अब नहीं करना पड़ता। बारालाचा दर्रा 16020, लाचुंग दर्रा 16620 और तंगलंग दर्रा 17480 फीट की ऊंचाई पर है, जहां से बस गुजरकर लेह पहुंचती है। इस रूट पर सैलानी खतरनाक रास्तों के अलावा, प्रकृति के अदभुत नजारों का लुत्फ ले सकते हैं। साथ ही इस रूट पर बस केलांग, पटसू, जिंगजिंग बार, 21 लूप्स, व्हिस्की नाला और सूरजताल से होते हुए कई रमणीय स्थानों से गुजरती है।इस रूट पर सिर्फ एचआरटीसी की ही बस चलती है।
सुहाने सफर का ले सकते हैं आनंद
पहाड़ी रास्तों के रोमांच और यात्रा का शौक रखने वाले सैलानी इस सुहाने सफर का आनंद ले सकते हैं। लेह दिल्ली का रोमांचित करने वाला 1026 किलोमीटर के बस पर सफर का 1740 रुपये तक किराया होता है। 32 घंटे की अवधि वाली इस लेह से मनाली होते हुए दिल्ली की इस यात्रा में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व लेह लद्दाख सहित दिल्ली में घूमने का अवसर मिलता है।इस बस में तीन चालक व दो परिचालक सेवाए देते हैं। लेह से दिल्ली चलने वाली बस का पहला चालक लेह से केलंग तक सेवाएं देता है। दूसरा केलंग से सुंदरनगर तक जबकि तीसरा सुंदरनगर से दिल्ली तक सुरक्षित सफर करवाता है।बेंगलुरु की 54 वर्षीय विल्मा क्रास्टो कार्वाल्हो मोटरसाइकिल से दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे मोटरेबल खरदुंगला पास ’तक पहुंचने वाली सबसे बड़ी उम्र भारतीय महिला
मौसम के अनुसार चलती है बस
इस रूट पर सड़क की स्थिति को देखते हुए बस सेवा शुरू की जाती है। मौसम खराब होने के चलते इस रूट पर ड्राइवरों और कंडक्टरों को भी दिक्कत आती है। इसलिए अब बिना बीआरओ की क्लियरेंस के बस सेवा शुरू ही नहीं होगी। इस रूट पर वर्ष 2019 में बस सेवा शुरू की गई थी। इस रूट पर एचआरटीसी की बस दिल्ली से लेह तक 1026 किलोमीटर का सफर तय करती है, जिसे पूरा करने में करीब 32 घंटे लगते हैं। हालांकि, अटल टनल तैयार न होने से पहले इस बस सेवा को 36 से ज्यादा घंटे लगते थे, लेकिन अटल टनल बन जाने के बाद 4 घंटे और करीब 46 किलोमीटर का सफर कम हुआ।
अटल टनल ने कम की दूरी
विश्व के सबसे ऊंचे और लंबे रूट लेह-मनाली-दिल्ली के बीच हिमाचल परिवहन निगम की बस बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन की मंजूरी के बाद ही चलेगी। यह रूट इसी साल 15 सितंबर को बंद कर दिया गया था। इस रूट पर मई 2008 में सबसे पहले बस सेवा शुरू हुई थी और अब बीते 14 साल से हर साल यह बस सेवा लेह जाने वाले के लिए उपलब्ध रहती है। दिल्ली-मनाली-लेह रूट की दूरी 1072 किलोमीटर है। दिल्ली से लेह पहुंचने के लिए यात्रियों को पहले 36 घंटे का समय लगता था, लेकिन अटल टनल के बनने से रोहतांग पास नहीं जाना पड़ता और चार घंटे का समय बचता है। ऐसे में यह सफर 32 घंटे में पूरा होता है।
बेंगलुरु से जोधपुर तक 37 घंटे सफर करती है बस
बेंगलुरु से जोधपुर की बस यात्रा भारत में सबसे लंबी यात्रा में से एक है। बस मुंबई, अहमदाबाद, सूरत और अन्य शहरों से होकर गुजरती है। इस रूट से जाते हुए सड़कें आपको चौड़ी मिलेंगी, साथ ही ये जर्नी आपको शहर की हलचल से लेकर बड़े-बड़े खेतों से होकर निकालती है। जोधपुर, जिसे नीले शहर के नाम से भी जाना जाता है, यहां पहुंचने के बाद आपको राजस्थान की खूबसूरती का एहसास होगा। जोधपुर के कुछ प्रमुख आकर्षणों में आप मेहरानगढ़ किला और कायलाना झील जरूर देखेंगे। बेंगलुरु से जोधपुर की बस यात्रा में 1943 किमी की दूरी तय करने में लगभग 37 घंटे लगते हैं।लद्दाख को भारत में मिलाया था नादौन के महान शूरवीर जनरल जोरावर सिंह ने, तिब्बत अभियान के दौरान वीरगति को हुए प्राप्त, विश्व के इतिहास की अनोखी घटना, विजेताओं ने बनाई शत्रु सेनानायक की समाधि

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