दादा की कमाई, पोते ने शान बनाई, नगरोटा बगवां के घोड़व गांव के मशहूर वैद्य दूलो राम के परम्परागत ज्ञान की विरासत संभाल रहा उनका पोता डॉ. मोहित कुमार

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दादा की कमाई, पोते ने शान बनाई, नगरोटा बगवां के घोड़व गांव के मशहूर वैद्य दूलो राम के परम्परागत ज्ञान की विरासत संभाल रहा उनका पोता डॉ. मोहित कुमार, आयुर्वेद चिकित्सा पद्वति की ठसक, नगरोटा बगवां में आज भी अपनी खास पहचान रखता है वैद्य दूलो राम मैमोरियल क्लीनिक
नगरोटा बगवा से जसवंत जस्सो की रिपोर्ट
यह प्रेरककथा आयुर्वेद चिकित्सा पद्वति की ठसक की है। नगरोटा बगवां शहर के साथ सटे घोड़व गांव के वैद्य दूलो राम की तीसरी पीढ़ी उसकी परम्परागत चिकित्सा की विरासत को संभाल रही है। नगरोटा बगवां में बेशक अब एलोपैथी चिकित्सा पद्वति के कई क्लीनिक खुल चुके हों, लेकिन पांच दशक पुराना ‘वैद्य दूलो राम मैमोरियल क्लीनिक’ आज भी अपनी खास पहचान रखता है। वैद्य दूलो राम ने परम्परागत चिकित्सक के रूप में न केवल कांगड़ा बल्कि पंजाब तक अपनी पहचान बनाई थी। चार दशक से भी लंबे अर्से तक वे हजारों रेागियों को जड़ी – बूटियों से नवजीवन देने में जुटे रहे। वे वात पित्त और कफ के रोगों के उपचार के माहिर वैद्य थे। इस क्लीनिक का संचालन अब उनके पोते डॉ. मोहित कुमार संभाल रहे हैं, जबकि डॉ. मोहित के पिता सुदर्शन कुमार उनके सहयोगी हैं। सुदर्शन कुमार ने अपने पिता वैद्य दूलो राम से जड़ी- बूटियों से उपचार का परम्परागत ज्ञान हासिल किया है। इस क्लीनिक की टीम में दो शामिल अन्य दो युवाओं ने जड़ी- बूटियों से उपचार के परम्परागत ज्ञान को अपने नाना वैद्य दूलो राम से सीखा है। इस क्लीनिक में महीने में औसतन 600 रोगी उपचार के लिए आते हैं।
फौज में सीखा हुनर
साल1919 में पैदा हुए दूलो राम महज चार जमात तक स्कूली शिक्षा हासिल कर पाए। इसके बाद वे ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हो गए। साल 1939 से 1944 तक सेना में नौकरी करने के दौरान उन्होंने जड़ी- बूटियों से चिकित्सा करने में महारत हासिल की। उनके बेटे सुदर्शन बताते हैं कि उनके पिता सेना में फस्र्ट एड का कार्य भी करते रहे। सेना से बोर्ड पेंशन आने बाद दूलो राम ने अपने बहनोई महलू वैद्य के साथ मिल आयुर्वेद की प्रेक्टिस शुरू की और इस जोड़ी ने खूब नाम कमाया। चार दशक तक यह जोड़ी आयुर्वेदिक चिकित्सकों के रूप मेंं चमक बिखेरती रही। वैद्य दूलो राम को टेलरिंग का हुनर भी आता था। वर्ष 2001 में वह स्वर्ग सिधार गए।
बेटे के पास पिता के नुस्खे
वैद्य दूलो राम के बेटे सुदर्शन कुमार के पास अपने पिता के जड़ी- बूटियों से उपचार के कई बहुमूल्य नुसखे मिले हैं। वैद्य दूलो राम धौलाधार की पहाडियों से खुद जड़ी- – बूटियां एकत्रित कर दवाईयां बनाते थे। उन्होंने अपने बेटे को भी वे तमाम फार्मूले बताए। हालांकि अब अधिकतर बिमारियों के लिए बाजार में आयुर्वदिक दवाएं उपलब्ध होने के चलते सुदर्शन कुमार बहुत कम दवाईयां खुद तैयार करते हैं। वे कहते हैं कि अभी भी बहुत से लोग अंग्रेजी दवाईयों की जगह आयुर्वेद को प्राथमिकता देते हैं।

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