दसवीं में हिमाचल बोर्ड के चौथे टॉपर रहे अनिल संगराई, अपने हुनर से मंजिल पाई, 35 साल 9 महीने और 25 दिन के सेवाकाल के बाद 31 मार्च को 6वें सर्कल से 28वें अधीक्षण अभियंता के तौर पर हुए  सेवानिवृत

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दसवीं में हिमाचल बोर्ड के चौथे टॉपर रहे अनिल संगराई, अपने हुनर से मंजिल पाई, 35 साल 9 महीने और 25 दिन के सेवाकाल के बाद 31 मार्च को 6वें सर्कल से 28वें अधीक्षण अभियंता के तौर पर हुए  सेवानिवृत

कुल्लू से विनोद भावुक की रिपोर्ट

यह एक शिक्षक पिता का अनुशासन ही था कि मंडी जिला के जोगिन्द्रनगर उपमंडल के प्राइमरी शिक्षक पूर्ण चंद संगराई के सबसे बड़े बेटे अनिल संगराई शुरू से ही पढ़ने- लिखने को लेकर न केवल धीर – गंभीर थे, बल्कि प्राथमिक स्कूल से ही उनकी गिनती एक प्रतिभाशाली स्टूडेंट के तौर पर होती थी. राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जोगिन्र् नगर के लिए यह गौरव के क्षण थे, जब स्कूल के एक स्टूडेंट ने बोर्ड परीक्षा में मेरिट में जगह बनाई थी. मेरिट लिस्ट में अनिल संगराई का चौथा नंबर था. दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए डीएवी जालंधर में दाखिला लिया और प्रेप नॉन मेडिकल में फोर्थ रेंक हासिल किया और गुरु नानक देव युनिवार्सिटी में 17वें स्थान पर रह कर अपनी चमक बिखेरी. आगे की पढ़ाई जारी रहती, इससे पहले ही रिजनल इंजीनियरिंग कॉलेज श्रीनगर( जम्मू कश्मीर) में सिविल इंजीनियरिंग के लिए उनका चयन हो गया. साल 1984 में डिग्री हासिल करते ही 5 जून 1985 को उनका चयन हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग में बतौर कनिष्ठ अभियंता हो गया. अनिल संगराई 31 मार्च  2021 को 35 साल 9 महीने और 25 दिन के सेवाकाल के बाद 6वें सर्कल से 28वें अधीक्षण अभियंता के तौर पर सेवानिवृत हुए.

सफर के मील पत्थर
5 जून 1985 को शिमला में बतौर ग्रेजुएट जेई के साथ अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले अनिल संगराई 1988 में मंडी डिविजन -1 में जेई के पद पर स्थान्नंत्रित हुए और फिर 1990 में जोगिन्द्रनगर में जेई रहे. साल 1997 में पदोन्नत हो कर एसडीओ लड़भड़ोल लगे. साल 2008 में उन्हें रोहडू में एसडीओ फिर नेशनल हाईवे शाहपुर में ईओ रहे. साल 2011 में पदोन्नत होकर कार्यकारी अभियंता बने और चीफ ऑफिस मंडी में तैनाती मिली. 15 जनवरी 2018 को पदोन्नत हो कुल्लू स्थित लोक निर्माण विभाग के सर्कल-6 में बतौर अधीक्षण अभियंता कार्यभार संभाला. विभिन्न स्थानों पर कार्यकाल के दौर पुलों, सड़कों और भवनों के निर्माण में अहम् भूमिका अदा की.

परिजनों से मिले मेहनत और विनम्रता
अनिल संगराई के पिता स्वर्गीय पूर्ण चंद और माता स्वर्गीय श्रीमती राजेंद्र देवी दोनों इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन परिजनों से मिली मेहनत और विनम्रता की सीख आज भी उनके बेटे की सबसे बड़ी पूंजी है. अनिल की उनसे छोटी तीन बहनें हैं. उनकी धर्मपत्नी रीता जेबीटी टीचर हैं. बेटा शिवम नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलोजी हमीरपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री करने के बाद एमबीए की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी जेपी यूनिवर्सिटी वाकनाघाट से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर एक प्रतिष्ठित मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब कर रही हैं.

यारों के यार हैं संगराई
अनिल संगराई के घनिष्ठ मित्र सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी सतीश चौधरी बताते हैं कि अनिल संगराई जैसे प्रतिभान अफसर और संवेदनशील मित्र बिरले ही होते हैं. विनम्रता उनके व्यक्तित्व की पहचान है और तमाम व्यस्तता के बावजूद उनके चेहरे की हंसी और ठेठ पहाड़ी लहजा किसी का भी दिल जीत सकता है. उनके एक अन्य घनिष्ठ मित्र विजय जम्वाल बताते हैं बचपन से अब तक अनिल जैसे थे, वैसे ही हैं, एक अबोध बालक की तरह. उनका डील डौल उनके व्यक्तित्व को चार चांद लगता है. अनिल संगराई कहते हैं, ‘ सेवानिवृति के बाद पुराने दिनों को जीना है और कुछ समाज के बेहतर निर्माण के लिए कुछ ख़ास करना है.


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