तीन दिन में बाल शोषण का मामला सुलझाया, दोषी को दस साल के लिए सलाखों के पीछे पहुंचाया, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सुरक्षा दस्ते में शामिल रहे चम्बा सदर के थानेदार शाकिनी कपूर

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तीन दिन में बाल शोषण का मामला सुलझाया, दोषी को दस साल के लिए सलाखों के पीछे पहुंचाया, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सुरक्षा दस्ते में शामिल रहे चम्बा सदर के थानेदार शाकिनी कपूर
चम्बा से मनीष वैद की रिपोर्ट
चम्बा में पिछली पारी के दौरान पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुए एक मामले की तीन दिन में जांच पूरी कर 5वें दिन अदालत में चलान पेश कर आरोपी को उसके अपराध के लिए अदालत से दस साल की सजा दिलवाने वाले शाकिनी कपूर वर्तमान में चम्बा सदर पुलिस थाना प्रभारी हैं। दो साल सात महीने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सुरक्षा दस्ते में शामिल रहे इंस्पेक्टर शाकिनी कपूर ने चम्बा सदर के प्रभारी बनने के बाद अपराधियों और नशे के सौदागरों पर पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है। एक तरफ जहां वे चरस माफिया के लिए काल बन गए हैं, वहीं खनन माफिया की भी रीढ़ तोड़ कर रख दी है। उन्होंने यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले और शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ शिकंजा कस दिया है।
जोगिंद्रनगर थाने से शुरुआत
साल 2010 में शाकिनी अधीनस्थ सेवायें चयन बोर्ड हमीरपुर की परीक्षा पास कर हिमाचल प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर भर्ती हुए और 15 जनवरी 2010 को उनकी पहली पोस्टिंग जोगिंद्रनगर पुलिस स्टेशन में हुई। उसके बाद चम्बा, पुलिस चौकी होली के इंचार्ज और अतिरिक्स्त
एसएचओ चम्बा रहे। साल 2016 में इंस्पेक्टर के तौर पर पदोन्नत होकर तीसरी आईआरबी बटालियन में सेवायें देने के बाद किहार- तरेला में कंपनी कमांडर रहे। प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री के सुरक्षा दस्ते में शामिल होने वाले पहले पुलिस अफसर शाकिनी कपूर ही थे। पौने तीन साल सेवायें देने के बाद दो माह पहले ही उन्हें चम्बा सदर का थाना प्रभारी लगाया गया है।
उच्च शिक्षित पुलिस अफसर
18 मार्च 1984 को पालमपुर उपमंडल के सपैड़ू डाकघर के तहत आते गोरट गांव के साधारण कृषक दम्पति जगदीश चंद और बरतया देवी के घर पहले बच्चे के रूप में जन्म लेने वाले शाकिनी की आरम्भिक शिक्षा मिडल स्कूल स्पैड़ू में हुई और जमा दो तक की पढ़ाई साल 2002 में सीनियर सैकेंडरी स्कूल कंडबाड़ी से पूरी करने के बाद 2005 में विक्रम बत्रा कॉलेज पालमपुर से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से ह्यूमन रिसोर्स डवलपमेंट में मास्टर डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने इग्नू से टूरिज्म मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का डिप्लोमा भी किया है।
दोस्त ने दी जीवन को दिशा
शकिनी कपूर के परिजन निरक्षर जरूर थे, लेकिन उन्हें शिक्षा की अहमियत पता थी, यही कारण था कि तमाम आर्थिक तंगियों के बावजूद उन्होंने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। यूनिवर्सिटी के दिनों में बिलासपुर के निवासी सुनील कुमार कश्यप (वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर) ने न केवल बड़े भाई की तरह उन्हें जीवन की दिशा दी, बल्कि आर्थिक रूप में भी सहारा दिया। 2015 में शाकिनी की शादी गीता से हुई है और उनके दो बेटे पांच साल का दक्ष और 2. 5 साल के लक्ष हैं। शाकिनी लोक संगीत और शायरी के शौक़ीन ही नहीं अच्छे जानकार भी हैं और खेलों के प्रति भी दीवानगी है।
आम आदमी में हो पुलिस का विश्वास
शाकिनी कपूर कहते हैं कि पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी प्राथमिकता आम आदमी का पुलिस के प्रति विश्वास कायम करना है। वे कहते हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है और मेहनत कभी बेकार नहीं जाती है। युवाओं को खुद पर भरोसा रख कर अपना लक्ष निर्धारित करना चाहिए, वहीं अभिभावकों को भी बच्चों पर अपनी इच्छायें थोपने से परहेज करना चाहिए। भेड़चाल के बजाये बच्चे की रूचि वाले करियर के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

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