‘टांडा’ से एमबीबीएस की पढ़ाई, सेना में कैप्टन बन ‘योल’ आई, 19 साल में एमबीबीएस में सलेक्शन, 24 साल में डॉक्टर, 26 साल की उम्र में आर्मी अफसर बनने वाली दीक्षा सोनी की प्रेरककथा

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‘टांडा’ से एमबीबीएस की पढ़ाई, सेना में कैप्टन बन ‘योल’ आई, 19 साल में एमबीबीएस में सलेक्शन, 24 साल में डॉक्टर, 26 साल की उम्र में आर्मी अफसर बनने वाली दीक्षा सोनी की प्रेरककथा
कांगड़ा से आशीष बहल की रिपोर्ट
महज 19 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा पास कर एमबीबीएस के लिए सलेक्शन हुआ और 24 साल की उम्र में डॉक्टर बन गई। दो साल हिमाचल प्रदेश के हेल्थ डिपार्टमेंट में सेवायें दीं और 26 साल की उम्र में शार्ट सर्विस कमीशन पास कर आर्मी अफसर बन गई। यह प्रेरककथा है कांगड़ा बस स्टैंड से सटे गांव सेवकरा की होनहार बेटी दीक्षा सोनी सोनी की। दीक्षा वर्तमान में भारतीय सेना में कैप्टन बन ‘योल’ कैम्प में सेवायें प्रदान कर रही हैं। सेना में जाने से पहली दीक्षा ने दो साल तक टांडा मेडिकल कॉलेज, ज्वालाजी और कांगड़ा सिविल अस्पताल में सेवाएं दीं और शार्ट सर्विस कमीशन के जरिये सेना की राह पकड़ी।
महार्षि विद्या मंदिर और डीएवी की होनहार
सुरिंदर सोनी और सुनीता सोनी के घर साल 1993 में पैदा हुई दीक्षा के पिता पेशे से सुनार का काम करते हैं और माता सिलाई अध्यापिका हैं। दीक्षा की प्रारंभिक शिक्षा महार्षि विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल कांगड़ा से हुई और जमा दो डीएवी कांगड़ा से करने के बाद डॉ. राजेंद्र कुमार मेडिकल कॉलेज कांगड़ा से एमबीबीएस की पढ़ाई की। बचपन से ही तीव्र बुद्धि दीक्षा को 19 साल की उम्र में ही एमबीबीएस में दाखिल मिला और 24 साल की छोटी सी उम्र में ही डॉक्टर बन कर परिवार का गौरव बढ़ाया।
पहले प्रयास में पास किया शार्ट सर्विस कमीशन
अढाई साल तक डॉक्टर के रूप में कार्य करते हुए लोगों की सेवा करने के बाद दीक्षा ने भारत्तीय सेना में जाने का विचार किया और शार्ट सर्विस कमीशन के जरिये सेना में जाने की तैयारी शुरू की। 300 डॉक्टरों के पदों में केवल 30 पद लड़कियों के लिए रखे गए थे। शार्ट सर्विस कमीशन के कठिन टेस्ट में दीक्षा ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की और 15 अक्टूबर 2020 को योल केंट में कैप्टन पद पर तैनात हुई। दीक्षा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता- पिता, ताया- ताई व व अपने नाना को देती हैं।
दीक्षा का कहना है कि भारतीय सेना में शामिल हो कर देश सेवा उसके लिए गौरव की बात है। दीक्षा की कामयाबी पर इतना कहना बनता है-
मंजिल उन्हें मिलती है, जिसके इरादों में जान होती है।
पंखों से कुछ नही होता दोस्तो, हौंसलो से उड़ान होती है।।

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