टांकरी में माहिर यह शिक्षक नौ साल तक रहे आकाशवाणी धर्मशाला की बुलंद आवाज, बहुयामी प्रतिभा के धनी हैं नगरोटा बगवां के भूपेंद्र जम्वाल

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टांकरी में माहिर यह शिक्षक नौ साल तक रहे आकाशवाणी धर्मशाला की बुलंद आवाज, बहुयामी प्रतिभा के धनी हैं नगरोटा बगवां के भूपेंद्र जम्वाल

नगरोटा बगवां से जसवंत जस्सो की रिपोर्ट

 

हिमाचल प्रदेश प्रारम्भिक शिक्षा विभाग में मुख्य शिक्षक के तौर अपनी सेवायें दे रहे नगरोटा बगवां के भूपेंद्र जम्वाल बहुयामी प्रतिभा के धनी हैं। उन्होंने आकस्मिक उद्घोषक के लिए लिखित और स्वर परीक्षा उत्तीर्ण करके आकाशवाणी धर्मशाला में लगभग नौ साल अपनी लच्छेदार भाषा और बुलंद आवाज से श्रोताओं का मनोरंजन किया है। वे पहाड़ी भाषा की टांकरी लिपि के माहिर हैं और कांगड़ी वाक्य विन्यास पर विशेष कार्य करने के साथ स्केच मेकिंग में विशेष रुचि रखते है। उन्होंने टांकरी लिपि का विशेष ज्ञान टांकरी गुरु हरिकृष्ण मुरारी से लिया है। भूपेंद्र जम्वाल की रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती आ रही हैं। पांच साझा संग्रह में उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाएं आकाशवाणी तथा निजी रेडियो चैनल्स पर प्रसारित हो आ रही हैं। कांगड़ी भाषा पर शोध करने वाले अमेरिकी डॉ. रॉबर्ट डी ईटन को ढूंढकर भूपेंद्र जम्वाल ने उनसे मिलकर कांगड़ी पर विशेष परिचर्चा की है। वे उनके लगातार संपर्क में हैं जब भी ईटन का भारत दौरा होता है वे विशेष तौर पर मिलते हैं।

पाठशाला के लिए समर्पित शिक्षक

 

भूपेंद्र जम्वाल उन शिक्षकों में आते हैं जो अपनी पाठशाला के लिए समर्पित रहते हैं। यह उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि वर्ष 2018 में उनकी पाठशाला ने स्वच्छ पाठशाला का प्रथम पुरस्कार अर्जित किया। वे पाठशाला के सभी कार्यक्रमों में अभिभावकों की लगातार प्रतिभागिता सुनिश्चित करने वाले शिक्षक हैं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न स्थानों पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभागिता को बल देते देते हैं। वे सर्व/समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विभिन्न कार्यशालाओं में स्रोत व्यक्ति तथा मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर चुके हैं। वे वर्तमान में सम्बद्ध शिक्षक संघ में खण्ड महासचिव की भूमिका में हैं।

दादा के संगीत और कलाप्रेम और बुआ के साहित्य प्रेम का प्रभाव

दादा सालीग्राम के संगीत और कलाप्रेम और बुआ सुभाषना के साहित्य प्रेम का प्रभाव होने के कारण भूपेंद्र की लिखने में रुचि उत्पन्न हुई। कॉलेज की ओर से विभिन्न साहित्यिक और भाषण प्रतियोगिताओं में प्रतिभागी बनने का अवसर मिला। स्वर्गीय डॉक्टर प्रेम भारद्वाज के प्रोत्साहन से लेखन के क्षेत्र में वे निरंतर कार्यरत हैं विभिन्न भाषाओं को सीखने की ललक के चलते उन्होंने पंजाबी, उर्दू का ज्ञान हासिल किया और कांगड़ी और हिंदी में लेखन को तरजीह दी। भूपेंद्र जम्वाल को विभिन्न कार्यक्रमों में मंच संचालन का विस्तृत अनुभव है। वे कविता, ग़ज़ल, लघुकथा, व्यंग्य आदि विधाओं में माहिर हैं और कांगड़ी व अन्य पहाड़ी भाषाओं और लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए विशेष रूप से प्रयासरत हैं। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया टूल्स यूट्यूब और फ़ेसबुक को जरिया बनाया है।

धलूं स्कूल के सितारे हैं भूपेंद्र

 

भूपेंद्र का जन्म 21 सितम्बर 1974 को धलूं गांव के किशोर चंद और दर्शन देवी के घर जन्मस्थान में हुआ। किशोर चंद माता श्रीमती दर्शना देवी: वर्तमान वर्तमान में वे नगरोटा बगवां के बड़ाई हार के निवासी हैं। बचपन से कुशाग्रबुद्धि के मालिक भूपेंद्र की प्राथमिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक प्राथमिक पाठशाला कड़ाहपुरा और राजकीय उच्च विद्यालय धलूं से हुई और बीएससी के लिए डीएवी कॉलेज कांगड़ा में प्रवेश लिया। इस बीच जेबीटी के लिए उनकी सिलेक्शन हो गई। भूपेंद्र ने स्नातक की पढ़ाई करने के बाद अंग्रेजी में एमए किया है। उनकी पत्नी सीमा के उन्हें हमेशा प्रेरित किया जबकि जमा दो की स्टूडेंट पुत्री कामाक्षी भी पिता के पदचिन्हों पर चलने लगी है।


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