ज्वाली के बशिदों ने लिखी जल संरक्षण की कहानी, मिल कर बचाया नौण का पानी

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ज्वाली के बशिदों ने लिखी जल संरक्षण की कहानी, मिल कर बचाया नौण का पानी
ज्वाली से कपिल मेहरा की रिपोर्ट
कांगड़ा जिला के ज्वाली के बशिदों ने जल संरक्षण की अनूठी कहानी लिख दी है। सरकार का मुंह ताकने के बजाये खुद लोगों ने मिलकर न केवल नौण का पानी का संरक्षण किया है, बल्कि यहां से पेयजल, नहाने- धोने व सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवा कर मिसाल पेश की है। यहां पर 12 महीने स्वच्छ व शीतल पेयजल बहता रहता है। ज्वाली का एक प्राकृतिक जल स्त्रोत, जिसे नौण कहा जाता है, उसके कायाकल्प में नौण विकास समिति से अहम भूमिका अदा की है। नौण विकास समिति ने जलस्त्रोत का जीर्णोद्वार कर स्थानीय बशिंदों के लिए पेयजल, नहाने- धोने व सिंचाई की सुविधा का प्रबंध किया है। पानी का मुख्य स्त्रोत प्राकृतिक है और एक पहाड़ी से निकलता है। समिति के सदस्यों ने रोजाना सुबह— शाम खाली समय में श्रमदान कर नौण का कायाकल्प कर दिया है। रविवार और छुट्टी वाले दिन तो समिति सदस्य सारा दिन यहां की साफ सफाई में जुटे रहते हैं।
बच्चों के लिए गोपाल वाटिका
नौण के साथ ही बच्चों के लिए खेलने व उछल– कूद को गोपाल वाटिका का निर्माण किया गया है। बताते हैं कि नौण विकास समिति से पहले नौण को संवारने में गोपाल दास नाम के एक कर्मचारी ने अपना अभूतपूर्व योगदान दिया था, जिसके नाम पर समिति ने इस वाटिका का नामकरण किया है।
दिवार पर 14 मंदिर
सरोवर की बगल में एक ही दिवार पर करीब 14 मंदिर बने है और दिवार पर ही माता शीतला, मनसा देवी, शनिदेव व अन्य देवी– देवताओं की मूर्तियां बनाई गईं हैं, जो अपने प्राचीन स्वरूप को बयां करती प्रतीत होती हैं। लोग यहां स्नान करने के बाद इन मूर्तियों पर जल चढ़ाते हैं। सरोवर के साथ ही यहां पर तीन शिव मंदिर और एक हनुमान का मंदिर भी मौजूद है। नौण सुधार समिति ने इसकी उचित देख-रेख करते हुए इस धरोहर को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
विधायक व सांसद के प्रयास
जवाली के पूर्व विधायक रहे नीरज भारती ने यहां विधायक निधि से एक सामुदायिक भवन और कांगड़ा- -चंबा के सांसद रहे डॉ राजन सुशांत ने सांसद निधि से यहां पार्क बनाने में सहयोग देकर इस प्राचीन धरोहर को संवारा है। स्थानीय लोगों के सहयोग से यहां पर महिलाओं व पुरूषों के लिए अलग– अलग स्नानाघर का निर्माण व बच्चों के खेलने के लिए गोपाल वाटिका का निर्माण करवाया है।
लोगों की मदद से बची धरोहर
नौण विकास समिति के प्रधान गुरमीत सिंह व सहयोगी अवतार सिंह, नारायण सिंह निक्का, अजय कुमार, वेद प्रकाश विनय मेहरा, विक्कू व पवन का कहना है कि इस प्राचीन धरोहर को संवारने में जवाली कई लोग कर अपना योगदान देते हैं। यहां पर राजस्थानी कारीगरों से शिव मंदिर का निर्माण करवाया गया है। मंदिर के जीर्णोद्धार पर करीब 40 लाख रूपए खर्च किए जा चुके है। मंदिर परिसर में हर बार महाशिवरात्रि पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। नौण से कुछ ही मीटर दूरी पर देहर खड्ड के समीप हर साल 13 व 14 अप्रैल को जिला स्तरीय बैसाखी पर्व का आयोजन किया जाता है। इस दौरान भी नौण को लाइटों आदि से सजाया जाता है।

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